प्रत्येक लग्न के दशम भाव में सूर्य का प्रभाव

मेष लग्नः- मेष लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य शनि की मकर राशि मे बैठा हो तो जातक को कार्यक्षेत्र मे अड़चनो का सामना करना पड़ेगा। सातवी दृष्टि से मित्र चन्द्र की कर्क राशि को देख रहा हो तो जातक को माता, भूमि, वाहन और मकान का सुख अवश्य मिलेगा।

वृषभ लग्नः- वृषभ लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य शत्रु शनि की कुंभ राशि मे हो तो जातक को अपने जीवन मे हमेशा अस्थिरता ही महसूस होगी और सातवीं दृष्टि से स्वराशि सिंह को देख रहा है तो जातक का अपना खुद का घर और गाड़ी होगी।

मिथुन लग्नः- मिथुन लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य मित्र गुरु की मीन राशि मे हो तो जातक को कार्यक्षेत्र मे विशेष सफलता मिलती है। सातवी दृष्टि से सामान्य मित्र बुध की कन्या राशि को देख रहा है तो जातक मेहनत से सबकुछ हासिल करेगा।
कर्क लग्नः– कर्क लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य उच्च का होकर दशम भाव मे हो तो जातक के लिए बेहद ही उत्तम रहेगा। जातक को कार्यक्षेत्र मे ऊँचा पद मिलेगा और समाज मे उनका नाम और इज्जत भी होगी किन्तु जमीन से जुड़ा विवाद उनके जीवन मे लगा रहेगा।

सिंह लग्नः- सिंह लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य शत्रु शुक्र की वृष राशि मे हो तो जातक की उन्नति के मार्ग मे कुछ ना कुछ कमी लगी रहेगी। सातवी मित्र दृष्टि से मंगल की वृश्चिक राशि को देख रहा है तो जातक को अपनी माता का अपार प्यार और सुख मिलेगा।

कन्या लग्नः- कन्या लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य सामान्य मित्र बुध की मिथुन राशि मे हो तो जातक किसी ऊँचे पद पर काम करेगा। सातवीं मित्र दृष्टि से गुरु की धनु राशि को देख रहा है तो जातक की माता का साथ उसे हमेशा मिलेगा।

तुला लग्नः- तुला लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य अपने मित्र चन्द्रमा की कर्क राशि मे हो तो जातक अपने कार्य और व्यवसाय मे बहुत ही अच्छा करेगा। सातवी शत्रु दृष्टि से शनि की मकर राशि को देख रहा है तो जातक की भूमि, मकान और वाहन के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।

वृश्चिक लग्नः- वृश्चिक लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य अपनी स्वराशि मे तो जातक को सरकारी नौकरी में सफलता मिलेगी और उसे ऊँचा नाम भी हासिल होगा। सातवीं शत्रु दृष्टि से शनि की कुंभ राशि को देख रहा है तो जातक को माता के सुख मे कमी आएगी।
धनु लग्नः-धनु लग्न की कुण्डली मे यदि सुर्य अपने सामान्य मित्र बुध की कन्या राशि मे हो तो जातक को सफलता प्राप्त होगी और करियर मे प्रगति मिलेगी। सातवी मित्र दृष्टि से गुरु की मीन राशि देख रहा है तो जातक को भूमि, वाहन व मकान का सुख मिलेगा।
मकर लग्नः- मकर लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य दशम भाव मे शत्रु शुक्र की तुला राशि मे नीच हो तो जातक को कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नही मिल पाती है। सातवी दृष्टि से अपनी उच्च राशि मेष को देख रहा है तो जातक को भूमि, वाहन और मकान का सुख मिलेगा।
कुंभ लग्नः- कुंभ लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य दशम भाव मे मित्र मंगल की वृश्चिक राशि मे हो तो जातक अपने कार्यक्षेत्र मे बहुत ही अच्छा करता है और नाम भी कमता है। सातवी दृष्टि से शत्रु शुक्र की वृष राशि को देख रहा है तो जातक को अपनी माता का सहयोग मिलेगा।
मीन लग्नः- मीन लग्न की कुण्डली मे यदि सूर्य दशम भाव मे मित्र गुरु की धनु राशि मे हो तो जातक अपने करियर मे जल्दी सफलता प्राप्त कर पाता है। सातवी दृष्टि से सामान्य मित्र बुध की मिथुन राशि को देख रहा है तो ऐसे जातक अपनी मेहनत के बल पर भूमि, मकान और वाहन प्राप्त करेगा।

 

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