भक्तों के सभी पापों को दूर करें भगवान विष्णु जी का मत्स्य अवतार

मत्स्य जयंती की बात की जायें तो यह जयंती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह जयंती भगवान मत्स्य के रूप की पूजा के लिए श्रेष्ठ दिन है। मछली के रूप में भगवान विष्णु जी का यह पहला रूप है। इस दिन हिन्दू धर्म के सभी मंदिरों में भगवान श्री विष्णु जी की पूजा-अर्चना की जाती है। मत्स्य जयंती के दिन भगवान श्री विष्णु जी वेदों को बचाने के लिए एक सींग वाली मछली के रूप में प्रकट हुए थे।

कुछ धर्मग्रंथों के द्वारा यह भी कहा जाता है कि मत्स्य अवतार एक जल प्रलय या महाप्रलय के बारे में चेतावनी देता हुआ प्रतीत होता है, जो इस सृष्टि के ब्रह्माण्ड को पूरी तरह से नष्ट कर देता है और उसे पुर्नजन्म के लिए तैयार करने के लिए प्रेरित करता है।

Matsya Jayanti by Astrologer K.M. Sinha (मत्स्य जयंती)-

मत्स्य जयंती का महत्व

भक्तों के सभी पापों को दूर करें भगवान विष्णु जी का मत्स्य अवतार 1

भगवान श्री विष्णु जी के सबसे पहले अवतार कहे जाने वाले मत्स्य जयंती के दिन जो कोई भी पूजा-अर्चना करके इस दिन व्रत रखता है उसे विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। इस दिन की पूजा में मत्स्य पुराण की कथा पढ़ने तथा सुनने का भी अत्यधिक महत्व होता है, जो भक्त भगवान विष्णु के मत्स्य पुराण का पाठ पढ़ता और सुनता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं तथा उन पर भगवान श्री विष्णु जी की विशेष कृपा बनी रहती है। मत्स्य जयंती के दौरान विष्णु जी के सभी भक्त को मछलियों को आटा या अनाज की गोलियाँ खिलानी चाहिए। इस जयंती पर व्रत रखने से भक्तों के समस्त पाप सदैव के लिए दूर हो जाते हैं, इसके अलावा इस दिन पवित्र नदी में स्नान और पूजा करने से आपकी आयु में भी वृद्धि होती है।

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आइए जानें ज्योतिषाचार्य के.एम.सिन्हा द्वारा भगवान श्री विष्णु जी के मत्स्य अवतार की कथा

भगवान श्री विष्णु जी के मत्स्य अवतार की कथा के अनुसार जब ब्रह्माजी ने वेदों को ज्ञान दिया तो उसी समय एक राक्षस भी वहाँ उपस्थित था, उस हयग्रीव नामक राक्षस ने वेदों के ज्ञान की चोरी करके उसे निगल लिया जिसके बाद से पूरी दुनिया ही अज्ञानी हो गई ऐसे में भगवान श्री विष्णु जी को स्वयं राजा सत्यव्रत के समक्ष एक मछली के रूप में अवतार लेना पड़ा।

एक दिन सुबह के समय राजा सूर्यदेव को जल चढ़ा रहे थे, तभी एक छोटी सी मछली ने उस राजा से निवेदन किया कि वे उन्हें अपने कमण्डल में रख लें। राजा बहुत दयालु था उसने मछली के कहे अनुसार उसे अपने कमण्डल में रख लिया और उसे अपने घर ले गया घर जाते ही उस कमण्डल का आकार भी मछली के आकार का हो गया। उसने उसे किसी पात्र में रखा तो वह पात्र भी मछली के आकार का हो गया अंत में उस मछली से परेशान होकर उस राजा नें उसे समुंद्र में फेंक दिया, उसके बाद समुंद्र का आकार भी मत्स्य के आकार जितना बड़ा हो गया उसी समय भगवान विष्णु जी अपने वास्तविक रूप में आकर राजा से कहा कि आज से ठीक सात दिन के बाद प्रलय आयेगा जिससे यह पूरी सृष्टि नष्ट हो जायेगी और दोबारा इस पृथ्वी का निर्माण होगा।

हे राजन तुम जल्दी से जड़ी-बूटी बीज और पशुओं तथा सप्त ऋषियों को इकट्ठा करके उन्हें एक नाव में भेजो जिससे हम उन्हें बचा सकें, इसी तरह से विष्णु जी ने हयग्रीव राक्षस का वध करके वेदों को समाप्त होने से बचाकर स्वर्ग लोक में ले जाकर भगवान ब्रह्मा जी को सौंप दिया, उस समय भगवान ब्रह्मा जी प्रलय की गहरी नींद में सो रहे थे जब वह अपनी गहरी नींद से जागे तो वही ब्रह्म मुहूर्त की बेला कही जाने लगी। इस सृष्टि के पूरी तरह से समाप्त होने के पहले ही वासुकी को डोर बनाकर भगवान विष्णु जी ने सभी मूल्यवान जीवों को नाव में चढ़ाकर सुमेरू पर्वत की ओर सकुशल रवाना कर दिया, रवाना होने के इसी राह में भगवान श्री विष्णु जी के मत्स्य अवतार नें मत्स्य पुराण की पूरी कथा सत्यव्रत (मनु) को सुनाई।

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भगवान विष्णु जी के मत्स्य अवतार की पूजा विधि

☸ मत्स्य जयंती के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में जगकर किसी पवित्र नदी में स्नानादि करना चाहिए और यदि नदी में स्नान करना संभव न हो पाये तो घर में ही नहाने के पानी में शुद्ध गंगाजल मिलाकर स्नान करके साफ-सुथरे हो जाना चाहिए।

☸ स्नानादि के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर उनकी विधिपूर्वक पूजा करें और मत्स्य जयंती के व्रत का संकल्प लें।

☸ उसके बाद पूजा के लिए एक चौकी तैयार करें और उस पर पीले रंग का एक स्वच्छ कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें।

☸ इस दिन भगवान जी के मत्स्य रूप के अवतार की पूजा करके उन्हें पीले वस्त्र पहनायें साथ ही चंदन का तिलक लगाकर उन्हें फूल, फल, मिष्ठान और नैवेद्य अर्पित करें।

☸ उसके बाद भगवान विष्णु जी के मत्स्य अवतार के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर उन्हें धूपबत्ती दिखायें।

☸ उसके बाद मत्स्य अवतार की कथा या मत्स्य पुराण का पाठ करने के बाद भगवान विष्णु जी की श्रद्धापूर्वक आरती करके उन्हें भोग लगाएं।

मत्स्य जयंती शुभ मुहूर्त

तृतीया तिथि प्रारम्भः- 10 अप्रैल 2024, शाम 05ः32 मिनट से।
तृतीया तिथि समाप्तः- 11 अप्रैल 2024, दोपहर 03ः03 मिनट तक।
मत्स्य जयंती शुभ मुहूर्तः- दोपहर 01ः39 मिनट से, शाम 04ः12 मिनट 11 अप्रैल 2024 तक।

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