इंदिरा एकादशी 2023

इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष एकादशी को इंदिरा एकादशी है। इस दिन पितरो के लिए व्रत रखना पुण्य माना जाता है। इसके साथ ही यम लोक में यातनाएं झेल रहे पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इंदिरा एकादशी के दिन व्रत रखने से तथा कथा पढ़ने व सुनने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फलो की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से मन और शरीर दोनो ही संतुलित रहते है। इस एकादशी के उपवास को करने से गंभीर रोगो से रक्षा होती है।

इंदिरा एकादशी कथा

सतयुग के समय में महिष्मति नाम की एक नगरी में इन्द्रसेन नाम का एक प्रतापी राजा धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करते हुए शासन करते थे। वह राजा पुत्र-पौत्र धन-धान्य से आदि से सम्पन्न और भगवान विष्णु के परम भक्त थे। एक दिन जब राजा सुख पूर्वक अपनी सभा में बैठे थे तो आकाश मार्ग से महर्षि नारद उतरकर उनकी सभा में आये राजा उन्हें देखते ही हाथ जोड़कर खड़े हो गये और विधिपूर्वक आसन व अर्घ दिया। सभा में बैठकर मुनि ने राजा से पूछा की हे राजन! आपके सातो अंग कुशलता पूर्वक तो है ? आपकी बुद्धि धर्म में और आपका मन विष्णु भक्ति में तो लगता है ? देवर्षि नारद की ऐसी बाते सुनकर राजा ने कहा हे महर्षि आपकी कृपा  से मेरे राज्य में सबकुछ कुशल है तथा मेरे यहां यह कमार्दि सुकृत हो रहे है। आप कृपा करके अपने आगमन का कारण बताएं। तब ऋषि कहने लगे की हे राजन आप आश्चर्य देने वाले मेरे वचनो को सुनो मै एक समय ब्रह्म लोक से यमलोक गया वहां श्रद्धापूर्वक यमराज से पूजित होकर मैने धर्मशील और सत्यवान धर्मराज की प्रशंसा की उसी यमराज की सभा में महान ज्ञाानी और धर्मात्मा तुम्हारे पिता को एकादशी व्रत भंग होने के कारण दुख भोगते देखा उन्होंने संदेशा दिया है तो  मैं तुम्हें कहता हूँ उन्होंने कहा की पूर्व जन्म में कोई विघ्न हो जाने के कारण मैं यमराज के निकट रह रहा हूँ सो हे पुत्र यदि तुम अविश्वन कृष्णा इंदिरा एकादशी का व्रत मेरे निमित्त करो तो मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है। इतना सुनकर राजा कहने लगे हे महर्षि आप इस व्रत की विधि कृपा मुझे बताइयें। नारद जी कहने लगे अश्विन माह की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के दिन प्रातः काल श्रद्धापूर्वक स्नान से निवृत्त होकर पुनः दोपहर को नदी में जाकर स्नान करें फिर श्रद्धा पूर्व पितरों का श्राद्ध करें और दिन में एक बार भोजन करें प्रातः काल होने पर एकादशी के दिन दातुन करके स्नान करें फिर व्रत के नियमों को भक्तिपूर्वक ग्रहण करते हुए प्रतिज्ञा करें कि मैं आज सम्पूर्ण भोगो को त्याग कर निराहार एकादशी व्रत करुंगा। हे अच्युत! हे पुण्डरीकाक्ष! मै आपकी शरण में हूं आप मेरी रक्षा कीजिए, इस प्रकार नियमपूर्वक शालिग्राम की मूर्ति के आगे विधिपूर्वक श्राद्ध करके योग्य ब्राह्मणों को फलाहार एवं भोजन करायें और दक्षिणा दें पितरों के श्राद्ध से जो बच जाए उसको सुंघ कर गौ को दान दें तथा धूप, दीप, गंध, पुष्प, नैवेद्य आदि सब सामग्री से ऋषिकेश भगवान का पूजन करें। रात में भगवान के निकट जागरण करें इसके पश्चात द्वादशी के दिन प्रातः काल होने पर भगवान का पूजन करके ब्राह्मणों को भोजन करायें भाई-बन्धुओं, स्त्री और पुत्र सहित आप भी मौन होकर भोजन करें। नारद जी कहने लगे हे राजन इस विधि से यदि तुम आलस्य रहित होकर इस एकादशी का व्रत करोगे तो तुम्हारे पिता अवश्य ही स्वर्ग लोक को जाएंगे। इतना कहर नारद जी अंर्तध्यान हो गये। नारद जी के कथानुसार राजा द्वारा अपने बांधवो तथा दासों सहित व्रत करने से आकाश से पुष्पवर्षा हुई और उस राजा के पिता गरुण पर चढ़कर विष्णु लोक को गये। राजा इन्द्रसेन भी एकादशी के व्रत के प्रभाव से निष्कंटक राज्य करके अंत में अपने पुत्र को सिंहासन पर बैठाकर स्वर्ग लोक को गये।

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इंदिरा एकादशी महत्व

पितृपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहते है। इसमे श्री हरि की पूजा पीले फल फूल तथा वस्त्रों के साथ किया जाता है। इसके अलावा भगवान श्री हरि को अक्षत तुलसी जरुर अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यन्त ही प्रिय है। ऐसी मान्यता है कि यदि आप पितृपक्ष में किसी कारण वश पूर्वजो का श्राद्ध नही कर पायें तो इस दिन व्रत करने से पित्तर प्रसन्न होते है और आपको आशीर्वाद देते है। इस एकादशी व्रत से आपके पितरों के पापो से भी उन्हें मुक्ति मिलती है तथा उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। इस दिन भजन-कीर्तन करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है।

इंदिरा एकादशी व्रत के नियम

☸इंदिरा एकादशी का व्रत रखने वालो को अन्न जल ग्रहण किए बिना भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
☸विष्णु जी की पूजा मे पीले फल, फूल और तुलसी, गंगाजल का प्रयोग जरुर करें।
☸एकादशी का व्रत पूर्ण करने के बाद चांदी, तांबा, चावल और दही में से किसी एक वस्तु का दान करें।
☸इस दिन व्रत रखने वालो को रात्रि जागरण करना चाहिएऔर विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।

इंदिरा एकादशी व्रत में क्या न करे 

☸इंदिरा एकादशी का व्रत करने वालो को झूठ नही बोलना चाहिए और किसी की निंदा नही करनी चाहिए।
☸अगर आपने व्रत नही भी रख है तो भी एकादशी के दिन चावल का प्रयोग न करें।
☸मन को शांत रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
☸एकादशी का व्रत करने वालो को दशमी तिथि के बाद से सूर्यास्त के बाद भोजन नही करना चाहिए।

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इंदिरा एकादशी शुभ मुहूर्त

इंदिरा एकादशी प्रारम्भ तिथिः-  09 अक्टूबर 2023 दोपहर 12ः36 से                                            इंदिरा एकादशी समापन तिथि: 10 अक्टूबर 2023 दोपहर 03ः08 तक