व्यक्ति का आकर्षण और ऐश्वर्य बढ़ाती है स्फटिक माला

हिन्दू धर्म में कई तरह के मालाओं का वर्णन मिलता है इनमें से हम तुलसी, कमलगट्टे, तथा चंदन इन सभी मालाओं को ज्यादा महत्व देते हैं इन्हीं में से एक है स्फटिक मणि की माला, स्फटिक की माला में साक्षात भगवान का वास होता है। स्फटिक को अंग्रेजी में राक क्रिस्टल कहा जाता है। यह एक जादुई माला है इसे धारण करने से व्यक्ति का आकर्षण अचानक से बढ़ जाता है।

स्फटिक को सफेद बिल्लौर भी कहा जाता है संस्कृत में इसे सितोपल, शिवप्रिय, कांचमणि और फिटक इत्यादि के नाम से भी जानते हैं। स्फटिक बर्फ के पहाड़ों पर बर्फ के नीचे टुकड़े के रूप में पाया जाता है। कहा जाता है कि सिलिकान और आक्सीजन के परमाणुओं के मिलने से ही यह बनता है।

स्फटिक की पहचान

स्फटिक माला की पहचान के बारे में बात करें तो स्फटिक एक शुद्ध और चमकीला पत्थर है। यह हाथ में लेने पर एकदम ठंडा और भारी प्रतीत होता है। इसकी चमक कभी खत्म नही होती है तथा इसे रगड़ने पर इसमें चिंगारी सी उत्पन्न होती है। स्फटिक के माला की मोती एकदम से पारदर्शी नही होती है तथा यह कभी मटमैला भी नही होता है। इसकी एक और पहचान यह भी होती है कि इसमें स्थित मोती पूरी तरह से गोल नही होती, परन्तु यह माला छोटे या बड़े आकार का हो सकता है। स्फटिक माला की कोई कटिंग नही होती है इसलिए यह मोती अपने आप में बहुत खास होता है।

स्फटिक माला का महत्व

जिस तरह से अन्य रत्नों का हमारे ज्योतिष में अत्यधिक महत्व होता है ठीक वैसे ही स्फटिक की माला का भी शास्त्रों में अत्यधिक महत्व माना जाता है। आमतौर पर यह माला लोगों के लिए पूर्ण फलदायी होता है। कहा जाता है कि इस माला से यदि माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, माँ दुर्गा और गायत्री मंत्र का जाप किया जाये तो जातक के जीवन में सुख, समृद्धि, ज्ञान और सम्पन्नता सदैव बनी रहती है। इस माला को धारण करने से धारण करने वाले जातक की चेतना शांत होती है, मन में धैर्य होता है तथा व्यक्ति में विवेक का संचार होता है। आपको बता दें स्फटिक माला पहाड़ों में पाया जाता है इसलिए इससे बनी माला भी शीत यानि ठंडी होती है। शीतलता के गुणों के लिए इस माला का विशेष महत्व माना जाता है।

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स्फटिक माला धारण करने से मिलने वाले लाभ

☸ स्फटिक की माला धारण करने से धारण करने वाले जातक को कभी भय और घबराहट का सामना नही करना पड़ता है।

☸ स्फटिक की माला धारण करने से मानसिक सुख, शांति और धैर्य की स्थिति बनी रहती है।

☸ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्फटिक माला को धारण करने से जातक को धन सम्पत्ति, रूप, बल के साथ-साथ वीर्य और अत्यधिक यश की भी प्राप्ति होती है।

☸ इसे धारण करने वाले जातक को भूत-प्रेत तथा इससे सम्बन्धित आने वाली किसी भी बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है।

☸ इस माला को धारण करने से किसी भी पुरूष या स्त्री का स्वास्थ्य पूरी तरह से स्वस्थ रहता है।

☸ स्फटिक की माला धारण करने से व्यक्ति का ज्वर, पित्त से सम्बन्धित विकार, निर्बलता तथा रक्त विकार जैसी व्याधियाँ भी दूर हो जाती हैं।

☸ इस माला को धारण मात्र कर लेने से सोचने और समझने की क्षमता में तेजी से विकास होने लगता है।

☸ इस माला के द्वारा किसी पवित्र मंत्रों का जाप करने से वह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाता है।

☸ स्फटिक की माला को माँ भगवती और लक्ष्मी का रूप माना जाता है।

☸ इस माला को धारण करने से शुक्र ग्रह से सम्बन्धित सभी दोष दूर हो जाते हैं।

☸ स्फटिक माला धारण करने से व्यक्ति के जीवन में आई दुख और दरिद्रता पूरी तरह से समाप्त हो जाती है।

☸ वास्तव में स्फटिक की माला को एक पाप नाशक के रूप में माना जाता है। इसे धारण करने से पापों का नाश होता है तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।

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☸ अत्यधिक ज्वर होने की स्थिति में स्फटिक की माला को पानी में धोकर कुछ देर तक नाभि पर रखने से ज्वर कम होने लगता है तथा ज्वर में आराम मिलने लगता है।

☸ इस माला को धारण करने से नाम, पैसा तथा शोहरत कमाने में अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है तथा माँ लक्ष्मी की कृपा से अत्यधिक धन प्राप्त होता है।

☸ अत्यधिक परिश्रम करने के बाद भी यदि आपको लाभ प्राप्त नही हो पा रहा है तो इस माला को धारण करना अत्यधिक लाभदायक होता है।

☸ स्फटिक की माला धारण करने से जातक को धन प्राप्ति के साथ-साथ आर्थिक तंगी और कर्ज से भी मुक्ति मिल जाती है।

☸ जातक को गरीबी दूर करने के लिए भी इस माला को धारण करना चाहिए।

☸ स्फटिक की माला धारण करने से सेहत में सुधार आता है और परिवार में सुख-शांति हमेशा बनी रहती है।

☸ यदि घर-परिवार में क्लेश और लड़ाई-झगड़े हो रहे हों तो स्फटिक की माला धारण करने से जातक के सभी तरह के क्लेश और वाद-विवाद दूर हो जाते हैं।

☸ स्फटिक की माला धारण करने से जातक को मानसिक शांति, सिरदर्द तथा रक्त से सम्बन्धित विकार में राहत मिलती है।

☸ माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने तथा उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए स्फटिक की माला धारण करना अति उत्तम होता है।

स्फटिक माला धारण करने के ज्योतिषीय लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्फटिक की माला को शुक्र ग्रह से सम्बन्धित माना जाता है। यदि कुण्डली में शुक्र ग्रह के द्वारा कोई दोष उत्पन्न हो रहे हों तो चाँदी की अंगूठी में स्फटिक रत्न जड़वाकर धारण करना चाहिए। इस माला को चन्द्र ग्रहण के समय लक्ष्मी सूक्त के मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित और सिद्ध किया जाता है। इस माला को गले में धारण करने से निश्चित रूप से महालक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है इसलिए शुक्रवार के दिन धारण करना अत्यधिक शुभ माना जाता है।

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स्फटिक की माला धारण करने के नियम

माँ लक्ष्मी जी को शुक्रवार का दिन समर्पित होता है इसलिए स्फटिक की माला शुक्रवार के दिन ही धारण करना चाहिए। शुक्रवार के दिन प्रातः स्नानादि कर लेने के बाद घर के पूजा स्थल में बैठ जायें और स्फटिक की माला रखकर उस पर गंगाजल का छिड़काव करें। उसके बाद 108 बार पंचवक्त्रः स्वयं रूद्रः कालाग्रर्नाम नामतः  मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें इसके बाद स्फटिक की माला धारण करें।