माघ/मौनी अमावस्या 2023

हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने में कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन अमावस्या और शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन पूर्णिमा पड़ती है, सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या और शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या को शनि अमावस्या कहते है तथा जो अमावस्या माघ माह में पड़ती है उसे मौनी अमावस्या कहा जाता है।
इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों मे आस्था की डुबकी लगाने की परम्परा भी है तत्पश्चात पूजा, जप ताप और दान भी किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन तिलांजलि करना पुण्य का काम होता है, माघ अमावस्या के दिन बहुत भारी संख्या में श्रद्धालु गंगा और अन्य नदियों में आस्था की डुबकी लगाते है।

माघ अमावस्या कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन समय में कांचीपुरी में एक ब्राह्मण का परिवार रहता था, परिवार के मुख्य सदस्य का नाम देवस्वामी था जिसके 07 पुत्र और एक पुत्री थी, देव स्वामी की पत्नी का नाम धनवती और पुत्री का नाम गुणवती था समय पर देवस्वामी ने सभी पुत्रों का विवाह कर दिया केवल उसके बेटी गुणवती के विवाह की जिम्मेदारी उसके उपर थी, उसने अपने बड़े पुत्र को अच्छा वर देखने के लिए दूसरे नगर में जाने का सलाह दिया और देवस्वामी ने बेटी की कुण्डली एक ज्योतिषाचार्य से दिखाई ज्योतिष जी ने बताया कि आपके पुत्री के कुण्डली में विवाह के पश्चात विधवा होने का दुर्योग बना हुआ है, यह सुनने के पश्चात देवस्वामी अत्यन्त दुःखी हो गया तब ज्योतिषाचार्य ने कहा कि सिहंलद्वीप मे एक सोमा धोबिन है अगर वह यहां आकर पूजा करेगी तब आपके पुत्री के कुण्डली का दोष खत्म हो जायेगा इतना सुनने के पश्चात देवस्वामी ने अपने छोटे पुत्र के साथ पुत्री गुणवती को सिंहद्वीप से धोबिन को लाने के लिए भेज दिया दोनो भाई-बहन चलते-चलते थक गए थे, भूख और प्यास से व्याकुल होकर वह एक वट वृक्ष के नीचे आराम करने लगे, उस वृक्ष पर एक गिद्ध का परिवार रहता था, गिद्ध के बच्चों ने उन दोनो भाई-बहनों को देखा था और जब उनकी माँ भोजन लेकर आई तो उन्होने मना कर दिया और उन दोनो भाई-बहन के बारे में बताया गिद्ध माँ को दया आ गई वह गुणवती और उसके भाई के पास गई दोनोे को भोजन प्रदान किया तथा उनके मुश्किल हल करने का आश्वासन दिया तब जाकर दोनो भाई-बहनों ने भोजन किया, प्रातः काल मादा गिद्ध उन दोनो को धोबिन के घर ले गई, समस्या सुनने के पश्चात धोबिन उनके घर आने को तैयार हो गई, धोबिन ने गुणवती के घर पूजा किया तत्पश्चात गुणवती के पति का मृत्यु हो गया उसके बाद सोभा धोबिन ने गुणवती को पुण्य दान दिया जिसके प्रभाव से उसका पति फिर से जीवित हो गया लेकिन जब सोमा धोबिन अपने घर-घर लौटकर आई तो उसे पुण्य में कमी के कारण उसके पति बेटे एवं दामाद की मृत्यु हो गई तब उसने नदी किनारे पीपल के पेड़ के नीचे भगवान हरि का विधि-विधान से पूजा की और 108 बार पीपल की परिक्रमा की पूजा से महापुण्य प्राप्त हुआ और पुनः उसके पति, बेटे और दामाद जीवित हो गए तथा उसका परिवार सुखपूर्वक रहने लगा।

मौनी अमावस्या का महत्व

मौनी अमावस्या के दिन देव और पितरो का संगम होता है। शास्त्रों मे यह बताया गया है कि माघ के महीने में देवतागण प्रयागराज आकर अदृश्य रुप से संगम में स्नान करते है और इस प्रकार देवता और पितरों दोनो का इस दिन संगम होता है, मौनी अमावस्या के दिन नदी में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा इस दिन व्रत करने से सभी पापों का नाश हो जाता है।

मौनी अमावस्या स्नान-दान के नियम

☸ मौनी अमावस्या के दिन ब्रहा मुहूर्त में स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें।
☸ तत्पश्चात ब्रह्म मुहूर्त में गंगा नदी, सरोवर तट या पवित्र कुण्ड में स्नान करें।
☸ स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करेें।
☸ उसके बाद तांबे के लोटे में जल भरकर काले तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ दें।
☸ अर्घ के बाद अपने सामर्थ्यनुसार दान दें।
☸ यदि सम्भव हो दिनभर मौन व्रत धारण करके व्रत रखें।
☸ मौनी अमावस्या के दिन गुस्सा ना करें, अप शब्दों के प्रयोग से बचे तथा वाद-विवाद व नशा से भी दूर रहें।
☸ मौनी अमावस्या के दिन गायत्री मंत्र का जाप या मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धा, भक्तिपूर्वक दान करना चाहिए।

मौनी अमावस्या पूजा विधि

☸ मौनी अमावस्या के दिन प्रातः काल घर की सफाई करें।
☸ इस दिन मौन रहकर ही व्रत उपवास रखें।
☸ नदी या तालाब में स्नान करें सुविधा न होने पर घर पर ही स्नान करे लेकिन नहाने से पूर्व जल को सिर पर लगाकर प्रणाम करें।
☸ तत्पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को काले तिल डालकर जल का अर्घ अर्पित करें।
☸ इस दिन पितरों के पूजा करने का भी विधान है।
☸ फल-फूल, धूप, दीपक, अगरबत्ती आदि चीजों से भगवान विष्णु जी का पूजन करें।
☸ पूजन के पश्चात् गरीबों या ब्राहमणों को भोजन कराएं।
☸ अन्त में अपने सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करें।

मौनी अमावस्या 2023 शुभ तिथि एवं मुहूर्त

अमावस्या तिथि प्रारम्भः- 21 जनवरी 2023 को प्रातः काल 06 बजकर 17 मिनट सें।
अमावस्या तिथि समाप्तः- 22 जनवरी 2023 को प्रातः काल 02 बजकर 22 मिनट पर
माघ अमावस्या पर दान आदि कार्य 21 जनवरी 2023 दिन शनिवार को किया जाएगा।