बृहस्पतिदेव 04 सितम्बर को शाम 04:58 मिनट पर मेष राशि में वक्री होंगे

मेष लग्न

बृहस्पति देव आपके लग्न भाव में वक्री होंगे। आपको थोड़ी बहुत उलझन महसूस हो सकती है। अपने स्वास्थ्य पर पहले से ज्यादा ध्यान देंगे। पिता के साथ कुछ बातों पर अनबन हो सकती हैं। धन हानि या बेवजह का खर्च होने की संभावना है। धार्मिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे। आपकी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होगी।

उपाय: अपने से बड़ों का आशीर्वाद लें और उनको आदर करें।

वृष  लग्न

बृहस्पति देव आपके नौवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं। यह आपकी कुण्डली के बारहवें भाव में वक्री होंगे। लीवर विकार, मधुमेह तथा महिलाओं को कुछ समस्या उत्पन्न हो सकती है। स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। आपको अपने और पराए का एहसास हो सकता है। पारिवारिक जीवन मे हुई गलतियों को सुधारने का प्रयास करेंगे। घर बनाने और खरीदने के निर्णयों पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। विज्ञान और रिसर्च के क्षेत्र में पूर्ण सफलता मिलेगी। कुछ नया सीखने का प्रयास करेंगे।

उपाय: भगवान श्री विष्णु जी को पीले पुष्प अर्पित करें

मिथुन  लग्न

बृहस्पति देव आपकी कुण्डली के सातवें और दसवें भाव के स्वामी हैं। आपकी कुण्डली के ग्यारहवें भाव में वक्री होंगे। साझेदारी में किया गया व्यापार मुश्किलों भरा हो सकता है।कार्यक्षेत्र में किसी अन्य के कारण कुछ गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं। निवेश और मुनाफे को लेकर पार्टनर के साथ मतभेद हो सकता है। नौकरी कर रहे जातकों की पदोन्नति होगी। शिक्षा के कारण विवाह के निर्णयों में कुछ शंका हो सकती है। वैवाहिक जीवन में हुई गलतियों पर विशेष ध्यान देंगे। अपने जीवन में कोई अच्छा और उचित मार्ग तलाश करने में लगे रहेंगे।

उपाय: गुरुवार के दिन गौ माता की सेवा करें।

कर्क लग्न

कर्क लग्न वाले जातकों के लिए बृहस्पतिदेव नवम और षष्ठम भाव के स्वामी हैं। यह आपकी कुण्डली के दशम भाव में वक्री होंगे। आपके जीवन कुछ नया बदलाव आने की संभावना है। नौकरी में परिवर्तन के लिए शुभ समय है। कार्यक्षेत्र में आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पिता के साथ थोड़ी अनबन हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर कुछ समस्या हो सकती है। कानूनी मामले में फंसे लोगों की समस्या और बढ़ सकती है। स्वास्थ्य पर अत्यधिक ध्यान दें अन्यथा लीवर, मधुमेह, तथा हार्मोनल समस्या आपको ज्यादा परेशान कर सकती है।

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उपाय: भगवान शिव जी की प्रतिदिन आराधना करें तथा जल अर्पित करें।

सिंह लग्न

सिंह लग्न वाले जातकों की कुण्डली में बृहस्पतिदेव पंचम और अष्टम भाव के स्वामी हैं। यह आपकी कुण्डली में नवम भाव में वक्री होंगे। पिता के साथ आपके सम्बन्ध खराब हो सकते हैं। पिता की पुरानी बीमारी उभर सकती है। स्वास्थ्य का ध्यान दें। आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती है। प्रेम संबंधों में थोड़ी मुश्किलें आ सकती हैं। विवाह के लिए रिश्तों का प्रस्ताव आ सकता है। शिक्षा से जुड़े छात्रों को कुछ अलग निर्णय लेने का मौका मिलेगा। विज्ञान और अध्ययन से जुड़े लोग लाभ प्राप्त करेंगे। कुछ नया सीखने का अवसर प्राप्त हो सकता है।

उपाय: गरीब और जरूरतमंदों को शिक्षा की कुछ वस्तुएँ दान करें।

कन्या लग्न

बृहस्पतिदेव कन्या लग्न में चतुर्थ और सप्तम भाव के स्वामी हैं। आपकी कुण्डली में बृहस्पति देव अष्टम भाव में वक्री होंगे। यह समय आपके लिए शुभ नहीं है। वैवाहिक जीवन पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। विवाह के लिए निर्णय लेना इस समय उचित नहीं है। दोबारा सोच-विचार करना पड़ सकता है। माता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान दें। पारिवारिक जीवन में गलतियों पर विशेष ध्यान दें। मानसिक रूप से चिंतित और अपने आपको असुरक्षित महसूस करेंगे। विज्ञान  के क्षेत्र में आपकी रुचि बढ़ेगी। पार्टनर के साथ किए गए निवेश से मन में भय बना रहेगा। धीरे-धीरे लाभ मिलने की संभावना है। ससुराल पक्ष से कुछ जिम्मेदारियाँ बढ़ सकती हैं।

उपाय: अपने घर पर सत्यनारायण की पूजा अवश्य करवाएँ ।

तुला लग्न

बृहस्पति देव तुला लग्न के तृतीय और षष्ठम भाव के स्वामी है। आपकी कुण्डली में यह सप्तम भाव में वक्री हो रहे हैं। वैवाहिक जीवन में अत्यधिक मतभेद होने की संभावना है। किसी तरह का आरोप लगने से आपकी समस्याएँ और ज्यादा बढ़ सकती हैं। आत्मविश्वास में कमी आयेगी। विवाह के लिए निर्णय पर दोबारा विचार कर सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें छोटे भाई-बहनों के साथ रिश्ते बिगड़ सकते हैं। समझदारी से काम लें।

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उपाय: बृहस्पतिवार के दिन पंडित जी का आशीर्वाद प्राप्त करें।

वृश्चिक लग्न

वृश्चिक लग्न में बृहस्पतिदेव कुण्डली के द्वितीय और पंचम भाव के स्वामी हैं। आपकी कुण्डली में बृहस्पतिदेव षष्ठम भाव में वक्री होंगे। आपके जीवन में बहुत सारी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। परिवार में वाद-विवाद हो सकते हैं। प्रेम संबंधों में कुछ चुनौतियों आ सकती है। संतान के परवरिश में कुछ चुनौतियों आ सकती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे जातक सोच विचार कर निर्णय ले सकते हैं। किसी से वार्तालाप करते समय अपने शब्दों पर ध्यान दें। फिजूलखर्ची करने से बचें अन्यथा आप कर्ज में आ सकते हैं।

उपाय: बृहस्पति देव के मंत्रों का 108 बार जाप करें।

धनु लग्न

धनु लग्न में बृहस्पतिदेव कुण्डली के लग्न भाव और चतुर्थ भाव के स्वामी हैं। आपकी कुण्डली में पंचम भाव में वक्री हो रहे हैं। आपको अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वजन बढ़ने, लीवर फैट या मधुमेह होने के कारण थोड़े परेशान हो सकते हैं। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अपनी किसी गलती पर विशेष ध्यान दें। प्रेम जीवन में कुछ समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। आपका रिश्ता भी टूटने की संभावना है। शिक्षा से जुड़े जातक को महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अवसर प्राप्त हो सकता है।

उपाय : गुरुवार को पीले फलों का दान करें

 विष्णु नामक स्त्रोत का पाठ करें।

मकर लग्न

मकर लग्न में बृहस्पतिदेव तृतीय और बारहवें भाव के स्वामी हैं। आपकी कुण्डली में यह चतुर्थ भाव में वक्री होगें। घर के रिश्तेदारों के कुछ अनबन हो सकती है। माता के स्वास्थ्य का ध्यान दें तथा उनकी सेवा करें। पूर्व में की गई गलतियों को सुधारने का प्रयास करें। नया घर खरीदने या बेचने पर एक बार और विचार विमर्श अवश्य कर लें। आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण फैसले लेने पर विचार अवश्य करें।

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उपाय: गुरुवार को केले के वृक्ष में जल चढ़ाकर पूजा अर्चना करें।

कुंभ लग्न

कुंभ लग्न में बृहस्पति देव कुण्डली के द्वितीय और एकादश भाव के स्वामी है। आपकी कुण्डली में यह तृतीय भाव  में वक्री होंगे। आपकी आर्थिक स्थिति  नियंत्रित होगी। निवेश करने और बचत करने में थोड़ा सावधान रहें। नौकरी में पदोन्नति और वेतन में वृद्धि होगी। भौतिक सुखों से दूर होकर सही मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा कुछ गलत निकल सकता है। अपने जीवन में सच्चे साथी चुनने पर विचार कर सकते हैं।

उपायः बृहस्पतिवार को नियमित रूप से उपवास रखें।

मीन लग्न

मीन लग्न में बृहस्पतिदेव लग्न और दशम भाव के स्वामी हैं। आपकी कुण्डली में यह द्वितीय भाव में वक्री होंगे। आपका स्वास्थ्य थोड़ा खराब रह सकता है। लापरवाही के कारण लीवर, फैटी, मधुमेह और हार्मोंन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। नौकरी में परिवर्तन लाने के लिए समय अच्छा है। फिजूलखर्ची करने से बचें अन्यथा बचत किये गये पैसे भी खत्म हो जायेंगे। जिसके कारण कर्ज में डूब सकते हैं। परिवार को समझाने का प्रयास करें। सही मार्ग पर चलने का विचार मन में आ सकता है।

उपायः पीले रंग के वस्त्र जितना हो सके पहनें उचित रहेगा।