शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव और उससे बचने के उपाय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ब्रह्माण्ड़ में स्थित शनि ग्रह को न्याय का देवता माना जाता है। वास्तव में शनि की साढ़ेसाती को शास्त्रों में कालसर्प दोष के बाद दूसरा सबसे ज्यादा डराने वाला योग माना जाता है। शनि का नाम सुनते ही सभी लोग भयभीत हो जाते हैं परन्तु सबकी कुण्डली में शनि ग्रह खराब स्थिति में हो और सबको परेशान करें ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नही है। आपको बता दें शनि ग्रह अच्छे कर्म किये जाने वाले जातकों के लिए अच्छा तथा बुरे कर्म किए जाने वाले जातकों को बुरा परिणाम देते हैं तो आइए हमारे योग्य ज्योतिषाचार्य के. एम. सिन्हा जी के द्वारा साढ़ेसाती और उससे बचने के उपायों को विस्तार से जानते हैं।

क्या होता है शनि का साढ़ेसाती तथा कैसे होता है कुण्डली में इसका निर्माण ?

शनि की साढ़ेसाती का अर्थ होता है साढ़े सात साल की अवधि, आपको बता दें कि शनि पूरे 12 राशियों में भ्रमण करने के लिए पूरे तीस साल का समय लेते हैं अर्थात शनि किसी एक राशि में लगभग ढ़ाई साल रहते हैं। किसी जातक की जन्म कुण्डली में चन्द्र राशि से 12 वें स्थान पर शनि का गोचर प्रारम्भ हो जाता है तो उसी समय से उस राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरु हो जाती है। अतः शनि की साढ़ेसाती चलने के दौरान जातक को बहुत बार मानसिक और शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है परन्तु शनि की साढ़ेसाती सदैव बुरी नही होती है। साढ़ेसाती वाली स्थिति में शनि किसी जातक को कैसा फल प्रदान करेगा यह जातक की जन्म कुण्डली में स्थित योगों पर निर्भर करता है। इसके अलावा इन योगों के साथ शनि की दशा/अन्तर्दशा किस ग्रह के साथ चल रही है और शनि की दशानाथ में कुण्डली के किन भावों से संबंध बन रहा है इत्यादि बहुत सी ऐसी बातें शनि की साढ़ेसाती के मिलने वाले परिणाम के लिए देखी जाती है।

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शनि की कुण्डली में साढ़ेसाती की स्थिति में किसी जातक की जन्म कुण्डली में शनिदेव स्वयं किस हालत में हैं, शनि कुण्डली में शुभ फल देने वाले हैं या अशुभ फलदायक हैं इसके अलावा शनि किन योगों में शामिल हैं, पीड़ित हैं अथवा नही हैं इत्यादि बातों को शनि की साढ़ेसाती के लिए अवश्य देखा जाता है साथ ही और भी बहुत सी बाते हैं जिनका किसी योग्य ज्योतिषीयों के द्वारा विश्लेषण करने के बाद ही शनि की साढ़ेसाती का फल कहना चाहिए।

साढ़ेसाती से उत्पन्न होती है भय की स्थिति

जब कभी किसी जातक की कुण्डली में शनि की साढ़ेसाती प्रारम्भ हो जाती है तो इससे भयभीत होना सामान्य है ऐसा इसलिए क्योंकि यदि हम किसी जातक की औसत आयु 70 वर्ष भी मान लें तो उस जातक की कुण्डली में तीन बार साढ़ेसाती की स्थिति देखने को मिलेगी। यानि साढ़ेसाती का काल पूरे 22 वर्ष तक रहेगा। आपको बता दें साढ़ेसाती पूरी तरह से खराब भी नही होता हैं। अपने तीन चरणों में सिर, पेट और पैर में इनका प्रभाव रहता है या तो फिर ठीक इससे उल्टे क्रम में रहता है। इस स्थिति में जब इसका प्रभाव सिर में रहेगा तो जातक सोचने के लिए मजबूर हो जायेगा। जब साढ़ेसाती का प्रभाव पैर में होगा तो वह दौड़ने के लिए मजबूर होगा। इसके अलावा जब साढ़ेसाती का प्रभाव पेट में शुभ स्थिति में होगा तो ऐसी स्थिति में उसे अपार धन की प्राप्ति होगी। यदि शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव ऐसा है तो आपको डरने की आवश्यकता नही है बल्कि समझदारी से काम लेना चाहिए।

कुण्डली में उपस्थित शनि की साढ़ेसाती से बचने के उपाय

☸ यदि किसी जातक की जन्म कुण्डली में शनि की साढ़ेसाती वाली स्थिति बनी हुई है तो शनिदेव के इस अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनि देव को प्रसन्न करना अति आवश्यक होता है जिससे हमारा जीवन सरलता से चल सके तो आइए शनि की साढ़ेसाती से बचने के कुछ निम्न उपायों को समझते हैं।

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☸ जैसा की आपको पता है शनिदेव कर्मों के द्वारा ही जातक को उसका फल देते हैं ऐसे में दान-दक्षिणा करने को सबसे ज्यादा पुण्य कर्मों में से एक माना जाता है इसलिए शनिवार के दिन लोहा, काले उड़द की दाल, काला तिल या फिर काले वस्त्रों का दान करना चाहिए ऐसा करने से शनिदेव अत्यधिक प्रसन्न होते हैं।

☸ शनिवार के दिन शनि मंदिर में जाकर सरसों के तेल में काला तिल और लोहे का छोटा कील मिलाकर शनिदेव को अर्पित करें ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होंगे और कुण्डली में साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता जायेगा।

☸ शनिवार के दिन शनिदेव के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा करें साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ भी करें ऐसा करने से शनिदेव का क्रोध शांत हो जाता है तथा शनि देव की कुण्डली में अशुभता समाप्त हो जाती है।

☸ शनिवार के दिन किसी तालाब के पास जाकर मछलियों, पक्षियों तथा पालतू पशुओं को चारा खिलाएं ऐसा करने से शनि की साढ़ेसाती के नकारात्मक प्रभाव बहुत कम हो जाते हैं।

☸ शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं साथ ही शनि स्त्रोत का पाठ करें ऐसा करने से शनि देव के अशुभ प्रभाव खत्म हो जाते हैं।

☸ यदि संभव हो तो प्रतिदिन मजबूर और लाचार लोगों को सामर्थ्य और इच्छा अनुसार दान-दक्षिणा करें ऐसा करने से शनि देव के अशुभ प्रभाव कम हो जायेंगे साथ ही शनिदेव शांत हो जायेंगे।

☸ प्रतिदिन सुबह जगकर चिड़ियों को दाना पानी दें इसके अलावा चींटियों को आटा और शक्कर खिलाएं ऐसा करने शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

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☸ प्रतिदिन सुबह के समय सूर्य को जल दें तथा गलत और अनुचित कार्यों को करने से बचें शनिदेव के अशुभ प्रभाव कम होंगे।

☸ यदि हो सके तो शनिवार के दिन सुबह और शाम के समय में भोजन में काले नमक और काली मिर्च का प्रयोग करें इससे शनि की साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव कम होंगे।

☸ इसके अलावा प्रत्येक शनिवार के दिन मीठी रोटी पर तेल लगाकर काले कुत्ते को खिलाएं ऐसा करने से शनिदेव के अशुभ प्रभाव कम होंगे।

☸ यदि संभव हो तो शनिवार के दिन बंदरों को भूना चना खिलाएं तथा मांस, मदिरा और नशीले पदार्थों का सेवन करना छोड़ दें ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होंगे साथ ही कुण्डली में उसके अशुभ प्रभाव कम हो जायेंगे।

शनि की साढ़ेसाती से बचने के मंत्र

शनि की साढ़ेसाती के दुष्प्रभाव से बचने के लिए उनके उपायों के साथ-साथ उनके मंत्रो का उच्चारण करना भी अति आवश्यक होता है। अतः मंत्रों का जाप करने से शनिदेव जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं।

ओम त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव वंदना मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।

ओम शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शंयोरनिश्रवन्तुः।
ओम शनैश्चराय नमः।।

ओम नीलांजिसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।