छठ पूजा 2023:- उगते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य शुभ मुहूर्त

हिन्दू धर्म में देखा जाए तो अनेक छोटे-बड़े त्योहार पड़ते ही रहते हैं ऐसे में कुछ पर्व ऐसे होते हैं जिनका लोग बहुत ही बेसब्री से इंतजार करते हैं उन्हीं में से एक है छठ पूजा का पर्व, छठ पर्व एक ऐसा पर्व है जो मुख्य रूप से बिहार का एक त्योहार है परन्तु उत्तर प्रदेश के साथ-साथ ऐसे कई हिस्सों में छठ का पर्व भी बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। छठ पूजा का यह विशेष पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। छठ पूजा का पर्व एक ऐसा पर्व है जिसे हिन्दू धर्म में एक महापर्व का दर्जा दिया गया है मान्यता के अनुसार इस पर्व को विधिपूर्वक सच्ची श्रद्धा से करने से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। छठ पूजा की सबसे ज्यादा धूम और उत्साह बिहार, झारखण्ड और बंगाल के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी दिखाई देती है। इस पर्व के दौरान मुख्य रूप से डूबते हुए और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

छठ पूजा का महत्व

हिन्दू धर्म के सबसे महान पर्व यानि छठ पर्व किये जाने के महत्वों के बारे में बात करें तो छठ पूजा के दौरान छठी मैया की पूजा-आराधना की जाती है साथ ही सूर्यदेव को अर्घ्य भी दिया जाता है। 4 दिन तक मनाया जाने वाला यह महापर्व विशेष रूप से संतान की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

छठ पूजा का यह पर्व सबसे ज्यादा कठिन व्रतों में से एक होता है जिसमें सभी स्त्रियाँ श्रद्धा से निर्जला उपवास रखती हैं। मान्यता के अनुसार छठ पूजा का व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, जीवन में सफलता प्राप्ति तथा सुख समृद्धि की प्राप्ति करने के लिए भी छठ पर्व का व्रत रखने का सबसे ज्यादा महत्व होता है।

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छठ पर्व की पौराणिक कथा

छठ पूजा मनाये जाने की पौराणिक कथा के अनुसार प्रियव्रत नाम का एक राजा था और उसकी पत्नी का नाम मालिनी था। उनकी एक भी संतान नही थी। इस बात से वह दोनों ही बहुत दुखी रहते थे। उन दोनों ने एक बार संतान प्राप्ति की इच्छा के लिए महर्षि कश्यप के द्वारा एक पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। इस यज्ञ को विधिपूर्वक सम्पन्न कर लेने के बाद रानी गर्भवती हो गई। नौ माह के बाद जब रानी को संतान सुख की प्राप्ति हुई तो उस समय रानी को मरा हुआ पुत्र प्राप्त हुआ। यह बात जब राजा को पता चली तो उसे बहुत दुःख हुआ। संतान के शोक में राजा ने आत्महत्या करने का मन बना लिया। जैसे ही राजा ने आत्महत्या करने की कोशिश की उसके सामने एक सुंदर देवी प्रकट हो गई।

उस देवी ने राजा से कहा की मैं देवी षष्ठी हूँ मैं अपने सभी भक्तों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूँ और जो भक्त मेरी सच्चे मन से पूजा करते हैं उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हूँ। यदि तुम भी मेरी श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करोगे तो मैं तुम्हें भी पुत्र रत्न प्रदान करूँगी।माँ की बात से प्रभावित होकर राजा ने उनकी आज्ञा का पालन किया।

राजा और उसकी पत्नी मालिनी ने कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि के दिन देवी षष्ठी की पूरे विधि विधान से पूजा-अर्चना की। इस की गई श्रद्धापूर्वक पूजा के फलस्वरूप उन्हें एक सुंदर से पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उसी के बाद छठ पूजा का पावन पर्व मनाया जाने लगा।

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4 दिवसीय छठ का पर्व मनाये जाने की परम्परा

4 दिवसीय पर्व मनाये जाने की परम्परा के अनुसार सबसे पहला दिन नहाय खाय से शुरू होता है।

नहाय खाय

छठ पूजा पर्व के प्रथम दिन की शुरुआत नहाय खाय से होता है। 17 नवंबर 2023 को नहाय खाय का त्योहार शुक्रवार के दिन मनाया जायेगा इस दिन सभी व्रत करने वाली महिलाएँ स्नानादि करके पवित्र हो जाने के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करती हैं उसके बाद विधिपूर्वक पूजा कर लेने के बाद सभी महिलाएँ सात्विक भोजन करती हैं। इस दिन के भोजन में महिलाएँ लौकी की सब्जी अवश्य रूप से खाती है।

खरना

छठ पूजा के दूसरे दिन खरना मनाया जाता है। खरना इस वर्ष 18 नवम्बर 2023 को शनिवार के दिन मनाया जायेगा। खरना वाले दिन सभी महिलाएँ नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करती हैं और फिर पूरे दिन उपवास रखती हैं। रात में छठ मैया की पूजा करके खीर पूरी का प्रसाद चढ़ाया जाता है और सभी को प्रसाद वितरित करने के बाद 36 घण्टे तक फिर से निर्जला उपवास करते हैं। खरना के दिन ही रात्रि को छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है।

डूबते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य

छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परम्परा होती है। इस वर्ष डूबते हुए सूर्यदेव को 19 नवंबर 2023 को अर्घ्य दिया जायेगा। डूबते हुए सूर्यदेव को सूर्यास्त के समय अर्घ्य दिया जाता है।

उगते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य

छठ पूजा पर्व के आखिरी दिन यानि चौथे दिन उगते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परम्परा होती है। इस वर्ष 20 नवम्बर 2023 को उगते हुए सूर्यदेव को शुभ मुहूर्त में अर्घ्य दिया जायेगा।

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छठ पूजा शुभ मुहूर्त

छठ पूजा का पर्व 19 नवंबर 2023 को रविवार के दिन मनाया जायेगा ।
षष्ठी तिथि प्रारम्भः-18 नवम्बर 2023 प्रातः 09ः18 मिनट से,
षष्ठी तिथि समाप्तः- 19 नवंबर 2023 प्रातः 07ः23 मिनट तक।
छठ पूजा के दिन सूर्योदय का समयः- प्रातः 06ः43 मिनट से
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का समयः- शाम 05ः25 मिनट तक ।