दशमांश से जाने अपना भविष्य

वैदिक ज्योतिष में दशमांश कुण्डली को D10 कुण्डली कहा जाता है। दशमाश कुण्डली का उपयोग मुख्य रूप से व्यवसाय में उन्नति, प्रतिष्ठा, आय के साधन, व्यवसाय की प्रकृति का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस कुंडली में दशम भाव और दशमेश की अहम भूमिका होती है। दशमांश कुण्डली के द्वारा माता-पिता के सुख का विचार भी किया जा सकता है। साथ ही आयु का पता भी लगाया जाता है।

पहला दशमांश या इंद्र दशमांश   | First Dashmansh | 

कुण्डली का पहला दशमांश 0 डिग्री से 3 डिग्री तक का होता है जिसे इंद्रदशमांश कहते हैं। यह धन-सम्पत्ति एवं समाज में मान-सम्मान का सूचक होता है। जैसे इंद्र देव देवों में पहला स्थान प्राप्त करते हैं तथा सभी सुख-सुविधाओं से सम्पन्न होते है ठीक उसी प्रकार जब दशम भाव या दशमेश का संबंध इंद्र दशमांश से हो तो जातक इन्द्र देव के समान समाज में मान पद-प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।

दूसरा दशमांश या अग्नि दशमांश  | Second Dashmansh| 

दूसरा दशमांश 3 डिग्री से 6 डिग्री तक होता है जिसे अग्नि दशमांश कहते हैं। यह दशमांश पराक्रम और साहस का प्रतीक होता है। यदि दशम भाव या दशमेश अग्नि दशमांश में विराजमान हो तो जातक अग्नि तत्व गुणों से सम्पन्न होता है अर्थात ऐसा जातक अपने बुद्धि-विवेक साहस और परिश्रम द्वारा धन अर्जन करने में सक्षम होता है तथा ऊर्जावान क्षेत्र में व्यासाय की प्राप्ति हो सकती है। इस परामारा के प्रभाव से जातक प्रभावशाली एवं प्रतिभाशाली होता है।

तीसरा दशमांश या यम दशमांश | Third Dashmansh  | 

यम दशमांश को तीसरा दशमांश कहते हैं यह 6 डिग्री से 9 डिग्री तक होता है तथा इस दशमांश के कारण जातक कार्य कुशल होता है उसकी गति भी अच्छी होती है। यदि दशम भाव अथवा दशमेश इस यम दशमांश में आते हैं तो जातक अपने कार्य को बहुत ही कुशलपूर्वक पूर्ण करता है तथा उसमे नेतृत्व करने की क्षमता भी अच्छी होती है। अपने इस गुण के कारण प्रसिद्ध होता है एवं लोगों को राय मशवरा भी देता है।

चौथा दशमांश या राक्षस दशमांश | Fourth Dashmansh| 

राक्षस दशमांश चौथा दशमांश कहलाता है जो 9 डिग्री से लेकर 12 डिग्री तक होता है।यह दशमांश अवैधानिक कार्यों को करने की इच्छा या नीति से हटकर काम करने की इच्छा जागृत करता है। यदि दशम भाव या दशमेश इस या राक्षस दशमांश से संबंध बनाते हो तो जातक सही गलत का विचार किये ही कार्यों को पूर्ण करता है। जिसके प्रभाव से जातक चोरी, तस्करी, रिस्वतखोर होता है। 

पांचवा दशमांश या वरुण दशमांश  | Fifth Dashmansh|  

वरुण दशमांश पांचवा दशमांश कहलाता है जो 12 डिग्री से 15 डिग्री तक होता है। वरुण दशमांश के प्रभाव से जातक जलक्षेत्र के कार्यों में निपूर्ण होता है। यदि पांचवें दशमांश का सबंध दशम भाव या दशमेश हो तो जातक जल व्यापार जैसे नौकायन या पानी का जहाज चलाने वाला होता है। जातक कोई भी कार्य जो जल से जुड़ा हो उसमें सफलता हासिल करता है।

छठा दशमांश या वायु दशमांश | Sixth Dashmansh |

वायु दशमांश छठा दशमांश कहलाता है जो 15 डिग्री से 18 डिग्री तक होता है। यदि वायु दशमांश का संबंध दशमेश अथवा दशम भाव से हो तो जातक वायु से संबंधित कार्यों में विशेष सफलता प्रदान करते हैं तथा इसी व्यवसाय द्वारा धन आर्जन करने में सक्षम होतें है। इस दशमांश के प्रभाव से जातक परिवहन सेवा, पायलट, एवं दूर संचार के माध्यम से धन अर्जन करता है।

सातवां दशमांश या कुबेर दशमांश | Seventh Dashamansh|  

 
कुबेर दशमांश सातवां दशमांश कहलाता है जो 18 डिग्री से 21 डिग्री का होता है। यदि कुबेर दशमांश का संबंध दसवे एवं दशमेश से हो तो जातक धनवान होता है और सभी सुविधाओं के साथ जीवन व्यतीत करता है। इसके अलावा कार्य-व्यवसाय में अपेक्षा से अधिक लाभ प्राप्त होता है। साथ ही धन के लेन -देने के कार्यों जैसे कैशियर, बैंक कर्मचारी, फाइनेंस सलाहकार से जुड़ा होता है।

आठवां दशमांश या ईशान दशमांश  | Eigth Dashmansh|  

आठवां  दशमांश 21 डिग्री से 24 डिग्री होता है इस दशमांश को ईशान दशमांश के नाम से जाना जाता है। ईशान दशमांश का संबंध यदि दशम भाव अथवा दशमेश से हो तो जातक स्वभाव से गम्भीर एवं उदार होता है। इस दशमांश के प्रभाव से जातक को समाज में मान, पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती हैं। ऐसे व्यक्ति अपने कार्य को व्यवस्थित तरीके से करते हैं जिससे लोग इनकी प्रशांसा भी करते हैं। ईशान दशमांश के संबंध से जातक राजा के समान जीवन व्यतीत करते हैं तथा समाज सुधारक अथवा प्रबंधन के कार्यों से अपना योगदान देते हैं।

नौवा दशमांश या पदमज दशमांश  | Ninth Dashmansh|

पदमज दशमांश नौवा दशमांश होता है जो 24 डिग्री से 27 डिग्री होता है। यदि दशम भाव या दशमेश का संबंध पदमज दशमांश से हो तो जातक रचनात्मक कार्यों में रुचि रखने वाला होता है तथा अनेक सुख सुविधाओं की प्राप्ति करता है। इसके साथ ही जातक अनेक प्रकार की सुख सुविधाओं को प्राप्त करता है। जातक समाज के कल्याण के लिए अनेक कार्य करता है तथा सामाजिक कार्यों में भी रुचि रहती है। जातक विद्वान होता है। 

दसवां दशमांश या  अनन्त दशमांश | Tenth Dashmansh|

अनन्त दशमांश दसवां दशमांश होता है जो 27 डिग्री से 30 डिग्री होता है। यदि अनन्त का दशमांश का संबंध दशम भाव अथवा दशमेश से हो तो कई योगों का निर्माण होता है। इस योग के प्रभाव से जातक के अन्दर अथाह परिश्रम एवं अनवरत प्रयास करने की शक्ति होती है। इस दशमांश के प्रभाव जातक अपने कार्यों मे सफलता प्रदान करता है तथा समाज मे मान पद प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।

दमाश कुण्डली के लग्न लग्नेश और दशम भाव, भावेश का केन्द्र त्रिकोण में बली होकर बैठे हो, लग्न लग्नेश, दशम भाव दशमेश पर जिस प्रकार के विषय से संबंधित कारक ग्रहों का शुभ प्रभाव पड़ता है। उसी प्रकार के कारक व्यवसाय एवं करियर के क्षेत्र में सफलता मिलने का योग बनाते हैं।