कौन है बगलामुखी माता, Who is Baglamukhi Mata?

बगलामुखी माता, माँ दुर्गा का ही एक स्वरूप हैं। बगलामुखी माता अपने भक्तों की शत्रुओं, बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को देवी बगलामुखी का अवतरण हुआ था इसलिए इस दिन माता का अवतरण दिवस मनाया जाता है।  दस महाविद्याओं में से माता बगलामुखी आठवीं महा विद्या के रुप में जानी जाती हैं।

बगला सर्वसिद्धिदाम के अनुसार, यह निश्चित है कि संयम और नियमपूर्वक बगलामुखी का पाठ, पूजन और मंत्रानुष्ठान करने वाले उपासकों को सर्वांगीण सफलता अवश्य मिलती है। शत्रु विनाश, मारण, मोहन, उच्चाटन और वशीकरण के लिए बगलामुखी से बढ़कर कोई देवी नहीं है। मुकदमे में विजय प्राप्ति के लिए तो यह रामबाण है। बगला पटल, बगला स्त्रोत, बगला कवच, बगला हृदय, बगला सतनाम, और बगला ब्रह्मास्त्र विषयों के मंत्रानुष्ठान से शीघ्रता से फल की प्राप्ति होती है।

 

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बगलामुखी माता का अर्थ

बगलामुखी शब्द दो शब्दों के मेल से बना है। बगला व मुखी इसमें बगला शब्द संस्कृत के वल्गा का अपभ्रंष है जिसका अर्थ होता है लगाम लगाना। मुखी का अर्थ मुंह या चेहरा है इस प्रकार बगलामुखी का अर्थ लगाम लगाना है। माता रानी के उस रुप को शत्रुओं या दुष्टों पर लगाम लगाने के लिए पूजा जाता है।

बगलामुखी माता का स्वरुप

माता रानी का रूप विकराल होने के साथ-साथ अपने भक्तों की रक्षा करने वाला होता है। अपने इस रूप में माता रानी स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं, जिस पर राक्षस का मृत शरीर पड़ा हुआ है और उसी के ऊपर माता रानी बैठी हुई हैं। माता के सिर पर मुकुट है और उनके केश खुले हुए हैं। उनके तीन नेत्र और दो हाथ हैं। शरीर का रंग सुनहरा है जबकि उन्होंने पीले रंग के वस्त्र और आभूषण धारण किए हुए हैं। उन्होंने अपने एक हाथ में शत्रु को दण्ड देने के लिए बेलन के समान अस्त्र पकड़ा हुआ है और दूसरे हाथ में राक्षस की जीभ पकड़ी हुई है।

बगलामुखी माता का रहस्य

संपूर्ण संसार में भयंकर तूफान ने बहुत तबाही मचाई थी। तब सभी देवताओं ने माता रानी से सहायता की विनती की। यह देखकर माता रानी का एक स्वरूप हरिद्र सरोवर में प्रकट हुआ और इस तूफान को शांत किया। उसके बाद से ही माता रानी का बगलामुखी रूप प्रचलन में आया।

बगलामुखी माता का मंत्र

ओम हृंली बंगलामुखी देव्यै हृंली ओम नमः

शत्रु विनाशक मंत्रः- ओम बंगलामुखी देव्यै हृंलीं हीं क्ली शत्रु नाशं कुरु

बगलामुखी माता ध्यान मंत्र

ओम हृीं बंगलामुखी सर्व दुष्टाना वांच
मुखं पद स्तम्भय जिहवा कीलयं बुद्धि विनाशाय हृी ओम स्वाहा।

स्तम्भय, विद्वेषण, मारण, रोगशान्ति, संतानप्राप्ति, शत्रु पर विजय इत्यादि प्रयोग का विधि अलग-अलग है।

जप का विधानः- इस मंत्र को एक लाख या दस हजार जप 11, 9, 7 दिनों में करें।

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बगलामुखी माता की कहानी

एक बार, माता सती के पिता राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। राजा दक्ष भगवान शिव से द्वेष रखते थे और अपनी पुत्री सती के द्वारा शिव से विवाह किए जाने के कारण क्षुब्ध थे, इसलिए उन्होंने उन दोनों को यज्ञ में नहीं बुलाया। भगवान शिव इस बारे में जानते थे, लेकिन माता सती अनभिज्ञ थीं। यज्ञ से पहले, जब माता सती ने आकाश मार्ग से सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों को जाते देखा, तो उन्होंने अपने पति से इसका कारण पूछा। भगवान शिव ने माता सती को सत्य बता दिया और यह भी कहा कि उन्हें निमंत्रण नहीं मिला है। तब माता सती ने कहा कि एक पुत्री को अपने पिता के यज्ञ में जाने के लिए निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती। वे अकेले ही यज्ञ में जाना चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने भगवान शिव से अनुमति मांगी, किन्तु शिव ने मना कर दिया। माता सती के बार-बार आग्रह करने पर भी जब शिव नहीं माने, तो माता सती को क्रोध आ गया और उन्होंने अपनी महत्ता दिखाने का निर्णय लिया। माता सती ने भगवान शिव को अपने दस रूपों के दर्शन दिए, जिसमें आठवीं रूप मां बगलामुखी का था। माता रानी के ये दस रूप महाविद्या कहलाते हैं। अन्य नौ रूप हैं: काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, मातंगी, और कमला।

बगलामुखी  माता पूजन लाभ

देवी की आराधना करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं, विशेष रूप से शत्रुओं के नाश में सहायता मिलती है। माँ बगलामुखी को स्तम्भन देवी भी कहा जाता है क्योंकि यह शत्रुओं और दुष्टों को अपंग बनाने में सहायक होती हैं। इसलिए, अपने शत्रुओं से मुक्ति पाने, विपत्तियों को समाप्त करने और अपने मार्ग को प्रशस्त करने के उद्देश्य से भक्त माँ बगलामुखी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें प्रसन्न करते हैं। माँ बगलामुखी महाविद्या की पूजा मुख्य रूप से उप-नवरात्रों में की जाती है। गुप्त नवरात्रों में माता रानी की दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है, जिसमें आठवें दिन महाविद्या बगलामुखी की पूजा का विधान है।

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बगलामुखी  माता पूजा विधि

☸ स्थान चयन और शुद्धिकरण*:
☸ पूजा स्थल को साफ करें और पवित्र जल (गंगाजल) का छिड़काव करें।
☸  पूर्व दिशा की ओर मुख करके पीले वस्त्र पर पीला आसन बिछाकर बैठें।

माँ बगलामुखी की पूजा विशेष ध्यान और विधि-विधान से की जाती है। यहाँ माँ बगलामुखी की पूजा की सरल विधि प्रस्तुत की जा रही है

पूजा सामग्री

पीला वस्त्र
पीला आसन
हल्दी की माला
पीले फूल (विशेषकर गेंदे के फूल)
 हल्दी का पाउडर
अक्षत (चावल)
सुपारी
पान के पत्ते
कुमकुम
दीपक और घी
 धूप या अगरबत्ती
प्रसाद (पीले रंग के मीठे जैसे बूंदी या बेसन के लड्डू)

आवाहन और ध्यान

 दीपक जलाएं और धूप/अगरबत्ती जलाएं।

माँ बगलामुखी का आवाहन करें और उनका ध्यान करें:

संकल्प:- दाएं हाथ में जल लेकर संकल्प करें और माँ बगलामुखी की कृपा प्राप्ति के लिए पूजा का उद्देश्य बताएं।

पूजा का आरंभ

माँ बगलामुखी की प्रतिमा या चित्र को पीले वस्त्र पर स्थापित करें।
हल्दी का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें।
पीले फूल अर्पित करें और हल्दी का छिड़काव करें।

माला और मंत्र जाप:- हल्दी की माला से निम्न मंत्र का जाप करें

मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

आरती और प्रसाद

माँ बगलामुखी की आरती करें और पीले मीठे का प्रसाद अर्पित करें।

परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।

विशेष अनुष्ठान

अधिक फलदायी परिणामों के लिए किसी विद्वान ब्राह्मण से विशेष हवन या अनुष्ठान करवा सकते हैं।

महत्वपूर्ण बातें

माँ बगलामुखी की पूजा करते समय शुद्धता और एकाग्रता का विशेष ध्यान रखें।

व्रत और संयमित आचरण का पालन करें।

मंत्र जाप के दौरान अपनी इच्छाओं और समस्याओं का ध्यान कर सकते हैं।

इस विधि से माँ बगलामुखी की पूजा करने से भक्तों को शत्रुओं से मुक्ति, विपत्तियों से रक्षा और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।