ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुण्डली में अल्प आयु योग

ज्योतिष मनुष्य के जीवन के हर पहलू की जानकारी देता है। जातक की आयु भी निर्धारित करता है किन्तु जीवनमरण ईश्वर की ही इच्छानुसार होता है। कई बार कुण्डली में अल्पायु होते हैं परन्तु हाथों में नही होती हैं और कई बार हाथों में होते हैं और कुण्डली में नही। इसलिए जातक को इसको ज्यादा गंभीरता से नही लेना चाहिए। कई बार कुण्डली में ऐसे अशुभ योगों का निर्माण होता है जिससे जातक की मृत्यु की घटनाओं की संभावना बनती है उन्हीं अशुभ योगों में से एक अशुभ योग है अल्पायु योग आइए जानते है प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य के.एम. सिन्हा जी से कुण्डली में बनने वाले अल्पायु योग की सम्पूर्ण जानकारी

क्या होता है अल्प आयु योग

जब जातक के कुण्डली में चन्द्रमा पाप ग्रहों के साथ मिलकर बाधाएं और संकट उत्पन्न करता है तो वह अल्पायु योग ही होता है। अल्प आयु योग में चन्द्रमा अन्य ग्रहों के साथ तीर्थ स्थान पर बैठकर स्वयं शक्तिहीन हो जाता है परन्तु इसका प्रभाव इतना प्रभावशाली होता है कि जीवन को सुरक्षित रखना आसान नही होता है।

कुण्डली में कब होता है अल्प आयु योग

जब बुरे योग के प्रभाव से जीवन में कठिनाईयां बढ़ जाती हैं। आप चाहकर भी कोई कार्य नही कर पाते हैं। सब कुछ विपरीत और नकारात्मक होने लगता है तो इस स्थिति में अल्पायु योग चार्ट में बना हुआ होता है। जिसका प्रभाव सीधेा आपके जीवन पर पड़ता है। इस योग से बचने के लिए आपको क्या उपाय करना चाहिए और आप इससे कैसे मुक्ति पा सकते हैं इन सभी के बारे में हम आगे के लेख में आपको बतायेंगे।

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जन्म कुण्डली द्वारा आयु का अनुभाग

ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि किसी भी जातक के जन्म कुण्डली द्वारा उसके आयु के बारे में अनुमान ज्ञात किया जा सकता है। कुछ लोगों की मृत्यु बहुत कम आयु में हो जाती है इसका कारण ‘अल्पायु’ होता है। 35 तर्ज से पूर्व का मृत्यु ‘अल्पायु’ श्रेणी में आता है।

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अल्प आयु योग

☸ जब जन्म कुण्डली में चन्द्र ग्रह पाप ग्रहों से युक्त होकर त्रिक स्थान हो और वो शक्तिहीन हो तो इस स्थिति में अल्पायु योग का निर्माण होता है।
☸ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जातक के कुण्डली पर उसके अलावा उसके सगे-सम्बन्धियों के कुण्डली का असर भी पड़ता है। उदाहरण के लिए यदि किसी जातक के कुण्डली कोई वर्ष विशेष मारक हो परन्तु उसके पुत्र की कुण्डली में पिता का योग बलवान है तो उपाय करने पर यह मारक योग केवल स्वास्थ्य सम्बन्धित कष्टकारी हो सकता है इसलिए इन सब बातों का ध्यान रखते हुए विद्यवानो ने आयु निर्धारण के लिए कुछ सामान्य नियमों के द्वारा अल्प आयु योगों का संकेत दिया गया है।
☸ आयु निर्धारण के लिए लग्न का स्वामी मुख्य ग्रह का अत्यधिक महत्व होता है। यदि जन्म कुण्डली में लग्न का स्वामी छठें, आठवें या बारहवें में स्थित है तो वह जातक को अवश्य स्वास्थ्य सम्बन्धित परेशानी देगा और उससे उसका जीवन व्यथित होगा। यदि इसका पता समय से पहले चल जाये तो उपाय किया जा सकता है।
☸ यदि जन्म कुण्डली में बृहस्पति षष्ठम अथवा अष्टम भाव में स्थित हो तथा वो पीड़ित भी हो तो यह भी अल्पायु योगका निर्माण करता है। लाल किताब में उल्लेख मिलता है कि आयु का निर्धारण बुहस्पति (गुरु) द्वारा होता है।
☸ यदि किसी जातक के जन्म कुण्डली में सभी पाप ग्रह शनि, राहु, सूर्य, मंगल, केतु और चन्द्रमा अमावस्या का तीसरे, छठें और बारहवें में स्थित हो तो जातक को अल्पायु योग बनता है। यदि लग्न में लग्नेश सूर्य के साथ स्थित हो और उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हों तो दीर्घ आयु योग कमजोर हो जाता है।
☸ यदि जन्म कुण्डली में अष्टमेश आठवें स्थान का स्वामी छठें या बारहवें भाव में हो और पाप ग्रहों के साथ भी हो तो अल्पायु योग का निर्माण होता है।
☸ यदि जब कुण्डली में लग्नेश सूर्य निर्बल होता है और उस केन्द्र में सभी पाप ग्रह उपस्थित होती हैं तो भी आयु कम हो सकती है।
☸ जन्म कुण्डली में धन का भाव द्वितीय घर तथा व्यव का भाव द्वादश घर होता है। यदि इन दोनों भावों में पाप ग्रह हो और मुख्य ग्रह कमजोर हो तो भी यह अल्पायु योग माना जाता है।
☸ यदि जन्म कुण्डली के लग्न में शुक्र और बृहस्पति हो और पापी मंगल पांचवें भाव में स्थित हो तो जातक का आयु योग कम होता है।
☸ यदि जन्म कुण्डली में लग्न का स्वामी होकर चन्द्रमा अस्त हो, ग्रहण में हो या फिर नीच का हो तो आयु कम होने का योग बनता है।

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कैसे की जाती है कुण्डली में आयु की गणना

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुण्डली में आयु का निर्धारण अष्टम भाव से किया जाता है। इसके अतिरिक्त तृतीय और दशम स्थान भी आयु का स्थान माना जाता है। इसलिए किसी भी ज्योतिषी की आयु निर्धारण करने के लिए तीसरे, आठवें और दसवें स्थान का विचार करना चाहिएा। ज्योतिष शास्त्र में आयु के कारक ग्रह शनि को माना गया है।

अल्पायु योग से बचनें का उपाय

☸ जिस जातक के कुण्डली में अल्पायु योग होता है उनके जीवन पर खतरा मंडराता रहता है, इस स्थिति में उनको अपने खान-पान और व्यवहार पर ध्यान रखना चाहिए।
☸ अल्पायु योग से बचने के लिए जातक को प्रतिदिन हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय का पाठ करना चाहिए और उन्हें सभी प्रकार के बुरे कर्मों से दूरी बनाकर रखना चाहिए।
☸ यदि अल्पायु से बचना है तो गुरुवार और एकादशी का व्रत रखना चाहिए।
☸ जन्म कुण्डली के मुख्य ग्रहों को मजबूत करने के लिए उपाय करना चाहिए और अपने इष्टदेव का जाप, ध्यान तथा दान करते रहना चाहिए।