कुण्डली के सभी भावों का रिश्तों पर पड़ने वाला शुभ अशुभ प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारी कुण्डली में स्थित प्रत्येक भाव का जातक के जीवन में अत्यधिक महत्व होता है क्योंकि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से हर एक कुण्डली अपने आप में एक जातक का पूर्ण स्वरूप होती हैं। कुण्डली के यह सभी भाव न केवल एक व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताते हैं बल्कि उस जातक से जुड़े हुए लगभग हर व्यक्ति और हर रिश्तों के बारे में जानकारी देता है, किसी जातक के लग्न कुण्डली से उस जातक के लगभग सभी रिश्तेदारियों के बारे में भी एक हद तक बताया जा सकता है तो आइए इसके बारे में और अत्यधिक जानकारी हमारे योग्य ज्योतिषाचार्य के. एम. सिन्हा जी से समझते हैं।

जब कभी किसी जातक की जन्मकुण्डली का रिश्तों के अनुसार विश्लेषण किया जाता है तो उसमें से लग्न भाव जातक की आत्मा के बारे में बताता है, कुण्डली के द्वितीय भाव से जातक के परिवार के बारे में जानकारी मिलती है, कुण्डली के तृतीय भाव से जातक के भाइयों और मित्रों के बारे में जानकारी मिलती है, कुण्डली के चौथे भाव से जातक के पारिवारिक वातावरण और वह जातक जिस घर में रहता है वहाँ के बारे में जानकारी प्राप्त होती है, कुण्डली के पंचम भाव से जातक के संतान के बारे में जानकारी मिलती है, कुण्डरी का षष्ठम भाव जातक के मामा और ननिहाल के बारे में बताता है, कुण्डली के सप्तम भाव से जातक की पत्नी और सहयोगियों के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है, कुण्डली का आठवां भाव जातक के ससुराल और ससुराल से जुड़े रिश्तेदारों के बारे में जानकारी देता है, कुण्डली के नवम भाव से जातक के पिता और पिता के परिवार में शामिल सदस्य दादा और दादी के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। इसके अलावा कुण्डली के दशम भाव से पिता के कुल की जानकारी प्राप्त की जाती है, कुण्डली का एकादश भाव जातक के बड़े भाई और पथ प्रदर्शक के बारे में बताता है, कुण्डली के द्वादश भाव से जातक के पड़ोसी मामी और चाची के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।

प्रथम भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली के प्रथम यानि लग्न भाव के बारे में बात करें तो मुख्य रूप से यह भाव स्वयं जातक की स्थिति का ही वर्णन करता है। कुण्डली के इस भाव से जातक की सुंदरता उसका चेहरा, शारीरिक बनावट आर्थिक स्थिति जातक का व्यवहार तथा उसकी सामाजिक हैसियत या इज्जत के बारे में जानकारी  प्राप्त की जाती है इन सभी के बारे में विश्लेषण कुण्डली के लग्न भाव से ही प्राप्त किया जाता है। इसके अलावा रिश्तों का बाकी विश्लेषण लग्न के सापेक्ष ही देखा जाता है।

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द्वितीय भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली का द्वितीय भाव जातक के परिवार के बारे में निश्चित जानकारी देने का काम करता है। यदि किसी जातक की कुण्डली के द्वितीय भाव में एक से अधिक शुभ या अनुकूल ग्रह उपस्थित हो तो ऐसा जातक आमतौर पर एक बहुत बड़े परिवार का हिस्सा होता है इसके अलावा यदि कुण्डली के द्वितीय भाव का अधिपति ग्रह मजबूत स्थिति में हो तो ऐसा जातक अपने परिवार के सदस्यों के साथ हमेशा जुड़ा हुआ रहता है।

इसके अलावा यदि कुण्डली का द्वितीय भाव और द्वितीयेश दोनों ही अशुभ स्थिति में हों तथा किसी अन्य पाप ग्रहों से दृष्ट हो या फिर द्वितीय भाव में कोई क्रूर और शत्रु ग्रह बैठे हों तो ऐसी स्थिति में जातक का परिवार भले ही बहुत लम्बा होता है परन्तु जातक अपने परिवार के साथ ज्यादा लम्बा समय व्यतीत नहीं कर पाता और नाहि अपने परिवार के साथ अपने सुख और दुख को साझा कर पाता हैं।

तृतीय भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली का तृतीय भाव सामान्य तौर पर भाइयों और मित्रों का भाव होता है। यदि जातक के तृतीय भाव में अकेला चन्द्रमा आकर बैठा हो तो ऐसे जातक खेलकूद के क्षेत्र में बहुत ज्यादा रुचि रखने वाले होते हैं। यह जातक अपने खेलकूद वाले क्षेत्र में भले ही बहुत ज्यादा नाम न कर पायें परन्तु यह जातक खेलकूद में ही हमेशा जुड़े रहने के बारे में सोचते हैं और अपने इस क्षेत्र में ईमानदारी पूर्वक आगे बढ़ते हैं। इसके अलावा देखा जाए तो इस भाव में जातक शारीरिक और मानसिक स्तर पर शक्ति प्राप्त करता है।

चतुर्थ भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली का चतुर्थ भाव जातक के पारिवारिक वातावरण के बारे में बताता है। कुण्डली के चतुर्थ भाव से जातक के सुख और माता के भाव के बारे में भी जानकारी प्राप्त होती है। यदि जातक की कुण्डली में चतुर्थ भाव कोई सौम्य ग्रहों से प्रभावित हो और चतुर्थ भाव का अधिपति ग्रह शुभ प्रभाव में हो तो ऐसे जातकों को अपनी प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत के लिए घर में अनुकूल वातावरण मिलता है साथ ही जातक की माता भी हमेशा सुखी रहती है। इसके अलावा जातक के चतुर्थ भाव में शनि ग्रह की उपस्थिति हो तो ऐसे जातक अपने घर से बहुत दूर रहने के कारण उन्हें अपने घर की बहुत याद आती है परन्तु मजबूरन उन्हें अपने नौकरी या किसी अन्य कारण से हमेशा घर से दूर रहना पड़ता है।

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पंचम भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली का पंचम भाव जातक के संतान के बारे में बताता है इसके अलावा कुण्डली के इस भाव से जातक अपनी अगली पीढ़ी को क्या सौंपता है इसके बारे में पता चलता है यदि जातक किसी को अपने पुत्रभाव से देखता है या उसे शिक्षा और ज्ञान देता है तो इसकी जानकारी भी पंचम भाव से प्राप्त होगी। एक शिक्षक के लिए उसका छात्र तथा रसोई का काम सीखा रही सास के लिए भी पंचम भाव से ही जानकारी प्राप्त की जाती है।

षष्ठम भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली का षष्ठम भाव जातक के मामा और ननिहाल पक्ष के लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त कराता है। सामान्य रूप से इस भाव को शत्रु भाव भी कहा जाता है। यदि किसी जातक का छठा भाव बहुत ज्यादा बलशाली है तो उसके शत्रु भी बलशाली होते हैं। इसके अलावा जो जातक आपके मुकाबले में नहीं हैं परन्तु फिर भी अपने कार्यों में रुचि लेते हैं और आपको उसके बारे में हर समय नकारात्मक बातें बताते रहते हैं उनके बारे में भी कुण्डली के षष्ठम भाव से ही जानकारी प्राप्त की जाती है।

सप्तम भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली का सप्तम भाव जातक की पत्नी तथा सहयोगियों के बारे में बताता हैं। इस भाव का विश्लेषण करने से जातक के वैवाहिक जीवन में सुख और दुखों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जाती है। इसके अलावा जातक की सम्पत्ति खान-पान, जातक की परवरिश साथ ही पूर्वजन्म में अर्जित किया हुआ धन, जातक के चेहरे की चमक और सुन्दरता का भी विश्लेषण द्वारा जानकारी प्राप्त की जाती है। कुण्डली के इस भाव से एक समझदार लड़की तथा बहन और पोती के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जाती है।

अष्टम भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली के अष्टम भाव से जातक के ससुराल और ससुराल से जुड़े हुए लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। इसके अलावा ससुराल पक्ष के लोगों के सुख दुख तथा आर्थिक संकटों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। कुण्डली के अष्टम भाव से कभी-कभी नपुंसकता के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जाती है। हालांकि कुण्डली का अष्टम भाव मृत्यु का भाव होता है परन्तु कुण्डली में केवल नर ग्रह के अकेले होने के कारण यह मृत्यु का ही घर नही रह जाता है।

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नवम भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली के नवम भाव से जातक के पिता तथा पिता पक्ष से दादा और दादी के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। इसके अलावा पिता पक्ष के सदस्यों की आध्यात्मिक रुचि और प्रगति, जातक की बुद्धिमता साथ ही व्यक्ति के दूसरे विवाह, जातक का भाग्य इसके अलावा देश-विदेश के योगों और साक्षत्कार के बारे में देखा जाता है। कुण्डली के नवम भाव से जातक की बहन तथा प्रवास के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जाती है।

दशम भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली के दशम भाव से जातक के पिता के कुल की जानकारी प्राप्त की जाती है। इसके अलावा जातक पिता सुख, पिता से मिली हुई पद प्रतिष्ठा, किसी चीजों पर अपना अधिकार तथा मान-सम्मान के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। कुण्डली के दशम भाव से नौकरी और व्यापार, खुद की सम्पत्ति, गमी, बेइज्जती, होशियारी और जातक को मिलने वाले इंसाफ के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जाती है। कुण्डली के दशम भाव से कर्म और राजकाज की जानकारी भी प्राप्त की जाती है।

एकादश भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली के एकादश भाव से जातक के बड़े भाई और पथ प्रदर्शक के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। इसके अलावा कुण्डली के इस भाव से मित्र, जमाई, धन-लाभ, भेंट, वस्तु तथा भिन्न लिंगो वाले जातकों का विश्लेषण भी किया जाता है और इससे सम्बन्धित जानकारी प्राप्त की जाती है।

द्वादश भाव में स्थित ग्रहों का रिश्तों पर शुभ अशुभ प्रभाव

कुण्डली के द्वादश भाव से जातक के पड़ोसी, मामी और चाची के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। इसके अलावा चाचा, बुआ का विचार भी कुण्डली के बारहवें भाव से ही करना चाहिए। कभी-कभी मामी और मौसा का विचार कुण्डली के छठे भाव से सप्तम ग्रह अर्थात कुण्डली के बारहवें भाव से ही विश्लेषण कर जानकारी प्राप्त की जाती है।