उत्पन्ना एकादशी 2023

हिन्दू पौराणिक कथाओं की मान्यताओं के अनुसार यह पर्व मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। इस व्रत का पालन करने से मनुष्यों को सभी बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिलती है। आज के दिन ही भगवान विष्णु ने उत्पन्न होकर राक्षस मरू का वध किया था। जिससे कारण इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा। इस व्रत को करने से से सभी सुख सुविधाओं की प्राप्ति होती हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है

यह व्रत करने से संतान की प्राप्ति होती है तथा रोगों से मुक्ति मिलती है। एकादशी का यह त्यौहार उत्तर भारत के अलग – अलग राज्यों अलग-अलग महीनों मे किया जाता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, और आंध्र प्रदेश में यह मुख्य रूप से मनाया जाता है।

उत्पन्ना एकादशी का महत्वः-

विष्णु जी की कृपा प्राप्त करने के लिए एकादशी का व्रत अवश्य रखें। यह व्रत करने से भक्तों को सभी तीर्थों के दर्शन के बराबर फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही आज के दिन दान करने से अगले जन्मों तक भी इस का फल भगवान श्री विष्णु कृपा से मिललता रहता है। उपासको के जीवन में आनंद रहता है। साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है।

उत्पन्ना एकादशी की पूजा विधिः-

इस दिन उपासकों को प्रातः काल स्नान आदि करके निवृत्त हो जाना चाहिए तत्पस्चात घर के मंदिर में दीपक जलाकर व्रत का संकल्प करना चाहिए। उसके बाद भगवान विष्णु को गंगाजल से अभिषेक कराएं। सब भगवान पुष्प, फूलों की माला तथा तुलसी का पत्ता अर्पित करें। यदि सम्भव हो तो इस दिन निराहर रहकर पुरे दिन प्रत भी रखें।

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उत्पन्ना एकादशी के निम्न लाभ है जो इस प्रकार हैः-

☸ यदि कोई उपासक निर्जल रहकर एकादशी का व्रत करें तो उसे सभी पापों से मुक्ति दिलाती है तथा मोक्ष भी मिलता है।
☸ एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु की सदैव बनी रहती है तथा दान करने से कई गुना फल मिलता है।
☸ उत्पन्ना एकादशी का व्रत पूरे मन से करने पर तीर्थों के दर्शन के बराबर ही फल मिलता है साथ ही पितरों को भी शांति मिलती है।
☸ इस एकादशी का व्रत करने से श्री हरि धाम की प्राप्ति होती है।

उत्पन्ना एकादशी की पौराणिक कथाः-

उत्पन्ना एकादशी की कथा बहुत ही प्रचलित है तथा पद्म पुराण में इसकी विस्तृत जानकारी मिलती है। एक बार की बात है धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान विष्णु से एकादशी व्रत की कथा जानने की बेहद उत्सुकता दिखाई तब श्री कृष्ण ने धर्मराज को यह कथा बताई।

एक बार की बात है सतयुग में मुर नामक एक राक्षस था उसने सभी स्वर्ग देवताओं को पराजित करके स्वर्ग पर अपना अधिकार जमा लिया। जिसके कारण तीनों लोको में हाहाकर मच गया और सभी देवता और ऋषिगण अपनी समस्या लेकर भगवान शिव के पास पहुंचे तब भगवान शिव ने कहा इस समस्या का समाधान भगवान श्री विष्णु के पास ही मिलेगा। अतः आप सभी उनके पास जाएं उसके बाद सभी सभी देवता भगवान श्री विष्णु जी के पास जाकर उन्हें सम्पूर्ण घटना के बारे में बताया। कालांतर में भगवान श्री हरि ने असुर मुर के सैकड़ों सेनापतियों का युद्ध करके विश्राम करने के लिए बद्रीकाश्रम चले गए थें। सेनापतियों के वध का समाचार सुनकर वह क्रोधित हो गया और बद्रीकाश्रम में पहुंच गया।

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उसी समय भगवान विष्णु के शरीर से एक कन्या का युद्ध हुआ। कन्या और असुर मुर के बीच भीषण युद्ध हुआ जिसमें मुर का वध हुआ। जब भगवान विष्णु अपनी निद्रावस्था से जागृत हुए तो उस कन्या के कार्यों की प्रशंसा सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उस कन्या का नाम एकादशी रखा और एकादशी तिथि को अतिप्रिय बताया। तब सभी देवताओं ने एकादशी की वंदना की और उनका मान-सम्मान भी किया। इस प्रकार कालांतर से ही एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है।

उत्पन्ना एकादशी शुभ तिथि, मुहूर्त एवं पारणः-

09 दिसम्बर 2023 दोपहर 01ः15 मिनट से शाम 03ः20 मिनट तक
एकादशी तिथि प्रारम्भः- 08 दिसम्बर 2023 सुबह 05ः06 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्तः- 09 दिसम्बर 2023, सुबह 06ः31 मिनट तक।