अष्टम की चन्द्रमा जातक को क्या प्रभाव देता है

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बात करें यदि हम अष्टम भाव में स्थित चन्द्रमा की तो यदि आपका चन्द्रमा कुण्डली के अष्टम भाव में है तो ऐसा व्यक्ति अत्यधिक भावुक स्वभाव का और एक अच्छे व्यक्तित्व वाला होता है। ऐसा जातक दूसरों के द्वारा दिये गये दर्द को बहुत ही गहराई के साथ महसूस करते हैं। कुछ मामलों में दूसरे व्यक्तियों का इमोशनल अत्याचार भी आपको ज्यादा गहराई से प्रभावित करता है जिसके कारण जातक मानसिक रूप से बहुत सारी परेशानियों का सामना करते हैं।

इसके अलावा चन्द्रमा यदि कुण्डली के अष्टम भाव में हो तो वह व्यक्ति दूसरे व्यक्तियों के मन में क्या चल रहा है उसे समझकर जल्दी ही भाँप लेता है। जब कभी उस जातक द्वारा पैसा खर्च करने की बात आती है तो यह व्यक्ति अपने खुले हाथों से पैसा उड़ाते हैं यूँ कहें तो यह व्यक्ति बहुत दिलदार होते हैं वैदिक ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार जब कभी भी चन्द्रमा कुण्डली के अष्टम भाव में होता हैं तो जातक का सभी लोगों तथा हर क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ जाता है।

अष्टम भाव में चंद्रमा की उपस्थिति के प्रभाव

यदि किसी जातक की कुण्डली में चन्द्रमा अष्टम भाव में उपस्थित हो तो ऐसा जातक चंद्रमा के प्रभाव के कारण बहुत चंचल स्वभाव का होता है जिसके कारण जातक के निर्णय लेने की क्षमता में भी परिवर्तन होता रहता है। चंद्रमा के अष्टम भाव में प्रभाव से जातक पैतृक सम्पत्ति या किसी पुरानी विरासत से अत्यधिक धन प्राप्त करता है। परन्तु यदि कुण्डली में बनी हुई ऐसी स्थिति में जातक यदि लम्बी यात्रा कर रहे हैं तो उस समय उन्हें विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि यात्रा के दौरान आपको कोई दुर्घटना अथवा परेशानी हो सकती है। वैसे तो जातक के अष्टम भाव में चन्द्रमा की स्थिति आपको लम्बी आयु प्रदान करती है लेकिन कुछ परिस्थितियों में आपको अपने जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

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जातक के स्वास्थ्य पर अष्टम भाव के चन्द्रमा का प्रभाव

यदि किसी जातक की कुण्डली में अष्टम भाव में चन्द्रमा की उपस्थिति हो तो ऐसे जातकों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है इन जातकों के अंदर एक गजब सी ऊर्जा होती है जिसके कारण वह व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत होते हैं यह व्यक्ति अपनी हर परिस्थितियों में समायोजित होने में सक्षम होते हैं। अपने स्वास्थ्य की छोटी-मोटी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान नही देते है जिसके कारण ऐसी कोई भी बीमारी आप पर असर नही कर पाती है। इन जातकों की सोचने समझने की क्षमता बहुत ज्यादा आश्चर्य जनक होती है जिसके कारण आप तनाव जैसी समस्याओं से भी कोसों दूर रहते हैं।

यदि कोई जातक मांसपेशियों की समस्या से परेशान है और आपकी कुण्डली के अष्टम भाव में चन्द्रमा उपस्थित है तो ऐसी स्थिति में आपका स्वास्थ्य थोड़ा ज्यादा खराब रह सकता है दिन प्रतिदिन हुए कमजोर स्वास्थ्य के कारण आपकी इच्छा शक्ति बहुत ज्यादा कमजोर होने लगती है जिसके कारण आप कोई भी चुनौती में पूर्ण फैसले लेने में सक्षम नहीं हो पाते हैं।

अष्टम भाव में चन्द्रमा हो तो जातक को पानी वाले स्थान से हमेशा बचना चाहिए इसके अलावा ऐसे कई स्थानों पर जाने से बचना चाहिए जहाँ पर पानी की अधिकता ज्यादा हैं। अष्टम भाव में चन्द्रमा के होने के कारण आपको पानी वाले प्रभावों से हमेशा दूर रहने की सलाह दी जाती है।

अष्टम भाव के चन्द्रमा का उसके व्यक्तित्व पर प्रभाव

यदि किसी जातक की कुण्डली के अष्टम भाव में चन्द्रमा की उपस्थिति हो तो ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में अत्यधिक मेहनती होता है परन्तु फिर भी इन जातकों के लिए किसी लक्ष्य की प्राप्ति करना बहुत आसान नहीं होता है। अष्टम भाव में चन्द्रमा की उपस्थिति से ऐसे जातक अपने लक्ष्य की प्राप्ति करने में एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं। इसके अलावा इन व्यक्तियों को ज्ञान की भूख इतनी ज्यादा होती है कि उसे हासिल करने के लिए आप हर स्रोत का इस्तेमाल करते हैं। इस बात का एहसास उन्हें हर समय रहता है। की हमारे जीवन में ज्ञान ही सफलता की एक कुंजी होती है।

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इसके अलावा अष्टम भाव का चन्द्रमा व्यक्ति को एक समझदार व्यक्ति बनाने में मदद करता है। इन जातकों के ऊपर जब कभी भी मुसीबतों का पहाड़ टूटता है तो यह जातक कभी किसी परेशानियों को लेकर शोर नहीं मचाते हैं बल्कि सभी समस्याओं का समाधान वह शांति से करते हैं। इन जातकों के इन्हीं गुणों से उनके व्यक्तिगत और व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता की प्राप्ति होती है।

इसके अलावा जातक की जन्मकुण्डली में चन्द्रमा यदि अत्यधिक अशुभ स्थिति में हो तो ऐसा जातक बहुत क्रोधी तथा अत्यधिक भावुक स्वभाव का होता है। यह जातक अपने जीवन में अवसाद की बीमारी से पीड़ित होता है साथ ही यह जातक अपनी बात से हमेशा मुकर जाने की समस्या से ग्रसित रहते हैं।

जातक की माता पर अष्टम भाव के चन्द्रमा का प्रभाव

यदि किसी जातक की कुण्डली में अष्टम भाव के चन्द्रमा का प्रभाव जातक की माता पर पड़ रहा है तो इसके कारण जातक को इसके दो तरह से प्रभाव मिलते हैं पहला ये की या तो माता की मृत्यु हो जाती है और दूसरा आपकी माँ आपसे ज्यादा प्यार नही करती है। यहाँ अष्टम भाव में चन्द्रमा की यह स्थिति माता से सम्बन्धित कुछ कष्टों को प्राप्त कराती है। चन्द्रमा के अष्टम भाव में होने के कारण जातक को भावनात्मक रूप से ऊंच-नीच का भी सामना करना पड़ सकता है साथ ही कुण्डली में यह स्थिति आपकी माता से सम्बन्धित कुछ कर्मों को भी दर्शाता है।

जातक के प्रोफेशनल लाइफ पर अष्टम भाव के चन्द्रमा का प्रभाव

यदि व्यापार कर रहे जातकों की कुण्डली के अष्टम भाव में चंद्रमा की उपस्थिति हो तो ऐसे जातक को हर समय सावधान रहने की जरूरत है अन्यथा आपको व्यापार में अत्यधिक घाटा हो सकता है। अपने किसी व्यवसायिक क्षेत्रों में अपना पैसा इन्वेस्ट करने से पहले अपने से बड़ों की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए। कुण्डली में बनी ऐसी स्थिति में आपको अपना व्यापार अपने पार्टनर के साथ ही शुरू करना चाहिए इसमें आपको अत्यधिक सफलता मिलेगी।

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अष्टम भाव में चन्द्रमा का जातक के मस्तिष्क पर प्रभाव

किसी जातक की कुण्डली के अष्टम भाव में चंद्रमा उपस्थित हो तो ऐसे जातक बहुत विनम्र स्वभाव के होते हैं। विनम्रता, एकाग्रता और दुर्लभ चोरी जैसे तीन पहलू जातक के अष्टम भाव वाले व्यक्तियों पर गहरा प्रभाव डालते हैं। विनम्र स्वभाव वाले जातक किसी का दिल जीतने के साथ ही एकाग्रता द्वारा जो कोई भी कार्य करते हैं वह व्यक्ति उसमें बहुत अत्यधिक ध्यान केन्द्रित करते हैं। जातक के मन और मस्तिष्क को एकदम शांत करने में अष्टम भाव का चन्द्रमा अत्यन्त लाभकारी होता है।