कुम्भ लग्न की विशेषता और कारक, मारक और सम ग्रह

वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष शास्त्र में 12 लग्नों को निर्धारित किया गया है, उनमें से ग्यारहवा लग्न कुंभ होता है जिसके स्वामी शनिदेव होते है, आगे हम आपको कुंभ लग्न से जुड़ी कुछ आवश्यक बातो को बतायेंगे जैसे-इस लग्न का व्यक्ति, उनका शारीरिक गठन, स्वास्थ्य, कुंभ लग्न के जातकों का प्रेम सम्बन्ध, कुंभ लग्न वालो के शुभ तथा अशुभ ग्रह और उनके शुभ रंग और शुभ रत्न।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंभ लग्न

कुंभ लग्न के जातकों पर शनि ग्रह का प्रभाव रहता है, इस लग्न का प्रतीक जल से परिपूर्ण घड़ा है, शनि देव के प्रभाव के कारण इस लग्न (कुंभ लग्न) के जातक न्यायप्रिय होते है ये किसी के साथ अन्याय नही होने देते, कुंभ लग्न के जातक अपने आप को किसी भी पर्यावरण मे ढाल लेते है।
कुंभ को वायु तत्व का लग्न भी माना जाता है, कुंभ लग्न के जातक विचारक या दार्शनिक होते है, कुंभ लग्न के जातक बहुत साहसी होते है, कहा जाय तो कुंभ लग्न के जातक नये विचारधारा वाले और शांति फैलाने वाले होते है। यदि इनके जन्म-पत्रिका में शनि शुभ स्थान पर स्थिति हो तो इनका जीवन सुखी और शांतिपूर्ण होता है।

कुंभ लग्न के जातकों का व्यक्तित्व

कुंभ लग्न के जातक बुद्धिमान, न्यायी और शांतिपूर्ण होते है, इस लग्न के जातक कल्पना करने वाले महत्वांकाक्षी और भावुक भी होते है, कुंभ लग्न के जातकों को कई संघर्षो का सामना करना पड़ता है, लेकिन ये सभी परिस्थितियों का मुकाबला करने मे सक्षम होते है, कुंभ लग्न के जातको की रुचि साहित्य और कला में अधिक होती है।
कुंभ लग्न के जातक के कुण्डली मे यदि शनि देव अपनी उच्च राशि या शुभ स्थानो मे हो तो जातक को वैभव, भौतिक और सुख साधनों की प्राप्ति होती है।
☸ कुंभ लग्न के जातकों को यात्रा करने का शौक होता है।
☸ कुंभ लग्न के जातक सभी कार्यों को मन लगाकर दिमागपूर्वक करते है।
☸ इस लग्न के जातक को गुस्सा कम आता है परन्तु अगर आ जाता है तो इनका गुस्सा जल्दी शांत नही होता है
☸ कुंभ लग्न के जातक पढ़ाई, लिखाई और नये विषय पर चर्चें के तरफ आकर्षित होते है।
☸ कुंभ लग्न के अधिकतर जातक धार्मिक होते है।

कुंभ लग्न के जातकों की शारीरिक विशेषता

☸ कुंभ लग्न के जातकों के चेहरे पर तेज होता है।
☸ ये मध्यम कद के होते है।
☸ कुंभ लग्न के अधिकतर जातक गेहुए रंग के होते है।
☸ कुंभ लग्न के जातकों का पैर मजबूत और सुडौल होता है तथा इनके कंधे चैड़े होते है।
☸ इस लग्न के जातकों का बाल मुलायम और सुलझे हुए होते है।
☸ कुंभ लग्न के जातकों की आँखे चमकदार होती है।

कुंभ लग्न के जातकों की मानसिक विशेषताएं

मानसिक दृष्टिकोण के अनुसार कुंभ लग्न के जातक बैचेन एवं सतर्क होते है। इस लग्न के जातक किसी कार्य या परिस्थिति को गम्भीरता से लेते है और उसको पूर्ण करने मे जल्दबाजी भी करते है, जिसके वजह से कभी-कभी इनको अच्छे अवसर से हाथ भी धोना पड़ता है, कुंभ लग्न के जातकों की यादाश्त बहुत तेज होती है और इस लग्न के जातक पुरानी सोच से बाहर निकलकर आधुनिकता के तरफ आकर्षित होते है।

कुंभ लग्न के जातकों का स्वास्थ्य

यदि कुंभ लग्न के जातक के कुण्डली मे शनि ग्रह की स्थिति ठीक न हो या फिर शनि ग्रह अस्त हो तो जातक को पैरो, घुटनों और हड्डियों से जुड़ी स्वास्थ्य का सामना करना पड़ता है, कुंभ लग्न के जातक मिर्गी और मस्तिष्क की पीड़ा से परेशान रहते है, कुंभ लग्न के जातकों को तंत्रिका तंत्र से जुड़ी विकारो का भी सामना करना पड़ता है परन्तु शनि-देव के कृपा से इनकी आयु अच्छी होती है।

कुंभ लग्न में प्रेम-सम्बन्ध

कुंभ लग्न के जातक प्रेम और सम्बन्धो के मामले में साथ निभाने वाले हाते है।
कुंभ लग्न के जातक सुदंरता के तरफ जल्दी आकर्षित होते है और ये अपने साथी में सुदंरता, प्रेम, ज्ञान और वफादारी ढुढ़ते है, कुंभ लग्न के जातक अपने रिश्ते को बहुत दिल से निभाते है परन्तु अपने साथी या रिश्तेदारो की कोई भी गलती आये तो ये पीछे हट जाते है, ये विश्वासपात्र साथी को ढुढ़ते है, शनि ग्रह के प्रभाव के कारण कुंभ लग्न के जातक अपने पिता से प्रेम करने वाले तथा परिवार के प्रत्येक सदस्यों का ध्यान रखने वाले होते है।

कुंभ लग्न के योगकारक, मारक एवं सम ग्रह 

शनिः- कुंभ लग्न के स्वामी शनि ग्रह होते है और ये अपने मित्र तथा शत्रु के अनुसार ग्रहो को भाव प्रदान करते है इस प्रकार लग्नेश होने के कारण ये कुंभ लग्न की कुण्डली में योगकारक ग्रह होते है।
यह इस लग्न में पहले तथा बारहवें भाव के स्वामी होते है।
शुक्रः- कुंभ लग्न मे शुक्र ग्रह भी योगकारक ग्रह होते है जो चतुर्थ तथा नवम् भाव के स्वामी बनते है तथा ये शनि के मित्र है।
बुधः- शनि अपनी मित्रता के कारण बुध को पंचम एवं अष्टम भाव का स्वामी बनाया, इस प्रकार कुंभ लग्न में बुध भी योगकारक ग्रह होते है।
यदि कुण्डली में योगकारक ग्रह पीड़ित, नीच, अस्त तथा तीसरे, छठे, आठवे और बारहवें भावों में स्थित हो तो ये शुभ फल देने के योग नही होता है और साथ ही बेकार फल देने के लिए मजबूर हो जाता है।
मारक ग्रहः- मारक ग्रह कुण्डली में बेकार फल प्रदान करते है, ये जिस भाव में बैठते है या फिर अपने भाव से जिस भाव पर दृष्टि डालते है उसे खराब फल ही प्रदान करते है एवं ये जिस भाव के स्वामी होते है, उसे भी ये अशुभ फल ही देते है।
बृहस्पतिः- कुंभ लग्न मे बृहस्पति अति मारक ग्रह होते है तथा इस कुण्डली में बृहस्पति दूसरे एवं ग्यारहवें भाव के स्वामी भी होते है।
चन्द्रमाः- कुंभ लग्न में चन्द्रमा छठें भाव के स्वामी होते है और अति मारक ग्रह भी होते है।
सूर्यः- सूर्य देव का शनि के साथ शत्रुता होता है एवं ये कुंभ लग्न मे सूर्य देव सप्तम भाव के स्वामी भी होने के साथ अति मारक ग्रह भी होते है।
सम ग्रहः- लग्नेश से शत्रुता होने के बावजूद भी मंगल को केन्द्र का एक अच्छा भाव मिला है इसलिए लग्नेश के शत्रु एवं केन्द्र के एक अच्छे भाव के स्वामी होने के कारण कुंभ लग्न में मंगल सम ग्रह होते है, इस लग्न मे मंगल तीसरे एवं दसवें भाव के स्वामी भी होते है।

कुंभ लग्न के जातकों के लिए शुभ रंगः-

काला, नीला, जामुनी कुंभ लग्न के जातकों के लिए शुभ रंग होता है।

शुभ अंकः

कुंभ लग्न के जातकों के लिए शुभ अं 07 और 08 होता है।

शुभ रत्नः-

कुंभ लग्न वालों के लिए नीली, नीलम और हीरा शुभ रत्न होते है।

शुभ दिनः-

शुक्रवार

इष्ट देवः-

भगवान शिवजी।

 

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