शुक्र का कुंभ राशि में परिवर्तन

शुक्र देव को वैदिक ज्योतिष के अन्तर्गत एक नैसर्गिक शुभ ग्रह माना गया है। शुक्रदेव को एक शुभ ग्रह की संज्ञा प्राप्त करने के कारण शुभ फल देने वाला ग्रह माना गया है। शुक्र देव को एक स्त्री प्रधान ग्रह कहा गया है इसके अलावा शुक्र देव को वृषभ और तुला राशि का स्वामी ग्रह माना गया है। शुक्र देव मीन राशि में उच्च अवस्था में तथा कन्या राशि में नीच अवस्था में होता है। सामान्य तौर पर शुक्र देव को विवाह, प्रेम तथा सभी भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना गया है इसलिए शुक्र देव का कुण्डली में मजबूत होना परम आवश्यक माना जाता है। 07 मार्च 2024 को सुबह 10ः46 मिनट पर शुक्र देव कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे तो आइये जानते हैं योग्य ज्योतिषाचार्य के. एम. सिन्हा जी के द्वारा की सुख-समृद्धि के कारक ग्रह शुक्र ग्रह का प्रभाव किस राशि के जातकों पर शुभ व किस राशि के जातकों पर अशुभ पड़ेगा।

शुक्र ग्रह की विशेषता

शुक्र देव स्त्री प्रधान होने के कारण इनमें स्त्रियोचित गुण अधिक पाया जाता है। शुभ शुक्र ग्रह के कारण ही जातक के व्यक्तित्व में एक चुम्बकीय आकर्षण में बढ़ोत्तरी होती है। शुक्र देव जातक को अतिरिक्त विलासिता, ऐश्वर्य, वाहन इत्यादि का सुख प्राप्त कराते हैं। शुक्र देव को गीत, संगीत, गृहस्थ जीवन का सुख, आभूषण, नृत्य, श्वेत, रेशमी वस्त्र, सुगंधित और सौन्दर्य सामग्री, चाँदी, हीरा, रति एवं संभोग सुख इत्यादि का कारक माना जाता है।

शुक्र के राशि परिवर्तन का प्रत्येक लग्न पर प्रभाव

मेष लग्न

मेष लग्न की कुण्डली में शुक्र देव द्वितीय और सप्तम भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के एकादश भाव में होगा जिसके कारण मेष राशि के जातक को अनुकूल परिणाम की प्राप्ति होगी। कुंभ का यह गोचर जातक के निजी संबंधों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दौरान जातक के प्रेम संबंधों में मधुरता आयेगी तथा दोनों ही एक दूसरे को समझने का प्रयास करेंगे। दाम्पत्य जीवन में बंधे जातक अच्छा जीवन व्यतीत करेंगे। अविवाहित जातक के लिए शुक्र का गोचर अच्छा रहने वाला है इस दौरान आपको एक अनुकूल जीवनसाथी तथा प्रेम संबंध की प्राप्ति के प्रबल योग बनेंगे। इस गोचर के दौरान आपका धन भी व्यय होगा तथा आप अपने सुख-सुविधाओं पर अधिक से अधिक धन खर्च करेंगे। इस गोचर के दौरान आप अतिव्ययी बन जाते हैं तथा फिजूलखर्ची होने के कारण आपकी आर्थिक स्थिति में भी गिरावट आ सकती है। मेष राशि के जातक के पारिवारिक सदस्यों को इस गोचर के दौरान स्वास्थ्य में गिरावट उत्पन्न हो सकती है परन्तु पारिवारिक वाद-विवाद दूर होते दिखाई देंगे तथा पारिवारिक जीवन में आयी सारी समस्याएँ दूर होंगी। इस गोचर के दौरान आपके मित्रों से आपके रिश्ते बेहतर बनेंगे, इस समय आपको अपने खान-पान पर संयम रखने के साथ-साथ प्राणायाम, योग तथा व्यायाम को अपने जीवन का हिस्सा अवश्य बनाना चाहिए।

उपायः- मंगलवार के दिन मंदिर जाकर बूंदी के लड्डू किसी स्त्री को दान करें।

वृषभ लग्न

वृषभ लग्न की कुण्डली में शुक्र देव प्रथम तथा षष्ठम भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के दशम भाव में होगा जिसके कारण आपकी आर्थिक स्थिति अनुकूल होगी इस दौरान आप धन प्राप्ति के लक्ष्य को पूरा करेंगे। शुक्र के गोचर के दौरान एक से अधिक माध्यमों से धन आने के योग बनेंगे। शुक्र के कारण जातक को सुख-सुविधाओं, वस्त्र, नए आभूषण, गैजेट, घड़ी, परफ्यूम इत्यादि को खरीदने पर धन खर्च करेंगे। यदि आप नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो इस गोचर के दौरान आपको धन प्राप्ति के योग बनेंगे। इस दौरान आपको कर्ज या बैंक से लोन लेकर अपनी इच्छा पूरी होने की प्रबल संभावना बनेगी जिसमें आपको पूर्ण सफलता मिलेगी। गोचर में आप अपने प्रेम जीवन को सवारने और सजाने का काम करेंगे। प्रेम जीवन में लम्बी यात्राओं पर जा सकते हैं साथ ही एक दूसरे को सरप्राइज देने का प्रयास करेंगे। शुक्र के गोचर के दौरान आप इस गोचर में अत्यधिक धन लाभ प्राप्त करेंगे। आर्थिक रूप से यह गोचर आपके लिए फायदेमंद साबित होगा इसके अलावा व्यापार क्षेत्र में लाभ की प्राप्ति करेंगे। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से इस गोचर में थोड़ी सावधानियाँ बरतनी पड़ सकती है। इस गोचर में आपके निजी संबंधों में स्थितियाँ आपके अनुसार ही घटती हुई नजर आयेगी। इस गोचर से जातक को कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिल सकती हैं जिससे आपके मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी।

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उपायः- शुक्रवार के दिन मां वैभव लक्ष्मी की आराधना करें।

मिथुन लग्न

मिथुन लग्न की कुण्डली में शुक्र देव द्वादश तथा पंचम भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के नवम भाव में होगा, इस गोचर के दौरान आप अपने स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहेंगे अन्यथा समस्या हो सकती है ऐसे में अपनी दिनचर्या में बदलाव करना चाहिए। इस गोचर में आप अपने व्यक्तित्व में सुधार लाने का निरन्तर प्रयास करेंगे। यदि आप किसी के साथ पहले से ही प्रेम संबंध में हैं तो यह गोचर आपके लिए अनुकूल होगा। यदि आप अविवाहित और सिंगल हैं तो इस गोचर के दौरान आपके जीवन में कोई नया व्यक्ति आ सकता है जिससे आपका रिश्ता बढ़ता हुआ दिखाई देगा। इस राशि के जातक इस गोचर के दौरान अपने अनियंत्रित खर्चों से परेशान हो सकते हैं। इस गोचर के दौरान साझेदारी में किये गये कार्य-व्यवसाय में लाभ मिलेगा इसके अलावा इस गोचर के दौरान आपको कुछ नया सीखने में सफलता मिलेगी। विदेश रहने वाले जातक को इस गोचर के दौरान अच्छा-खासा धन लाभ होगा। इस समय शुक्र के कारण आपको त्वचा से सम्बन्धित परेशानी उत्पन्न हो सकती है इसके अलावा आर्थिक खर्च होने के बावजूद भी आर्थिक स्थिति अच्छी होती दिखाई देगी तथा इस गोचर में आपकी लम्बी यात्रा के योग बनेंगे।

उपायः-किसी मंदिर या धार्मिक स्थल पर गाय का शुद्ध घी दान करें।

कर्क लग्न

कर्क लग्न की कुण्डली में शुक्र देव एकादश तथा चतुर्थ भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के अष्टम भाव में होगा जिसके कारण आपको सुख-सम्पत्ति की प्राप्ति होगी। शुक्र के गोचर के दौरान आपकी आर्थिक उन्नति होगी तथा जातक के जीवन में प्रेम, पारिवारिक सुख तथा वाहन सुख की प्राप्ति होगी इसके अलावा इस गोचर के दौरान आपको सोशल मीडिया तथा इंटरनेट के माध्यम से लाभ प्राप्त होगा। इस समय आपके महिला मित्र आपके लिए मददगार साबित होंगे तथा जातक को अधिक उन्नति प्राप्त होगी। कर्क राशि के जातकों को शुक्र के गोचर के दौरान दाम्पत्य जीवन में तनाव बढ़ सकता है तथा वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ रिश्ते भी बिगड़ सकते हैं इसलिए अपना रिश्ता अच्छा बनाये रखने के लिए विशेष सावधानी बरतें। शुक्र का होने वाला गोचर जातक को पुरानी स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है तथा स्वास्थ्य पर सकारात्मक खर्च हो सकते हैं इसके अलावा इस गोचर से आपको आर्थिक उन्नति प्राप्त होगी तथा जीवन में आगे बढ़ने के नये अवसर तथा मार्ग प्राप्त होंगे।

उपायः- भगवान शिव को जल अर्पित करें तथा भोजन करने के लिए चाँदी के बर्तन का उपयोग करें।

सिंह लग्न

सिंह लग्न की कुण्डली में शुक्र देव दशम तथा तृतीय भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के सप्तम भाव में होगा जिसके कारण आपकी वाणी में मिठास बढ़ेगा जिससे लोग आपकी ओर आकर्षित होंगे। इस गोचर के दौरान आपको अपने रहन-सहन, तौर-तरीके, अपने पहनावे ओढ़ावे तथा समाज के चेहरे को सुधारने के लिए प्रयत्नशील रहेंगे इसके अलावा नये-नये वस्त्र आभूषण खरीदने तथा खुद को दूसरों से बेहतर बनाने तथा बेहतर दिखाने का प्रयास करेंगे। शुक्र के गोचर के दौरान आपके जीवन में निकटता बढ़ सकती है तथा कार्यक्षेत्र में कोई खास व्यक्ति आपके दिल के करीब आ सकता है। सिंह राशि के जातकों का आकर्षण इस गोचर के दौरान विपरीत लिंग के जातकों पर आ सकता है तथा आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होगी। छोटी-मोटी यात्राएं इस गोचर के दौरान हो सकती हैं साथ ही आपको मीडिया, डिजाइनिंग, संगीत, सजावट, नाटक, कला, अभिनय, इंटीरियर तथा डिजाइनिंग के क्षेत्र में अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा, इसके अलावा कार्यक्षेत्र में काम करने वाले सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होगा।

उपायः- शुक्रवार के दिन भगवान शिव जी को सफेद पुष्प अर्पित करें।

कन्या लग्न

कन्या लग्न की कुण्डली में शुक्रदेव नवम तथा द्वितीय भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के षष्ठम भाव में होगा जिसके कारण आपको भाग्य का साथ मिलेगा तथा आपके जीवन में तरक्की के द्वार खुल जायेंगे। इस गोचर के दौरान आप किसी भी काम में हाथ डालेंगे उसमें आपको सफलता मिल सकती है इसके अलावा आपकी दिन प्रतिदिन तरक्की होगी तथा धन प्राप्ति के आगमन के प्रबल स्त्रोत मिलेंगे। कन्या राशि के जातक स्वयं पर इस गोचर के दौरान खर्च करेंगे तथा धर्म-कर्म के कार्यों में आपकी विशेष रूचि बढ़ेगी। इस गोचर के दौरान आपके विवाह के योग बनेंगे तथा अनैतिक कार्यों के कारण मानहानि भी झेलना पड़ सकता है। शुक्र के गोचर के दौरान भाग्य की कृपा से आपके रूके हुए कामों में फिर से गति होगी जिससे आप उन्नति की प्राप्ति करेंगे तथा आपके अपने जीवनसाथी के अलावा विवाहेत्तर संबंध भी बढ़ सकते हैं। कन्या राशि के जातकों को इस गोचर के दौरान यात्रा करने से लाभ की प्राप्ति होगी परन्तु अनुत्पादक कार्यों में आप अत्यधिक खर्च करेंगे जिसके कारण आपको बाद में अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस समय कन्या राशि के जातक बिना सोचे-समझे पारिवारिक धन खर्च करने के बारे में विचार कर सकते हैं जिससे परिवार के सदस्यों को कष्ट प्राप्त होगा।

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उपायः- बुधवार के दिन उपवास रखें तथा छोटी कन्याओं के चरण छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

तुला लग्न

तुला लग्न की कुण्डली में शुक्र देव अष्टम तथा प्रथम भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के पंचम भाव में होगा जिसके कारण आपमें आत्मविश्वास भरा रहेगा इसके अलावा आपमें अज्ञात और रहस्यमयी स्थितियों को जानने की इच्छा उत्पन्न होगी। इस गोचर के दौरान जातक को पैतृक सम्पत्ति में लाभ मिलेगा तथा ज्योतिष और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में अत्यधिक रूचि बढ़ेगी। इस समय आपके मन में अज्ञात भय पैदा हो सकता है जिसके कारण आप किसी भी कार्यों को करने से पीछे हट जायेंगे। इस गोचर के दौरान आपको अचानक से धन प्राप्ति के योग बनेंगे साथ ही अपने आप पर भरोसा रख कर किसी भी काम को अपनी मर्जी से करना पसंद करेंगे। तुला राशि के जातक को इस गोचर के दौरान अज्ञात स्त्रोत से कुछ भी खरीदना नुकसान देह हो सकता है तथा कानूनी समस्या से दो चार भी होना पड़ सकता है। इस समय तुला राशि के जातक प्रेम जीवन में घनिष्ठता तथा विलासिता की बढ़ोत्तरी की ओर ही अपना सारा ध्यान केन्द्रित करेंगे। इस गोचर के दौरान दाम्पत्य जीवन में सुख की प्राप्ति होगी साथ ही मनोरंजन के साधनों में भी बढ़ोत्तरी होगी। अविवाहित जातकों के लिए विवाह के प्रस्ताव इस गोचर के दौरान आ सकते हैं जिससे मन प्रसन्न रहेगा इसके अलावा व्यापार में विस्तार करने में आप ज्यादा समय लगा सकते हैं जिसमें आपको विशेष सफलता प्राप्त होगी।

उपायः- शुक्रवार के दिन उपवास रखें तथा अपने घर के दरवाजे पर शाम में कपूर का दीपक जलायें।

वृश्चिक लग्न

वृश्चिक लग्न की कुण्डली में शुक्र देव सप्तम तथा द्वादश भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के चतुर्थ भाव में होगा जिससे आपके वैवाहिक संबंधों में मधुरता बढ़ेगी तथा आपके जीवनसाथी आपके प्रति समर्पित होंगे जिससे रिश्तों में आयी दूरियाँ समाप्त होंगी। इस गोचर के दौरान आपके व्यवसायिक क्षेत्रों में सुधार होगा तथा आप धीरे-धीरे व्यापार में वृद्धि करेंगे। शुक्र के गोचर के दौरान आपको विदेशी माध्यमों से धन की प्राप्ति होगी साथ ही नौकरी मिलने की खुशखबरी प्राप्त हो सकती है। वृश्चिक राशि के जातक को इस गोचर के दौरान अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी तथा नियमित रूप से व्यायाम करना होगा जिससे आपको स्वास्थ्य लाभ होगा। इस गोचर के दौरान आपको अपने कार्यक्षेत्र में टीम वर्क पर ध्यान देना चाहिए साथ ही साझेदारी में व्यापार करने से आपको उत्तम सफलता की प्राप्ति होगी। इस समय आपके सामाजिक प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी जिससे आप अपनी बातों से अपने किसी काम के लिए दूसरों को मना सकते हैं।

उपायः- मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा हनुमान जी की आराधना करें।

धनु लग्न

धनु लग्न की कुण्डली में शुक्र देव षष्ठम तथा एकादश भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के तृतीय भाव में होगा जिसके कारण आपके पेशेवर जीवन में उन्नति के योग बनेंगे साथ ही आमदनी में बढ़ोत्तरी होने के प्र्रबल संकेत मिलेंगे। इस गोचर में आपको अपना जीवन और ज्यादा बेहतर बनाने के अवसर प्राप्त होंगे जिससे लाभ की प्राप्ति होगी। धनु राशि के व्यापारी जातकों को व्यापार क्षेत्र में मुनाफा प्राप्त होगा जिससे मान-सम्मान तथा धन प्राप्ति के योग बनेंगे। शुक्र के गोचर के दौरान अपने स्वास्थ्य समस्याओं को अनदेखा करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है इसलिए अपने स्वास्थ्य समस्याओं पर विशेष ध्यान दें। कोर्ट-कचहरी से सम्बन्धित चल रहा लम्बा मुकदमा इस गोचर के दौरान समाप्त हो सकता है इसके अलावा आपको अपने सभी कार्यों में भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा साथ ही किसी वरिष्ठ अधिकारियों से आपको मदद भी मिल सकता है।

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उपायः- गुरूवार के दिन उपवास रखें तथा छोटी या बड़ी सभी महिलाओं का सम्मान करें।

मकर लग्न

मकर लग्न की कुण्डली में शुक्र देव पंचम तथा दशम भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के द्वितीय भाव में होगा जिसके कारण प्रेम संबंधों में वृद्धि होगी तथा प्रेम जीवन के रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत होंगे। दाम्पत्य जीवन में शुक्र के गोचर के दौरान सफलता प्राप्त होगी साथ ही संतान से आपको सुख की प्राप्ति होगी। इस समय मकर राशि के जातक को उनके कार्यक्षेत्र में अच्छी सफलता प्राप्त होगी जिसके कारण आप और ज्यादा अपने काम को महत्व देंगे तथा आपको अन्य लोगों से ज्यादा अपने कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। शुक्र के गोचर के दौरान दाम्पत्य जीवन में आ रही समस्या का समाधान होगा जिससे दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति प्राप्त होगी। यह गोचर आपके मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उत्तम रहेगा तथा आपके वरिष्ठ अधिकारी आपसे प्रसन्न और प्रभावित होंगे। शुक्र के गोचर के दौरान आपका विदेश जाने का सपना पूरा होगा तथा आपको आर्थिक मामलों में भी सफलता मिलेगी।

उपायः- शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा सफेद गाय को हरा चारा खिलायें।

कुंभ लग्न

कुंभ लग्न की कुण्डली में शुक्रदेव चतुर्थ तथा नवम भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के प्रथम भाव में होगा जिससे जातक के जीवन में सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होगी साथ ही भाग्य के सहयोग से आपको अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। इस गोचर के दौरान आपके आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होगी साथ ही आपकी सारी इच्छाएं और अभिलाषाएं पूरी होंगी जिससे आपका मन प्रसन्न रहेगा। इस समय कुंभ राशि के जातकों को अपने माता-पिता का सहयोग मिलेगा साथ ही पारिवारिक रिश्ते मजबूत होंगे इसके अलावा मान-सम्मान की प्राप्ति होगी तथा लम्बी यात्रा के योग बनेंगे। यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो इस गोचर के दौरान दाम्पत्य जीवन में बंधने का विचार कर सकते हैं इसके अलावा यह गोचर आपको समाज में एक अलग मुकाम प्रदान करने में सक्षम होगा तथा आप और आपके व्यवसायिक साझेदार एक दूसरे के साथ मिलकर अपने कार्य-व्यवसाय को मजबूती प्रदान करेंगे जिससे आपके व्यापार क्षेत्र में प्रगति होगी।

उपायः- शुक्रवार के दिन स्फटिक की माला से श्री महालक्ष्मी जी के मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।

मीन लग्न

मीन लग्न की कुण्डली में शुक्रदेव तृतीय तथा अष्टम भाव के स्वामी हैं। शुक्र का कुंभ राशि में गोचर आपकी कुण्डली के द्वादश भाव में होगा जिससे जातक को कुछ कठिनाइयों के बाद शुभ फल की प्राप्ति होगी। इस गोचर के दौरान आपको खुद की मेहनत से सफलता प्राप्त होगी तथा पैतृक सम्पत्ति की विरासत प्राप्त होने के प्रबल योग बनेंगे, इसके अलावा स्वास्थ्य समस्याएँ भी हो सकती हैं इसलिए अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान दें। शुक्र का यह गोचर आपके जीवन तथा कार्य-व्यवसाय में आ रही चुनौतियों को दूर करने में सहायक होगा। दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी आपसी तनाव दूर होगा तथा रिश्तों में आयी समस्याएँ दूर होंगी। यह गोचर आपके कलात्मक तथा रचनात्मक क्षमता में वृद्धि करायेगा परन्तु स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि होगी साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी होने के कारण कुछ समस्याएं अवश्य उत्पन्न हो सकती हैं जिससे स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होंगी। इस गोचर के दौरान आर्थिक क्षेत्रों में सुधार होगा तथा प्रेम जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास करें आपको उन क्षेत्रों में अवश्य सफलता प्राप्त होगी।

उपायः- गुरूवार के दिन विष्णु सहस्त्रनाम स्त्रोत का पाठ करें।