कालसर्प योग के निवारण के उपाय

यदि किसी जातक के कुण्डली में कालसर्प दोष हो तो उसे जीवन में शिक्षा, धन, परिवार, करियर, सेहत आदि से सम्बन्धित कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प से मुक्त होेने के उपाय बताये गये है।

☸ तांबे के शिवलिंग पर चढ़ने योग्य बड़ा सर्प लाकर उसकी प्राण प्रतिष्ठा करें, बुधवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त मे शिवालय पर चढ़ा दें तथा चांदी का सर्प-सर्पिणी का जोड़ा बहते जल में शाम को प्रवाहित करें अच्छा लाभ मिलेगा।

☸ प्रत्येक बुधवार को काले वस्त्र में उड़द या मूंग एक मुट्ठी रखकर पोटली बनाकर बहते जल में प्रवाहित करें ऐसा 72 बुधवार तक लगातार करें इसका लाभ अवश्य मिलेगा।

☸ पलाश के पुष्प गोमूत्र में कूट कर छायें मे सुखायें तथा उसका चूर्ण बनाकर बुधवार के दिन जल में मिलाकर स्नान करें 72 बुधवार तक पलाश मिश्रित जल से स्नान करने पर कालसर्प योग का प्रभाव शिथिल हो जायेगा।

☸ चांदी की सर्पाकार अंगूठी की प्राण-प्रतिष्ठा करके बुधवार को सूर्योदय काल में कनिष्ठिका अंगूठी में धारण करें यह प्रयोग अनेक बार परीक्षित है।

☸ नाग पंचमी का व्रत करें तथा नवनाग स्त्रोत का पाठ करें नव नाग स्त्रोत का पाठ भी अत्यन्त सफल प्रयोग होगा।

☸ अगर कालसर्प योग सर्वाधिक कष्ट देता हो तो श्रावण का सोमवार व्रत करें तथा पूरे एक वर्ष प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का दुग्धाभिषेक करें।

☸ राहु एवं केतु का मिश्रण रत्न लाजवर्त धारण करें। इससे भी अधिक शांति रहती है।

☸ अधिकतर कालसर्प योग ग्रस्त कुण्डलियों में पितृ दोष भी पाया जाता है। ऐसी स्थिति में नागपंचमी के दिन नाग के प्रतीक स्वरुप चांदी के नाग की पूजा-प्रार्थना करें उसे नाग में पितरों का आवाहन करें पितरों को शांति प्राप्त हो ऐसी प्रार्थना नागदेव सेकरें पुनः घर के सभी लोग उस नाग को नमस्कार करें। सायंकाल में नाग को बहते जल में प्रवाहित कर दें।

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☸ ताजी मूली का दान 12 बुधवार को करें। राहु के दान वस्तुओं का कम से कम 21 बुधवार को दान करें।

☸ 9 बुधवार को पानी वाला नारियल राहु मंत्र पढ़ते हुए बहते जल में प्रवाहित करें।

☸ शयन कक्ष में पर्दें, बेड़ सीट्स, तकियों के कवर इत्यादि में लाल रंग का ही प्रयोग करें।

☸ राहु सिहिंका का पुत्र है। सिंहिका पर हनुमान जीने विजय प्राप्त की थी अतः हनुमान जी की तांत्रिक उपासना से भी कालसर्प योग की चमत्कारिक शांति होती है। 108 दिनों तक हनुमान चालीसा का पाठ करें साथ मेें हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण अवश्य पढ़ें अथवा प्रत्येक मंगलवार को 108 पाठ करें। यह कम से कम 21 मंगलवार तक करना चाहिए।

☸ राहु हमेशा मंत्रों से ही वशीभूत होता है प्रत्येक बुधवार को राहु के मंत्र ओम रा राहवें नमः का क्षमता भर जाप करें।

☸ श्रावण मास में प्रतिदिन 108 बिल्वपत्र ओम नमः शिवाय करते हुए भगवान शिव को चढ़ावें यह भी अद्भुत प्रयोग है।

☸ प्रायः रसोई घर में ही बैठकर भोजन करें।

☸ बुधवार के दिन कुछ कोयले साथ में तांबे का सिक्का बहतें जल में प्रवाहित करें।

☸ घर के प्रवेश द्वार पर चांदी का स्वास्तिक लगायें।

☸ रात को सोते समय जौ के दाने सिरहाने रख ले प्रातः काल पक्षियों को खिलाने के लिए डाल दें।

☸ मसूर के दाल का दान भी कालसर्प योग के प्रभाव को कम करता है।

☸ कालसर्प योग दोष निवाकर मंत्र घर में स्थापित करके इसका नियमित पूजन करें।

☸ ओम नमः शिवाय मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करें जब 21 हजार बार हो जाए तो हवन व राहु का दान करें।

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☸ सवा महीने तक जौ के दाने पक्षियों को खिलायें।

☸ श्रावण मास में 30 दिनों तक श्री महादेव जी का अभिषेक करें।

☸ नाग पंचमी या पंचमी तिथि को चांदी के नाग की पूजा करें।

☸ पितरों का स्मरण करें तथा श्रद्धापूर्वक बहते पानी या समुद्र में नाग देवता का विसर्जन करें।

☸ गोमेद प्राण, प्रतिष्ठा कराकर धारण करें।

☸ सवा महीने देव दारु, सरसो तथा लोहबान इन तीनों को उबाल कर स्नान करें।

☸ राहु का दान तथा सोलह सोमवार का व्रत करें।

☸ प्रत्येक सोमवार को दही से भगवान शंकर पर ओम हर-हर महादेव कहते हुए अभिषेक करें यह केवल सोलह सोमवार तक करें, चांदी के नाग प्रतिमा का नित्य अभिषेक एवं पूजा करें तथा अभिषेक का जल ग्रहण करें।

☸ प्रतिदन अपने कुल देवता की उपासना करें।

☸ श्रीकार्तवीर्यार्जुन मंत्र का 32 हजार संख्या में जाप करें। श्री बटुक भैरव मंत्र का सवा लाख जप अनुष्ठान विधि-विधान से करना चाहिए।

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