नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है ।

नवरात्रि के सभी नौ दिन बहुत महत्वपूर्ण है । प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के अलग स्वरूप की पूजा-आराधना की जाती है । नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है ।
माँ कालरात्रि की स्वरूप की बात करें तो कालरात्रि माता का शरीर अंधकार की तरह काला होता है इनके बाल लम्बे एवं बिखरे हुए होते है । गले में बिजली की तरह चमकती
माला और माँ के चार हाथ है तथा माता के हाथों में खड्ग, लौह शस्त्र, वरमुद्रा और  अभय मुद्रा होता है । इस दिन सभी तंत्र मंत्र के उपासक इनकी विशेष रूप से पूजा अर्चना
करते है । इनके नाम के उच्चारण मात्रा से ही भूत प्रेत राक्षस दानव और सभी राक्षसी शक्तियां भाग जाती है ।

नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा:-
आज के दिन माँ कालरात्रि की पूरी विधि-विधान से पूजा अर्चना करें । माता को फूल, सिंदूर, कुमकुम रोली इत्यादि अप्रित करें । साथ ही माता को नींबू से बना हुआ माला भी पहनाए उसके  बाद माता को गुड़ या इससे बने वस्तुओं का भोग लागएं । इसके बाद  घी का दीपक जलाकर मंत्र का जाप करें, उसके बाद दुर्गा चालीसा दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के बाद विधिपूर्वक मां की आरती करें ।

मां कालरात्रि की पूजा विधि:-
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन महा सप्तमी मनाई जाती है । इस दिन माता के सातवें स्वरूप  कालरात्रि की पूजा होती है । इस वर्ष 2022 में कालरात्रि माता के पूजन का शुभ मुहूर्त अश्विन  शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 2 अक्टूबर को पड़ रही है । महा सप्तमी 2 अक्टूबर को 6 बजकर  28 मिनट तक रहेगी उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारम्भ हो जायेगी ।

मां कालरात्रि शुभ मुहूर्त:-
‘ओम ऐ हीं क्ली चामुण्डायै विच्चै ओम कालरात्रि दैव्ये नमः

माँ कालरात्रि का मंत्रा
एकवेणी जपाकर्णपूरा जगना खरास्थिता ।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी ।।
वामपादोल्लसल्लोहलताकष्टकभूषणा ।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रि भर्यंकुरी ।।

माँ कालरात्रि की पूजा का महत्व:-
माँ कालरात्रि शत्रु और दुष्टों का संहार करती है । माँ कालरात्रि की पूजा से मानसिक तनाव खत्म होता है साथ ही बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है ।  कालरात्रि माता की पूजा से मनुष्य को सारे पापों से मुक्ति मिलती है ।  अपने शत्रुओं का सामना करने की भी शक्ति प्राप्त होती है । आपके जीवन में आने वाली परेशानियाँ दूर होती है । तथा अपने डर पर आप
विजय पा लेते है ।

कालरात्रि माता का कवच मंत्रा:-
ओम क्लीं में हदयं पातु पादौ श्रीकालरात्रि ।
ललाटे सतंत पातु तृष्टग्रह निवारिणी ।।
रसना पातु कौमारी, भैरवी चझुषोर्भय ।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशंकरभामिनी ।।

कालरात्रि माता का प्रिय भोग:-
माता कालरात्रि को गुड़ या उससे बनी मिठाईयां बहुत प्रिय है इसलिए माता रानी
को सदैव गुड़ का भोग लगाना चाहिए ।

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