कार्तिक अमावस्या 2023

कार्तिक अमावस्या पितृ पूजा के लिए  सबसे अच्छा दिन माना जाता है। कार्तिक अमावस्या कार्तिक मास के दूसरे पक्ष यानि कृष्ण पक्ष के 15 वें दिन और मास के 30 वें दिन मनाई जाती है। कार्तिक अमावस्या के दिन पितरों से आशीर्वाद मांगा जाता है साथ ही सामर्थ्य के अनुसार दान भी दिया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन पर ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव नही पड़ता है।

कार्तिक अमावस्या के दिन तुलसी पूजा

इस दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व है। कार्तिक मास की अमावस्या को स्नान कर तुलसी और सूर्य को जल चढ़ाया जाता है और दोनो की पूजा की जाती है। कार्तिक अमावस्या के दिन तुलसी पौधे का भी दान किया जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी अति प्रिय है। माता तुलसी की पूजा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का एक माध्यम है। तुलसी पूजन से माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती है।

कार्तिक अमावस्या व्रत और पूजा की विधि

☸ भगवान विष्णु की आराधना करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। साफ और स्वच्छ कपड़े पहनना चाहिए।
☸ सूर्य देव को जल और तिल अर्पित कर पूजा करें।
☸ नव ग्रह स्त्रोत का पाठ करें इससे अच्छे ग्रहों के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ा सकते है।
☸नव ग्रह दोषो के निवारण के लिए सुबह विष्णु सहस्त्र नाम का जाप करें। इससे कुण्डली में बुरे ग्रहो के नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते है।
☸ शिवलिंग पर शहद के साथ सभी अभिषेक अनुष्ठानों को पूरा करके भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।
☸ किसी जरुरतमंद या वंचित व्यक्ति के घर या मंदिर में दीपक जलाएं यह शनि दोष को शांत करने में मदद करेगा।
☸ मां लक्ष्मी को भोग के रुप में फूल, मिठाई, फल और खीर का भोग लगाएं।
☸ भक्तो को केवल सात्विक भोजन ही करायेें। इस दिन प्याज और लहसून मांस, अण्डा, शराब और नशीली दवाओं का सेवन सख्त वर्जित है।
☸ मेवे, फल, दूध और मक्खन राजागिरा का आटा कुद्दु का आटा और सिंघाडे का आटा जैसे कुछ आटे का सेवन किया जाता है।
☸पूरे दिन शरीर को संतुलित रखने के लिए पानी दूध और ताजे जूस का सेवन करें।
☸ भोजन मे सेंधा नमक का प्रयोग करें।

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कार्तिक अमावस्या कथा

एक बार कातिर्क माह की अमावस्या तिथि के दिन धार्मिक कथाओं के अनुसार एक दिन देवी लक्ष्मी मार्ग से भटक जाती है पर रास्ते मे चलते-चलते उन्हें एक स्थान पर कुछ दीपक की रोशनी दिखाई देती है। देवी उस रोशनी के समीप जाती है तो देखती है की वहां एक झोपड़ी होती है। वहां एक वृद्ध स्त्री अपने घर के बाहर दीपक जलाएं हुए थी और दरवाजा खुला हुआ था वह स्त्री आंगन में बैठ कर अपना काम कर रही होती है। देवी लक्ष्मी उस महिला से रात भर वहां रुकने के लिए स्थान मांगती है। वह वृद्ध महिला देवी लक्ष्मी को विश्राम करने के लिए स्थान तथा बिस्तर की व्यवस्था करती है। देवी लक्ष्मी वहां विश्राम करने के लिए रुक जाती है। वृद्ध महिला की सेवा भाव और समर्पण के भाव को देखकर प्रसन्न होती है। इस दौरान वह वृद्ध महिला अपने काम करने जाती है। अगले दिन वह वृद्ध महिला जगती है तो देखती है कि उसकी साधारण सी झोपड़ी महल के समान सुन्दर भवन में गदल गयी होती है। उसके घर धन-धान्य की भरमार हो जाती है। किसी चीज की कमी नही रहती है। माता लक्ष्मी वहा से कब चली गयी थी उस वृद्ध महिला को पता नही चल पाता है तब माता लक्ष्मी उसे दर्शन देती है और बताती है की कार्तिक अमावस्या के दिन जो दीपक जलाता है। उसके जीवन से अंधकार समाप्त हो जाता है और वह प्रकाश कीे ओर सदैव अग्रसर रहता है तथा उसे मेरा आशीर्वाद प्राप्त होता है। उसके बाद से हर वर्ष कार्तिक अमावस्या को रात्रि में प्रकाश उत्सव मनाने और देवी लक्ष्मी पूजन की परम्परा चली आ रही इस दिन माता लक्ष्मी के आगमन के लिए पूजा-पाठ घरों के द्वार खोलकर रखने चाहिए और प्रकाश करना शुभ फलदायक होता है।

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कार्तिक अमावस्या महत्व

इस समय पर राम के वनवास से अयोध्या आगमन पर खुशियां मनायी जाती है तो कृष्ण द्वारा नरकासूर का वध करकेे प्रजा को कष्टों से मुक्ति दिलाना इसकी प्रसन्नता की लहर होती है। कई स्थानों पर हनुमान जन्मोत्सव की धूम होती है तो कही लक्ष्मी जी के आगमन को लेकर दीपों का उत्सव है।

कार्तिक अमावस्या पर दीप जलाने का महत्व

अमावस्या के दिन  सूर्योदय से पूर्व स्नान किया जाता है। स्नान कर पूजा पाठ को खास अहमियत दी जाती है। पवित्र नदियों मे स्नान का खास महत्व होता है। इस अमावस्या पर दीपदान का भी खास विधान होता है। यह दीपदान मंदिरों, नदियों के अलावा आकाश में भी किया जाता है। ब्राह्मण भोज, गाय दान, तुलसी दान, आंवला दान तथा अन्न दान का भी महत्व होता है। दीपदान का महत्व राम के अयोध्या लौटने की खुशी को व्यक्त करता है। साथ ही पितरों को मार्ग भी दिखलाता है।

देवी लक्ष्मी की पूजा

अमावस्या के दिन देवी लक्ष्मी की विशेष रुप से पूजा की जाती है। देवी लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान गणेश जी की भी पूजा आराधना की जाती है। इस दिन कुबेर की भी पूजा की जाती है।

कार्तिक अमावस्या शुभ मुहूर्त

कार्तिक अमावस्या प्रारम्भः- 12 नवम्बर 2023 02ः45 से
कार्तिक अमावस्या समापनः- 13 नवम्बर 2023 02ः57 तक

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