महाशिवरात्रि 2023

अलग-अलग ग्रंथों में महाशिवरात्रि त्यौहार मनाने की अपनी-अपनी मान्यता है। पौराणिक ग्रन्थों में बताया गया है कि आरम्भ में भगवान शिव का केवल निराकार रुप था और फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी पर आधी रात को भगवान शिव निराकार रुप से साकार रुप में आए थे। भगवान भोलेनाथ इस दिन अपने दीर्घ स्वरुप अग्नि लिंग में प्रकट हुए थे। कई ग्रंथो में बताया गया है कि इसी दिन से ही सृष्टि का निर्माण हुआ था और भगवान शिव करोड़ो सूर्यों के समान तेजस्व लिंगरुप में प्रकट हुए थें। हिन्दू धर्म के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को सूर्य और चन्द्रमा अधिक नजदीक रहते हैं, कहा ऐसा जाता है कि इस दिन शीतल चन्द्रमा और रौद्र रुपी शिव जी का मिलन होता है इसलिए इस प्रकार इसे चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रुप में मनाया जाता है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पार्वती और शिव जी की शादी का दिन भी माना जाता है।

महाशिवरात्रि की कथा

प्राचीन काल की बात है चित्रभानु नामक एक शिकारी था जो जानवरों का शिकार करके अपने परिवार को पालता था, वो एक साहूकार से कर्ज लिया था परन्तु कर्ज ना चुका पाने के कारण साहूकार ने उन्हें शिवमठ में बंदी बना लिया, वो दिन शिवरात्रि का था। शिकारी ध्यानपूर्वक शिव जी से सम्बन्धित धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी के दिन उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी। सायंकाल में साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया तथा ऋण चुकाने के विषय में बात की शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छुट गया। उस दिन सायंकाल मे हमेशा की भांति वह जंगल में शिकार के लिए निकला दिन भर बंदी गृह में रहने के कारण शिकारी भूख-प्यास से व्याकुल था, शिकार की खोज में वह बहुत दूर निकल गया, जब अंधकार हो गया तो उसने जंगल मे ही रात बिताने की सोची वन में एक तालाब के किनारे एक बेल के पेड़ पर चढ़ कर रात बीतने का इंतजार करने लगा, उस वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग था जो बेलपत्रों से ढका हुआ था, शिकारी को वो पता नही था, पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियां तोड़ी, वे संयोगवश उस पर शिवलिंग गिरती चली गई, इस प्रकार दिन भर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत पूरा हो गया, रात्रि का एक पहर बीत जाने के बाद एक गर्भिणी हरिणी तालाब पर पानी पीने के लिए आई तब शिकारी ने उसको देखकर धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंया खीचीं, हिरणी बोली मै गर्भिणी हूं, शीघ्र ही प्रसव करुंगी, बच्चे को जन्म देने के बाद मै तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाऊंगी तब मार लेना शिकारी ने प्रत्यंया ढीली कर दी और हिरणी जंगली झाड़ियो मे लुप्त हा गई प्रत्यंया चढ़ाने तथा ढीली करने के वक्त कुछ बेल पत्र टूटकर शिवलिंग पर गिर गया इस प्रकार अनजाने में ही प्रथम प्रहर का पूजन सम्पन्न हो गया।
कुछ समय पश्चात् एक और हिरणी उधर से निकली शिकारी उसे अपनी तरफ आता देख धनुष पर बाण चढ़ाया हिरणी ने शिकारी से कहा मै थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूं, अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूं, मै अपने पति से मिलकर जल्द ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी, शिकारी ने उसे भी जाने दिया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था, शिकारी चिन्तित था, इस बार भी धनुष से लग कर कुछ बेल पत्र शिवलिंग पर जा गिरे तथा दूसरे प्रहर की पूजन भी सम्पन्न हो गई तभी एक और हिरणी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली इस बार शिकारी धनुष पर तीर चढ़ाने में देर नही किया, वह तीर छोड़ने वाला ही था कि हिरणी बोली मै इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी, इस समय मुझे मत मारो शिकारी बोला इसके पहले भी मैने दो शिकार छोड़ दिया, मेरे बच्चे भूखे-प्यास से व्याकुल हो रहे होंगे। हिरणी ने कहा जैसे तुम्हे अपने बच्चों की ममता सता रही है वैसे मुझे भी, मेरा विश्वास करो, मै इन्हे इनके पिता के पास छोड़कर तुरन्त लौट आने की प्रतिज्ञा करता हूं। हिरणी की बात सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई, उसने उस हिरणी को भी जाने दिया। शिकारी के पास कोई शिकार नही था और वह भूख-प्यास से व्याकुल भी था। अनजाने में ही वह वृक्ष से बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेकता जा रहा था, उसी समय एक हिष्ट-पुष्ट मृग उसी मार्ग पर आया। शिकारी ने निश्चय कर लिया कि वो उस मृग का शिकार अवश्य करेगा, शिकारी को देखकर मृग बोला हे शिकारी ! यदि तुमने मुझसे पहले आने वाली तीन मृगिंयों और छोटे-छोटे बच्चों को मार दिया है तो मुझे भी मारने में देर मत करो जिससे मुझे वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े क्योंकि मै उन हिरणियों का पति हूं, अगर तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो मै उनसे मिलने के बाद तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊंगा। मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटनाचक्र घूम गया उसने पुरी कथा मृग को सुना दी। उस समय मृग बोला जिस प्रकार मेरी तीनों पत्नियां प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई है, वो मेरी मृत्य से अपने धर्म का पालन नही कर पाएंगी अतः जैसे तुमने उनको विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही इस समय मुझे भी जाने दो मै उन सभी हिरणियों के साथ तुम्हारे समक्ष जल्द ही उपस्थित हो जाऊंगा। शिकारी ने उस मृग को भी जाने दिया, इस प्रकार सवेरा हो गया, उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ने से अनजाने में ही सही लेकिन शिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई, पूजा के प्रभाव से शिकारी का हिंसक ह्दय निर्मल हो गया, उसमें भगवद्शक्ति का वास हो गया। कुछ समय पश्चात् वह मृग अपने सम्पूर्ण परिवार के साथ शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया जिससे कि वह शिकारी उनका शिकार कर सके लेकिन जंगली जानवरो की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेम भावना को देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई, उसने मृग परिवार को जीवनदान दे दिया। अनजाने में शिवरात्रि के व्रत का पालन करने पर शिकारी को मोक्ष और शिवलोक की प्राप्ति हुई।

READ ALSO   शनि देव चले चाँदी के पायें पर, इन तीन राशियों की चमक सकती है किस्मत 2023

महाशिवरात्रि का महत्व

मान्यता एैसी है कि महाशिवरात्रि के दिन शिव तत्व का सीधा सम्पर्क पृथ्वी से होता है, कहा ऐसा जाता है कि हमारी चेतना और हमारा आभामण्डल भौतिक स्तर से 10 इंच ऊपर की तरफ होता है तथा महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्माण्डीय चेतना पृथ्वी तत्व को स्पर्श करती है, मौन या चेतना मे रहने के लिए ये सबसे अच्छा समय है इस प्रकार महाशिवरात्रि का उत्सव भक्तों के जीवन में विशेष महत्व रखता है।

महाशिवरात्रि पूजा विधि

☸ प्रातः काल स्नान आदि करने के पश्चात् साफ वस्त्र धारण कर लें तत्पश्चात् हाथ में जल पुष्प और अक्षत लेकर महाशिवरात्रि पूजा का संकल्प लें।
☸ उसके बाद शिवलिंग को गंगाजल और दूध से अभिषेक करे तत्पश्चात् सफेद चंदन लगाए, अक्षत, मदार का फूल, भांग, धतूरा तथा बेल पत्र आदि अर्पित करें।
☸ सम्भव हो तो भगवान शिव को वस्त्र भी अर्पित करें अन्यथा आप रक्षासूत्र भी अर्पित कर सकते है।
☸ शिव चालीसा का पाठ करने के बाद घी के दीपक या कपूर से भगवान शिव की आरती करें।
☸ अन्त में भगवान शिव के समक्ष मालपुआ, ठंडाई, लस्सी, हलवा, मखाने की खीर आदि का भोग भी लगाएं।

विशेषः- नारियल, तुलसी, हल्दी, सिंदूर, शंख आदि का प्रयोग शिव पूजा में वर्जित है, इसका विशेष रुप से ध्यान रखें।

महाशिवरात्रि 2023 शुभ तिथि एवं मुहूर्त

साल 2023 में महाशिवरात्रि चतुर्दशी तिथि 18 फरवरी 2023 को रात्रि 08 बजकर 02 मिनट से आरम्भ हो रहा है तथा चतुर्दशी तिथि की समाप्ति 19 फरवरी 2023 को शाम 04 बजकर 18 मिनट पर होगी। महाशिवरात्रि की पारण मुहूर्त 19 फरवरी को प्रातः 06 बजकर 06 मिनट से दोपहर 03 बजकर 24 मिनट तक बना हुआ है।

READ ALSO   What is Shas Yoga?