इस दिन से शुरु हो रहा है पितृपक्ष, जानें इस दिन क्यों किया जाता है पितरों का तर्पण

पितृ पक्ष अपने सभी पितरों को तृप्त करने की एक पारम्परिक प्रथा है जो पूरी तरह से केवल पितरों को ही समर्पित होता है। पितृ पक्ष के दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है।

हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से होता है जो  आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को समाप्त होता है। हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का अत्यधिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन अपने पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, पंचबलि कर्म इत्यादि किये जाते है, कहा जाता है कि पितृ पक्ष में पितरों को तृप्त करने से हमारी कुण्डली में स्थित पितृ दोष समाप्त हो जाता है।

पितृ पक्ष तिथि का महत्व

देखा जाए तो हिन्दू धर्म में जैसे अन्य त्योहारों का अत्यधिक महत्व होता है ठीक वैसे ही हिन्दू धर्म के लोग पितृ पक्ष को भी अपने पितरों की शांति के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथि मानते हैं। इस दिन पितरों को तृप्त करने से परिवार में सुख-शांति, खुशहाली और उन्नति प्राप्त होती है इसके अलावा जातक के वंश की वृद्धि भी होती है।

आपको बता दें कि जब कभी पितृ देव नाराज होते हैं तो वे अपने वंश को श्राप देते हैं जिससे परिवार में कलह, अशांति , वंश की हानि या व्यक्ति संतान सुख से वंचित हो जाता है इसलिए सभी हिन्दू लोग अपने पितरों की शांति के लिए पितृ पक्ष को एक महत्वपूर्ण अवसर के रुप में मानते है। पितृ पक्ष के प्रारम्भ से लेकर अंत तक हर दिन की तिथि महत्वपूर्ण होती है जिसमें पूरी श्रद्धा से अपने पितरों का तर्पण विधिपूर्वक करना चाहिए।

READ ALSO   हाथी पर सवार होकर आ रही मांँ भगवती जानें सभी भक्तों पर कैसा होगा इसका प्रभाव

पितृ पक्ष कब से प्रारम्भ होगा

पितृ पक्ष की शुरुआत 29 सितम्बर 2023 को शुक्रवार के दिन से हो रही है। इस दिन भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि और प्रतिपदा श्राद्ध है। इस दिन से प्रारम्भ होकर पितृ पक्ष का समापन आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होगा। इस वर्ष आश्विन माह की अमावस्या तिथि 14 अक्टूबर को पड़ रही है।

पितृ पक्ष में क्या करें

☸ पितृ पक्ष प्रारम्भ हो जाने के दौरान सबसे पहले अपने पितरों का स्मरण करें।

☸ पितृ पक्ष के दौरान पितरों के देवता अर्यमा को अवश्य जल अर्पित करना चाहिए। कहा जाता है कि इस देवता के प्रसन्न होने से पितृ भी प्रसन्न होते है।

☸ पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धापूर्वक पितरों का तर्पण करने के लिए इस पूरे पक्ष में केवल ब्रह्मचर्य नियमों का ही पालन करें।

☸ उसके बाद पितरों का तर्पण करने के लिए स्वच्छ पानी में काला तिल, फूल, दूध तथा कुश मिलाकर ही अपने पितरों का तर्पण करें कहा जाता है कि पितरो के तर्पण में कुश का उपयोग करने से पितर जल्द ही तृप्त हो जाते हैं।

☸ पितृ पक्ष के दौरान आप पितृ पक्ष की पूरी तिथि के दिन स्नान के समय ही जल से पितरो का तर्पण करें ऐसा करने से पितरो की आत्माएं तृप्त होकर हमें अपना आशीर्वाद देती हैं।

☸ प्राचीन तथा धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष की सभी तिथियों में पितरों के लिए किसी भी समय भोजन अवश्य रखें और रखा हुआ भोजन गाय, कौआ या कुत्ते को खिला दें। कहा जाता है कि इन्हीं के माध्यम से यह भोजन पितरों तक पहुँच जाता है। ब्राह्मण को भोजन कराना भी लाभदायक माना जाता है।

READ ALSO   12 मार्च 2024 फुलेरा दूज

☸ पितृ पक्ष के दौरान पितरों के लिए श्राद्ध का कर्म प्रातः 11ः20 मिनट से लेकर दोपहर 02ः30 मिनट तक ही सम्पन्न कर लेना चाहिए ऐसा इसलिए क्योंकि श्राद्ध के लिए रोहिणी और कुतुप मुहूर्त का समय सबसे ज्यादा सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

पितृ पक्ष में क्या न करें

☸ पितृ पक्ष के दौरान इस पूरे पितृ की तिथि में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा इत्यादि नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहना चाहिए।

☸ पितृ पक्ष की तिथि के दौरान कभी भी घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान नही करना चाहिए अन्यथा कुण्डली में पितृ दोष उत्पन्न हो सकता है। 

☸ पितृ पक्ष के दौरान कभी भी कोई गलत कार्य नहीं करना चाहिए तथा बात-बात पर किसी से झूठ बोलने से भी बचना चाहिए। ऐसा करने से आपके पूर्वज आपसे नाराज हो सकते हैं।

☸ पितृ पक्ष के दौरान स्नानादि करते समय तेल या उबटन इत्यादि का प्रयोग करना वर्जित माना जाता है।

☸ पितृ पक्ष की पूरी तिथि के दौरान कभी भी नये वस्त्र नही खरीदने चाहिए और ना ही नये कपड़ों का उपयोग कहीं करना चाहिए।

पितृ पक्ष में नही होते कोई मांगलिक कार्य

बहुत से अन्य ज्योतिषियों तथा हमारे योग्य ज्योतिषाचार्य के. एम. सिन्हा जी के अनुसार पितृ पक्ष के बारे में यह कहा जाता है कि पितृ पक्ष की यह तिथि पूरी तरह से पितरों को समर्पित होती है और इस तिथि में हर दिन उनके लिए भोजन निकाला जाता है साथ ही ब्राह्मणों को भी भोजन कराने की परम्परा होती है। ऐसे में पितृ पक्ष में कोई भी शुभ कार्य करना उत्तम नही माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्य करने से पितृदेव तथा पितृ नाराज होते है इसलिए इन 15 दिनों के लिए होने वाले पितृ पक्ष के दौरान कोई मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, भूमि पूजन इत्यादि शुभ कार्य वर्जित माने जाते है। पितृ पक्ष के दौरान पितरों के तर्पण के लिए लोग पिंडदान और हवन भी करवाते हैं जिससे सभी पितृ अत्यधिक प्रसन्न होते है।

READ ALSO   रक्षाबन्धन 2022

पितृ पक्ष तिथि

पितृ पक्ष का आरम्भ 29 सितम्बर 2023 शुक्रवार के दिन से होगा।
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भः- 29 सितम्बर 2023 दोपहर 03ः26 मिनट से
प्रतिपदा तिथि समाप्तः- 30 सितम्बर 2023 दोपहर 12ः21 मिनट से।
कुतुप मुहूर्तः- सुबह 11ः47 मिनट से दोपहर 12ः35 मिनट तक।
रोहिणी मुहूर्तः- दोपहर 12ः35 मिनट से, दोपहर 01ः23 मिनट तक।
अपराह्न काल मुहूर्तः- दोपहर 01ः23 मिनट से दोपहर 03ः46 मिनट तक।