योगिनी एकादशी 2023 | Yogini Ekadashi |

योगिनी एकादशी भगवान विष्णु जी को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु जी की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है । यह व्रत आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत को करने से सभी प्रकार के रोग व कष्ट नष्ट होते हैं तथा मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस व्रत को करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर तक का पुण्य प्राप्त होता है।

योगिनी एकादशी का महत्व

इस व्रत को करने से ब्राह्मणों को सहस्त्र गायों के दान करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इस व्रत को करने वाले व्यक्तियों को उनके सभी प्रकार के अपयश तथा शारीरिक रोगों, चर्म रोग से मुक्ति दिलाकर उनके जीवन को सफल बनाने में सहायता मिलती हैं। यह देह के सभी आधी-व्याधियों को नष्ट करने तथा सुन्दर रुप गुण व यश देने वाला व्रत होता है। इस व्रत का फल 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के फल देने के समान होता है। यह व्रत पापों को नाश करने वाला और महान पुण्य की प्राप्ति कराने वाला होता है।

योगिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, स्वर्ग धाम की अलकापुरी नामक नगरी में कुबेर नाम का राजा रहता था। वह शिव भक्त था और प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा किया करता था। हेम नाम का एक माली पूजा के लिए राजा के यहां फूल लाया करता था। हेम की विशालाक्षी नाम की सुंदर स्त्री थी। एक दिन वह मानसरोवर से पुष्प तो ले आया, लेकिन कामासक्त होने के कारण वह अपनी स्त्री से हास्य-विनोद तथा रमण करने लगा।

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इधर राजा उसकी दोपहर तक राह देखता रहा। अंत में राजा कुबेर ने सेवकों को आज्ञा दी कि तुम लोग जाकर माली के न आने का कारण पता करो, क्योंकि वह अभी तक पुष्प लेकर नहीं आया। सेवकों ने कहा कि महाराज वह पापी अतिकामी है, अपनी स्त्री के साथ हास्य-विनोद कर रहा होगा। ये सुनकर कुबेर क्रोधित हो गए और उसे बुलाया। हेम माली उपस्थित हुआ। राजा कुबेर ने क्रोध में आकर कहा- तूने मेरे परम पूजनीय ईश्वरों के ईश्वर श्री शिवजी महाराज का अनादर किया है, इसलिए मैं तुझे श्राप देता हूं कि तू स्त्री का वियोग सहेगा और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी होगा।

कुबेर के श्राप से हेम माली का स्वर्ग से पतन हो गया और वह उसी क्षण पृथ्वी पर गिर गया। भूतल पर आते ही उसके शरीर में श्वेत कोढ़ हो गया। उसकी स्त्री भी उसी समय अंतर्ध्यान हो गई। मृत्यु लोक में आकर माली के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट गया। वह जंगल में बिना अन्न और जल के भटकता रहा। रात्रि को निद्रा भी नहीं आती थी, परंतु शिवजी की पूजा के प्रभाव से उसको पिछले जन्म की स्मृति का ज्ञान अवश्य रहा। घूमते-घमते एक दिन वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुंच गया, जो ब्रह्मा से भी अधिक वृद्ध थे और जिनका आश्रम ब्रह्मा की सभा के समान लगता था। हेम माली वहां जाकर उनके पैरों में पड़ गया। उसे देखकर मार्कण्डेय ऋषि बोले तुमने ऐसा कौन-सा पाप किया है, जिसके प्रभाव से ये हालत हो गई। हेम माली ने सारा वृत्तांत सुनाया। ये सुनकर ऋषि बोले- निश्चित ही तूने मेरे सम्मुख सत्य वचन कहे हैं, इसलिए तेरे उद्धार के लिए मैं एक व्रत बताता हूँ। यदि तू आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी नामक एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करेगा तो तेरे सब पाप नष्ट हो जाएंगे। ये सुनकर हेम माली ने अत्यंत प्रसन्न होकर मुनि को साष्टांग प्रणाम किया। मुनि ने उसे स्नेह के साथ उठाया। हेम माली ने मुनि के कथनानुसार विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से अपने पुराने स्वरूप में आकर वह अपनी स्त्री के साथ सुखपूर्वक रहने लगा।

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योगिनी एकादशी पूजा विधिः-

☸ इस व्रत के दिन सूर्य के उदय होने से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
☸ उसके उपरान्त अपने घर के पूजा स्थान पर पूरब या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठे फिर दीपक जलाएं।
☸भगवान विष्णु को पंचामृत से अभिषेक करायें व उनको फूल और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु को सात्विक चीजों का भोग लगाकर कपूर से आरती करें।
☸ इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ पीपल के वृक्ष की पूजा का भी विधान है।
☸ भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इस दिन सायंकाल के समय घरो में तथा मन्दिरों, पीपल के वृक्षो एवं तुलसी के पौधों के पास दीप प्रज्ज्वलित करने चाहिए। गंगा और पवित्र नदियों में दीप-दान करना चाहिए।
☸ रात्रि के समय भगवान नारायण की प्रसन्नता के लिए नृत्य, भजन, कीर्तन और स्तुति के द्वारा जागरण करना चाहिए।

भगवान विष्णु का मंत्रः-

ओम नमो नारायणाय नमः
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः
शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभयः सुरेशं
विश्राधारमं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम।
लक्ष्मी कांत कमलनयनं योगिभिध्यानगम्यं
वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम

योगिनी एकादशी शुभ तिथि एवं मुहूर्तः-

योगिनी एकादशी पूजा मुहूर्त 2023
एकादशी तिथि प्रारम्भः- 13 जून 2023 को सुबह 09ः28 से
एकादशी तिथि समाप्तः- 14 जून 2023 सुबह 08ः48 तक