लक्ष्मी कवच

☸लक्ष्मी मेरे अग्र भाग की रक्षा करे कमला मेरी पीठ की रक्षा करें, नारायणी मेरे मस्तक की और श्रीस्वरुपिणी देवी मेरे सर्वांग की रक्षा करें।

☸जो राम पत्नी और रामेश्वरी है वह विशाल नेत्र योग माया लक्ष्मी मेरे सम्पूर्ण अंगो की रक्षा करें। वही कौमारी, चक्रधारिणी, जय देने वाली, धनदात्री, पाशपक्ष, मालनी, कल्याणी, हरि प्रिया, हरि रामा, जय करने वाली, महोदरी, कृष्ण परायणा, श्री कृष्ण मोहिनी, महारौद्री, सिद्धि देने वाली और वही चित्रकूट निवासिनी आदि नामों से प्रसिद्ध है। वही अनपायिनी लक्ष्मी देवी मेरा भय दूर करें सर्वदा रक्षा करें और मेरा भवपाश छेदन करें।

☸जो व्यक्ति भक्ति युक्त होकर प्रतिदिन तीनो संध्याओं मे व एक संध्या मे इस परम पवित्र लक्ष्मी कवच का पाठ करता है वह सम्पूर्ण संकट से मुक्त जाता है।

☸इस कवच के पाठ करने से पुत्र और धनादि की वृद्धि होती है और भय दूर होता है इसका महात्मय त्रिभुवन में प्रसिद्ध है।

☸भोजपत्र पर रोचना और कुमकुम द्वारा इसको लिखकर कण्ठ में धारण करने में सर्व कामना सिद्ध होती है।

☸इस कवच के प्रसाद से अपूत्री को पुत्र धनार्थी को धन और मोक्षार्थी को मोक्ष प्राप्त होता है।

☸यदि स्त्रियां कण्ठ अथवा बाहु मे इस कवच को यथानियम धारण करें तो गर्भवती अच्छे पुत्र को प्राप्त करती है और बाँझ स्त्री भी गर्भवती होती है।

☸जो व्यक्ति नित्य भक्ति सहित इस कवच का पाठ करते है वह विष्णु की समानता को प्राप्त होते है और पृथ्वी मे मृत्यु अथवा आधि-व्याधि भय उनके ऊपर आक्रमण नही कर सकता।

☸जो पुरुष इस कवच को पढ़ते या पढ़ाते है अथवा स्वयं सुनते या दूसरों को सुनाते है। वह सम्पूर्ण पापों से दूर से छुटकर परमगति को प्राप्त करते है।

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☸संकट, विपदा, घने जंगल, राजद्वार, नौका मार्ग, रण आदि स्थानों मे इस कवच का पाठ करने से या धारण करने से विजय प्राप्त होती है।

☸इस कवच का पाठ करने से विपदा, घोर, संकट गहन, वन राजद्वार का कोई भी स्थान क्यों न हो इसे विधान पूर्वक पाठ अथवा धारण करने से सर्वत्र जय प्राप्त हो सकता है।

☸बाझ, स्त्री जिससे पुत्र उत्पन्न नही होता हो वह यदि तीन पक्ष पर्यन्त विधान पूर्वक यह कवच को सुने तो वह दीर्घायु, महायशस्वी सुपुत्र प्राप्त कर सकती है।

☸जो पुरुष शुद्ध मन से दो महीने तक ब्राह्मण के मुख से यह कवच सुने तो उसकी सम्पूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण होती है और वह सर्व प्रकार के भव बन्धन से छुट जाता है।

☸जिस स्त्री के पुत्र उत्पन्न होकर जीवित नही रहते है। वह तीन महीने तक इस कवच को भक्ति सहित सुने तो जीव वत्सा होती है और रोगी पुरुष पाठ करें तो एक महीने मे रोग मुक्त होता है।

☸जो व्यक्ति भोजपत्र पर या ताड़पत्र पर इस कवच को लिखकर घर में स्थापन करें तो उसको अग्नि व चोर आदि का भय नही रहता।

☸जो पुरुष प्रतिदिन यह कवच सुनता पढ़ता अथवा दूसरे को पढ़ाता है या इसको धारण करता है। उससे पर देवतागण सदा सन्तुष्ट रहते है।

☸मै अधिक और क्या कहूं! जो पुरुष इस कवच का पाठ करते है अथवा धारण करते है तो सर्वजीवेश्वरी भक्तों पर अनुग्रह करने वाली आदि शक्ति लक्ष्मी देवी अचल होकर उसमें वास करती है इसमें कोई सन्देह नही है।