ज्योतिष से जाने क्या मेरा जीवनसाथी पहले से ही तय है

ज्योतिष वह ज्ञान है जो आपके अंधकार जीवन को प्रकाशमय बना सकता है जरूरत है तो इस पर विश्वास करने की एवं इसको पूर्ण रूप से समझने की। इस ज्ञान के द्वारा आपके विवाह, संबंध, जीवनसाथी, नौकरी, व्यवसाय, आर्थिक स्थिति इत्यादि का पता लगाया जा सकता है। आपके कुण्डली में विराजमान ग्रह स्थिति आपके पाटर्नर की ओर इशारा करते हैं यहीं नहीं आपके पार्टनर के स्वभाव, आकृति, सुन्दरा का भी अनुमान लगाया जा सकता है तथा किस दिशा में आपका पार्टनर मिल सकता है वह भी ज्ञात कर सकते हैं अतः यहाँ यह कहना गलत नही होगा कि जीवनसाथी पहले से ही तय हैं परन्तु इसकी पूर्ण जानकारी हम अपने इस लेख द्वारा समझते हैं-

जीवनसाथी की भविष्यवाणी ग्रह के द्वारा

आपकी कुण्डली में विद्यमान ग्रहों की स्थिति द्वारा आपके जीवनसाथी के विभिन्न पहलुओं के बारे में जाना जा सकता है। आपके सम्पूर्ण रिश्ते के लिए कुण्डली का सटीक एवं पूर्ण विश्लेषण करना अधिक महत्वपूर्ण है।

शुक्र ग्रह

शुक्र ग्रह विवाह का कारक ग्रह होता है तथा यह प्रेम एवं रिश्तों से जुड़ा होता हैं। कुण्डली में इस ग्रह का स्थान किसी व्यक्ति के प्रेम के दृष्टिकोण और किस प्रकार के साथी के प्रति वह आकर्षित हो सकता है इसको ज्ञात किया जा सकता है।

चन्द्रमा ग्रह

चन्द्रमा ग्रह आपके मन और भावना के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। कुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति आपके रिश्ते के भावनात्मक पहलू को प्रदर्शित करती है।

मंगल ग्रह

मंगल ग्रह साहस एवं पुरूषार्थ का कारक माना जाता है। यह आपके उत्साह, इच्छा एवं यौन ऊर्जा को बताता है अतः कुण्डली में इस ग्रह की उपस्थिति उत्साह और प्रेम संबंधों के अनुकूलता के बारे में बताती है।

भावों द्वारा जीवनसाथी की भविष्यवाणी कैसे करें

किसी भी जातक की कुंडली में 12 भाव होतें है और सभी भावों की अपनी भावों की अपनी एक विशेषता है किसी भी भाव को एक दूसरे के समतुल्य समझना मूखर्ता होगा परन्तु कुछ विशेष भाव द्वारा जीवनसाथी की भविष्यवाणी की जा सकती है।

सप्तम भाव

कुण्डली का सप्तम भाव वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी, दैनिक कार्यों और साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है। अतः इसी भाव के माध्यम से जीवनसाथी की गणना की जा सकती हैं। सप्तम भाव द्वारा साथी को समझा जा सकता है। सप्तम भाव में मंगल एक ऊर्जावान, तेज, साहसी एवं मुखर साथी का संकेत दे सकता है। इसी प्रकार सप्तम भाव में अन्य ग्रहों की दृष्टि एवं उपस्थिति द्वारा कई पहलूओं को जान सकते हैं।

पंचम भाव

कुण्डली का पंचम भाव प्रेम, शिक्षा, संबंध, रोमांस, बुद्धि, विवेक संतान एवं रचानात्मक कार्यों को दर्शाता है । अतः आपके प्रेम का मालिक पंचम भाव होता है। पंचम भाव से जुड़ी ऊर्जा को समझकर, जातक अपने डेटिंग जीवन और उन गुणों के बारे में जान सकता है जो उन्हें जीवनसाथी के बारे में बताती है।

क्या जीवनसाथी पहले से तय है

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अलग अलग ज्योतिषीय व्याख्याओं में जीवनसाथी के पहले से तय होने या न होने की विचारधारा अलग-अलग हो सकती है। कुछ योग्य ज्योतिषीय के अनुसार ग्रह की स्थिति के द्वारा जीवनसाथी पहले से तय होता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जातक की जन्मकुण्डली मे ग्रह की स्थिति और आन्तरिक क्रियाएं उनके जीवनसाथी की ओर इशारा करती हैं।

ग्रहों की विशेष स्थिति रिश्तों में अनुकूलता या चुनौतियों की ओर इशारा करती है। जबकि दो व्यक्तियों के जन्म चार्ट की तुलना उनकी अनुकूलता और जीवनसाथी के रूप में क्षमता के बारे में जानकारी दे सकती हैं कि जीवनसाथी पहले से निर्धारित है अथवा नहीं।

कुण्डली के सप्तम भाव से जाने अपने पार्टनर का स्वभाव

आपके पार्टनर के स्वभाव को ज्ञात करने के लिए सप्तम भाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सप्तम भाव की राशि, ग्रह, तथा इस भाव पर ग्रहों की दृष्टि की जीवनसाथी के स्वभाव को बताती है।

यदि सप्तम भाव में मेष, सिंह या धनु राशि होती है, तो जातक स्वभाव से क्रोधी एवं साहसी होता है तथा धार्मिक कार्यों से भी रुचि रहती है। यदि सप्तम भाव में कर्क, वृश्चिक, मीन राशि होती है, तो जातक का जीवनसाथी भावुक एवं कोमल स्वभाव को होता है साथ ही ऊर्जावान एवं साहसी भी होता है।

यदि आपकी कुण्डली के सप्तम भाव में प्रथम, कन्या, या मकर राशि होती हैं, तो जातक का पार्टनर स्वभाव से कार्यकुशल तथा अंतर्मुखी होगा।

अगर सप्तम भाव में मिथुन, तुला या तुला राशि हो तो जातक का जीवनसाथी सामाजिक कार्यों में रूचि रखने वाला, वाचक एवं सकुशल व्यवहारिक होगा।

सप्तम भाव में ग्रहों का परिणाम

☸ सप्तम भाव में यदि सूर्य ग्रह विराजमान हो, तो जातक का पार्टनर स्वभाव से अहंकारी, आत्मविश्वासी, अधिक धनी होता है।

☸ यदि सप्तम भाव में मंगल ग्रह होता है तो जातक का जीवनसाथी महत्वकांक्षी, अधिक क्रोध करने वाला खर्चीला और खाने पीने का शौकीन हो सकता है।

☸ यदि किसी जातक की कुण्डली में सप्तम भाव में गुरू विराजमान हो तो आपका पार्टनर धार्मिक, समझदार, सुशिक्षित होगा।

☸ यदि किसी जातक की कुण्डली में शुक्र ग्रह है, तो उनका जीवनसाथी अच्छे अभिरुचि वाला, सुंदर और कलाप्रिय होगा।

☸ यदि किसी जातक की कुण्डली के इस सप्तम भाव में शनि ग्रह है, तो उनका जीवनसाथी गंम्भीर, अंतमुखी रुढ़िवादी और निराशावादी होगा।

☸ यदि आपकी कुण्डली के सप्तम भाव में चन्द्र ग्रह है, तो आपका जीवनसाथी मददगार और शांत स्वभाव का होगा।

☸ यदि किसी जातक की कुण्डली के सप्तम भाव में राहु या केतु ग्रह है, तो आपका पार्टनर समझदार, कुटनीतिज्ञ रिश्तों में स्वार्थ भावना रखने वाला हो सकता है।