ईशान्यभिमुख भवन का शुभ एवं अशुभ परिणाम

ईशान कोण घर की उत्तर पूर्व दिशा होती है ज्योतिष के अनुसार यह घर का सबसे पवित्र स्थान होता है जिसमें ईश्वर का निवास स्थान होता है ऐसा माना जाता है की घर में ईशान कोण को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए जिससे घर में माता लक्ष्मी का वास ही वास्तु के अनुसार इस स्थान के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरुरी है ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव का एक नाम ईशान भी है। भगवान शिव का आधिपत्य उत्तर पूर्व दिशा में होता है। इसलिए घर में भी इस दिशा को मंदिर या पूजा के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है।

किन्तु वास्तु के अनुसार कुछ वस्तुएं घर के ईशान कोण में नही रखनी चाहिए अन्यथा आर्थिक हानि होने के साथ घर का विनाश भी हो सकता है।

आइए जानते है प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य के. एम. सिन्हा जी से घर के ईशान कोण के शुभ एवं अशुभ परिणामः-

अशुभ परिणामः- घर के ईशान कोण मे कोई भारी वस्तु नही रखना चाहिए इससे ऊर्जा का संचार रुक जाता है एवं इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते है। इसलिए इस स्थान पर भारी आलमारी स्टोर रुप आदि नही बनवाना चाहिए इस स्थान में कोई भी भारी सामान रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने लगती है।

ईशान कोण में जूते चप्पल न रखेंः- कभी भी ईशान कोण मे जूते चप्पल नही रखने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि घर का यह कोना सबसे पवित्र होता है और यह ईश्वर का स्थान भी माना जाता है इसलिए आप कभी भी इस जगह पर जूते चप्पल या फिर कूड़ा, कचरा इकट्ठा न करें ऐसा करने से घर में नकारात्मक उर्जा का संचार होता है और घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगती है। घर के उत्तर पूर्व कोने मे यानि की ईशान कोण में भूलकर भी आपको बाथरुम नही बनाना चाहिए ऐसा माना जाता है कि घर के इस कोने में भगवान का निवास है और उस जगह बाथरुम बनाने से शारीरिक समस्याएं झेलनी पड़ सकती है और ऐसा करने से आपका सारा जमा किया गया धन व्यर्थ की बीमारियों मे लगने लगता है और बहुत जल्द ही घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगती है।

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शयन कक्ष का निर्माण घर के ईशान कोण में न करेंः- कभी भी घर के ईशान कोण में खासतौर पर दंपति का शयन कक्ष नही बनाना चाहिए ऐसा करने से आपसी रिश्तो में मनमुटाव होता है और व्यर्थ की समस्याएं उत्पन्न होती है। घर का ईशान कोण भगवान शिव का माना जाता है और इस स्थान पर शयन कक्ष बनाने से घर में नकारात्मक उर्जा आती है।

गृह निर्माण के स्थल तथा गृहों के कोने में स्थित खाली स्थान अथवा बरामदों में ईशान तो आर्थिक स्थिति में हानि पहुंचती है। ईशान दिशा में कोई गलती हो तो उस घर की संतान विकलांग हो सकती है। अगर ईशान भाग ऊंचा हो तो धन की हानि के साथ संतान हानि के साथ अनेक प्रकार के कष्ट झेलने पड़ेंगे। ईशान दिशा में झोपडियों तथा पूरब व उत्तर की दीवारों से सटाकर घर बनाने से वंश विनाश के साथ दारिद्रय भी भोगना पड़ेगा। ईशान दिशा में कुडे़-कचरे के ढेर अथवा पत्थरों के ढ़ेर लगाने से शत्रुता आयु क्षीणता एवं दुश्चरित्र के कारण बन जाएंगें। इस दिशा में रसोई घर हो तो गृह कलह उत्पन्न होंगे और धन क्षय होगा।

शुभ परिणामः- अगर आप घर की खुशहाली चाहते है तो आपको घर के ईशान कोण पर हमेशा पूजा का स्थान बनाना चाहिए इस स्थान पर की गयी पूजा हमेशा ईश्वर को स्वीकार्य होती है और इससे घर की सुख-समृद्धि भी बनी रहती है।घर के ईशान कोण पर कोई खूबसूरत सी पेंटिग या भगवान की तस्वीर लगाया जा सकता है जो घर की सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखती है। इससे साथ ही आपको हमेशा इस कोने को साफ सुथरा रखना चाहिए जिससे घर में नकारात्मकता न आ सकें। ईशान कोण को हमेशा खाली रखें और इसे किसी भी बड़े सामान से न भरें यह स्थान हमेशा किसी जल के स्त्रोत जैसे कुआं, बोटिंग, मटका या फिर पीने का पानी के लिए सर्वोत्तम है। यदि आप नही घर बनवा रहे है तो घर के इसी कोने में बोटिंग की व्यवस्था करें। बच्चों के पढ़ने का कमरा हमेशा ईशान कोण में ही होना चाहिए ऐसा माना जाता है कि जब बच्चा इस दिशा में बैठकर पढ़ता है तब उसे ध्यान केन्द्रित करने में मदद मिलती है। ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाकर इसकी नियमित पूजा करने से भी आपको विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। ईशन कोण के निवासी अत्यन्त वैभव पूर्वक धन-सम्पत्ति प्राप्त करेंगे और उनकी संतान अत्यन्त मेधावी और त्यागी होगी। ईशान का कोना सही और पश्चिम की अपेक्षा पूरब में तथा दक्षिण की अपेक्षा उत्तर मे अधिक खाली जमीन हो और पश्चिम की अपेक्षा पूरब में तथा दक्षिण की अपेक्षा उत्तर में निम्न स्थल वाले साफ में निवास करने वाले गृहस्थ पीढ़ियों तक सुख-समृद्धि का जीवन व्यतीत करेंगे।

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