दीपक जलाते समय निम्न मंत्र का जप करना चाहिए

दीपक जलाते समय निम्न मंत्र का जप करना चाहिए।
मंत्र
शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम। शत्रु बृद्धि विनाशायं दीप ज्योति नमोस्तुते।।
अर्थात् शुभ और कल्याण करने वाली आरोग्य और धन संपदा देने वाली शत्रु बुद्वि का विनाश करने वाली दीपक की ज्योति को नमस्कार है।
घी का दीपकः- देवी देवताओं को घी का दीपक अपने बाएं हाथ की ओर तथा तेल का दीपक दाएं हाथ की ओर लगाना चाहिए।

खंडित दीपकः- पूजन में कभी भी खंड़ित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खड़ित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है। पूजन करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा करते समय बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। अगर दीपक बुझ जाता है तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है।

मंदिर में दीपक जलाने से मिलते है लाभः-
🔅यदि किसी घर में नियमित रूप से दीपक जलाया जाता है। तो वहां हमेशा सकारात्म्क ऊर्जा सक्रिय रहती है
🔅दीपक के धुएं से वातावरण में उपस्थित हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु भी नष्ट हो जाते है।
🔅आर्थिक लाभ के लिए रोजनाा देसी घी का दीपक जलाए।
🔅शुभ भय को दूर करने के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
🔅अखंण्ड सौभाग्य के लिए महुए के तेल का दीपक जलाएं।
🔅राहु-केतु के लिए अलसी के तेल का दीप जलाए।

पूजा में दीपक क्यों जलाया जाता है?
दीपक यानी अग्नि का वो छोटा रूवरूप जो देव शक्ति का प्रतीक माना जाता है। सदियों से पूजा आराधना में दीपक जलाएं जाते है। किसी भी पूजा आराधना में बिना दीपक के पूजा उपासना संपन्न नहीं होती है, हम अगर किसी तीर्थ स्थानों पर जाते है। तो दीपदान अवश्य करते है इसका शास्त्रीय विधान यह है कि दीपक को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। घर के मंदिर से लेकर तीर्थो तक जलाया गया दीपक पुण्य फल दिलाता है।

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दीपदान की तिथियांः-
🔅आइये हम जानते है। कि दीप-दान कब-कब करना चाहिए?
🔅सभी स्नान पर्व और व्रत के समय दीपदान करना चाहिए।
🔅नकर चतुर्दशी और यम द्वितीय के दिन भी दीप दान करना चाहिए।
🔅दीपावली अमावस्या और पूर्णिमा के दिन भी दिपदान करने का अधिक महत्व बताया जाता है। कार्तिक मास में किया गया दीपदान माँ लक्ष्मी की कृपा दिलाता है।

दीपदान की विधानः-
🔅आइये हम जानते है कि हमकों दीप दान कैेसे करना चाहिए?
🔅दीपदान के लिए मिट्टी, तांबा , चांदी पीतल या फिर सोने का दीपक ले
🔅तेल के दीपक में लाल धागे अथवा कलावा की बत्ती लगाएं।
🔅दीपक को हमेशा चावल, गेहूँ, सप्तधान्य का आसन दें।
🔅घी के दीपक में रूई की बत्ती का प्रयोग करें।