रत्न धारण का ज्योतिषीय आधार वृषलग्न के लिए

माणिकः- वृषलग्न के जातकों की कुण्डली मे सूर्य सुख भाव अर्थात चतुर्थ भाव का मालिक होता है। लेकिन वृषलग्न मे सूर्य लग्नेश शुक्र का शत्रु होता है। इसलिए केवल सूर्य की महादशा चलने पर ही माणिक धारण कर सकते है। अन्यथा आपको अशुभ परिणाम देखने को मिल सकते है। इसलिए आपको माणिक धारण करने से पहले किसी ज्योतिषाचार्य से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। जिससे आपको शुभ फलो की प्राप्ति हो और आप सुख सुविधाओ का लाभ उठा सके।
मोतीः- मोती चन्द्रमा का रत्न होता है। और वृषलग्न मे चन्द्रमा पराक्रम भाव का मालिक है। इसलिए वृषलग्न के जातकों को कभी भी मोती नही धारण करना चाहिए।
मूंगाः- मूंगा को मंगल का रत्न कहते है। वृषलग्न की कुण्डली मे मंगल रोग एवं खर्च का मालिक होता है अतः इस स्थिति मे आपको मूंगा नही धारण करना चाहिए।
पन्नाः- वृषलग्न मे बुध द्वितीय एवं पंचम त्रिकोण का मालिक होता है तथा यह योग कारक ग्रह भी है। जातक को पारिवारिक सुख, धन लाभ, संतान सुख, यश, मान तथा भाग्य उन्नति मे भी सहायक होता है। बुध की महादशा मे पन्ना धारण करना अधिक लाभदायक रहेगा। साथ ही यदि पन्ने को हीरे के साथ पहना जाए तो आपके जीवन मे समृद्धि बढ़ेगी परन्तु एक बार ज्योतिषी परामर्श अवश्य लें।

पुखराजः- वृष लग्न के कुण्डली मे बृहस्पति अष्टम एवं एकादश भाव का मालिक होता है। बृहस्पति को वृषभलग्न के लिए अशुभ माना जाता है। तथा लग्नेश शुक्र की बृहस्पति के साथ मित्रता भी नही है। इसके बावजूद बृहस्पति द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, नवम एवं लग्नभाव मे उपस्थित हो तो बृहस्पति की महादशा मे पीले पुखराज धारण करने से आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
हीराः- हीरा वृषभलग्न का रत्न माना जाता है। इसको धारण करने से वृष लग्न के जातकों को स्वास्थ्य मे वृद्धि, आयु मे वृद्धि, जीवन मे तरक्की मिलती है। अतः आप हीरा धारण कर सकते है।
नीलमः- वृषलग्न के जातकों की कुण्डली मे शनि नवम एवं दशम भाव का मालिक होता है। और कारक भी माना जाता है। नीलम धारण करने से मान पद प्रतिष्ठा मे बढ़ोत्तरी धन सुख, सुख सम्पदा की प्राप्ति होती है। यदि नीलम को हीरे के साथ पहना जाये तो अधिक लाभ प्रदान करता है।
नोटः- यह रत्न पहनने का एक सामान्य परिचय है। यह स्थिति तब लागू होती है जब सभी ग्रह अपने भाव मे अकेले विराजमान हो। परन्तु इसकी सम्पूर्ण एवं विस्तृत जानकारी के लिए ज्योतिषाचार्य से सम्पर्क करें तथा उनके संरक्षण मे ही कोई रत्न धारण करें।

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