आइये जानते है मासिक शिवरात्रि, पूजन विधि, व्रत कथा महत्व और शुभ मूहूर्त 2023

हिन्दू धर्म में भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा गया है। उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। फलतः उपासको को सभी परेशानियों से राहत मिलेगी और शिव जी की विशेष कृपा प्राप्त होगी। इस दिन को लोग अत्यधिक शुभ मानते है।
ऐसी मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि पूर्वक पूजा करने से असंभव कार्य भी संभव हो जाते है। सभी संकटो से मुक्ति मिलती है तथा भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
प्रत्येक माह मे पड़ने वाली शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि पूर्वक पूजा करने से तथा व्रत करने से दुख, दरिद्रता और दोष से मुक्ति मिलती है तथा सुख शांति की प्राप्ति होती है। इस व्रत के पुण्य फलो से अविवाहित लड़कियों की शादी शीघ्र हो जाती है तथा विवाहित महिलाओं को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

मासिक शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त 2023ः-

इस वर्ष 2023 में माघ माह की मासिक शिवरात्रि का व्रत 20 जनवरी दिन शुक्रवार को रखा जायेगा।

चतुर्दशी तिथि का प्रारम्भ;  20 जनवरी शुक्रवार को सुबर 09 बजकर 59 मिनट पर होगा

चतुर्दशी तिथि का समापन;  21 जनवरी दिन शनिवार को 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

पूजा शुभ मुहूर्तः-

मासिक शिवरात्रि की पूजा रात्रि के समय शुभ माना जाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त 21 जनवरी को रात्रि में 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। पूजा के लिए निशा काल 54 मिनट के लिए है।
पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार उन्हें विनाशक भी कहा जाता है। भगवान शिव को त्रिदेवों मे सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार माता लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती माता ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था। उन्होने सभी मनोकामना को पूर्ण किया। इसी प्रचलन के कारण मासिक शिवरात्रि का प्रचलन हुआ।

मासिक शिवरात्रि पूजन विधिः-

☸ सर्वप्रथम स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प करें।
☸ उसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय भगवान और नंदी की पूजा करें।
☸ इस दिन शिव जी का जलाभिषेक करें जिससे विशेष लाभ की प्राप्ति होगी।
☸ अभिषेक के बाद शिव जी को उनकी प्रिय वस्तुओ का भोग लगाएं तथा शिव मंत्रों का जाप करें।
☸ शिवरात्रि की रात में उपासकों को पूरी रात जागकर भगवान शिव की पूजा करें।
☸ शिव जी पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएँ और अगरबत्ती, दीपक फूल और फल के माध्यम से उनकी पूजा करें।
☸ शिव चालीसा, शिव अष्टक, शिव पुराण, शिव स्त्रोत का श्लोक पढ़े।
☸ उसके बाद शाम को फल खा सकते है लेकिन व्रत रखने वालों को इसका सेवन नही करना चाहिए।
☸ मासिक शिवरात्रि का व्रत महिला एवं पुरुष दोनो कर सकते है।

मासिक शिवरात्रि की कथाः-

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव महा शिवरात्रि के दिन मध्य रात्रि के समय लिंगम के रुप में स्वयं प्रकट हुए थें। जिसके बाद से सबसे पहले भगवान ब्रह्मा विष्णु ने उनकी पूजा की थी उस दिन से लेकर आज तक इस दिन को भगवान शिव के जन्म दिवस के रुप में मनाया जाता है।
एक बार की बात है ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवाद हो गया कि उनमें से कौन सर्वश्रेष्ठ है। उस दौरान उनके समक्ष आग का एक खम्भा दिखाई दिया। खम्भे की उत्पत्ति और अंत नही मिला वे दोनो आपस में सहमत हो गए कि जो कोई भी खम्भे के एक छोर की खोज करता है। वह दोनो के बीच सबसे बेहतर हेागा तब ब्रह्मा जी ने ऊपर देखने के लिए हंस के रुप मे उड़ान भरी, जबकि नीचे देखने के लिए विष्णु जी ने जमीन के माध्यम से खुदाई करने के लिए एक सुअर का रुप धारण किया।
कई युगों तक प्रयास करने के बाद उनमें से कोई भी सफल नही हो सका लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोला कि उन्होने सबसे ऊपर से देखा है, भगवान शिव ने दृश्य में दिखाई दिया और खुलासा किया कि यह वह था जो स्तम्भ के रुप में प्रकट हुआ था। अपनी असत्य की सजा के रुप में, भगवान शिव ने कहा कि ब्रह्मा जी के पास पृथ्वी पर उनके लिए समर्पित मन्दिर कभी नही होगा। यह शिवरात्रि का दिन था जब भगवान शिव लिंगम के रुप में प्रकट हुए।

मासिक शिवरात्रि का महत्वः-

धार्मिक ग्रंथों में मासिक शिवरात्रि के महत्व के बारे में बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा व्रत करने से भक्तो के सभी कष्ट दूर होते है तथा सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। साथ ही घर परिवार मे सुख-समृद्धि का आगमन होता है। शास्त्रों की माने तो शिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करने की मान्यता है, भगवान को मासिक शिवरात्रि का दिन अत्यन्त प्रिय होने के कारण भी इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। इस दिन रुद्राभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वैवाहिक जीवन मे चल रही परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

शिवरात्रि से जुड़े कुछ उपायः-

☸ यदि संतान सम्बन्धित कोई परेशानी है तो शिवरात्रि के दिन आटे से 11 शिवलिंग बनाए और उनका जलाभिषेक करें।
☸ यदि विवाह मे कोई परेशानी आ रही है तो शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाते समय ओम नमः शिवाय का जाप करें।