शुभ चौघड़िया मुहूर्त को ऐसे पहचानें

ज्योतिष शास्त्र में चौघड़िया को विशेष महत्व दिया गया है तथा वैदिक पंचाग का एक रूप माना जाता है। हम सभी ने कभी न कभी इस परिस्थिति का सामना अपने जीवनकाल में अवश्य किया होगा जब हमे किसी यात्रा पर जाना हो अथवा कोई शुभ काम करना हो इसके अलावा किसी नये काम का प्रारम्भ करना हो तो संयोग वश उस समय इन सभी कामों के लिए कोई शुभ मुहूर्त नही होता है अर्थात किसी शुभ मुहूर्त का निर्माण इस दौरान नही होता है और हमारा काम अत्यन्त आवश्यक होता है, ऐसे में चौघड़िया का उपयोग करके ही मुहूर्त देखने का विधान है जिससे आपके काम सफलता पूर्वक पूर्ण हो जायें।

आज हम जानेंगे कि चौघड़िया क्या है, इसकी गणना कैसे करें तथा हमारे जीवन में चौघड़िया का महत्व ?
चौघड़िया क्या है

वैदिक ज्योतिष के अनुसार चौघड़िया एक ऐसी सारणी है जो खगोलीय स्थिति के आधार पर बनायी जाती है इसमें दिन के 24 घंटों की दशा का वर्णन किया जाता है। इतना ही नहीं, आपको बता दें कि इसमे प्रत्येक दिन नक्षत्र, तिथि, योग एवं करण भी दिये होते हैं। इस सारणी में ग्रहों की स्थिति के आधार पर शुभ एवं अशुभ समयों को वर्गीकृत किया जाता है। इस शुभ और अशुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर दिन और रात्रि में विवाह समारोह, त्यौहारों आदि के लिए मुहूर्त निकाला जाता है।

चौघड़िया का महत्व

वैदिक हिन्दू पंचाग के अनुसार, चौघड़िया पंचाग का एक भाग है। चौघड़िया के सभी भाग दिन की तिथि और समय के आधार पर एक समान रूप से हानिकारक अथवा लाभप्रद हो सकते हैं। चौघड़िया कई प्रकार के गणनाओं पर आधारित होता है जिसमे दिवा के पहले चौघड़िया की गणना दिन के स्वामी ग्रह के द्वारा की जाती हैं और शक्ति की चौघड़िया रात्रि के स्वामी के आधार पर की जाती है।

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चौघड़िया की गणना विधि

चौघड़िया की गणना करने के लिए प्रत्येक दिन को दो भागों मे बांटा जाता है अर्थात दिन को दिन और रात्रि में विभाजित किया जाता है। दिन का काल सूर्योदय से सूर्यास्त तक तथा रात्रि का काल सूर्यास्त से सूर्योदय तक होता है। इसको विभाजित करने के बाद इन दोनों को पुनः आठ बराबर भागों में बाटा जाता है। इन आठ विभाजनों में से प्रत्येक चार भाग एक घड़ी के बराबर होता है और समय की यही गणना चौघड़िया कहलाती है।

चौघड़िया का उपयोग

चौघड़िया शुभ मुहुर्त के लिए उपयोग किया जाता है। यह एक प्राचीन उपाय है। दक्षिण भारत में चौघड़िया को गोवरी पंचांग कहा जाता है। भारत के पश्चिमी क्षेत्रों में चौघड़िया का उपयोग अधिक किया जाता है। जब किसी नये कार्य का आरम्भ करना हो, कोई भी मांगलिक कार्य हो, यात्रा करना हो तथा नये कार्य-व्यवसाय की शुरुआत करनी हो तो चौघड़िया का उपयोग किया जाता है।

चौघड़िया मुहूर्त

उद्वेगः-  उद्वेग चौघड़िया का प्रथम मुहूर्त है जिसका स्वामी ग्रह सूर्य है। यह घड़ी में प्रशासनिक कार्यों के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। अतः यदि आप कोई प्रशासनिक कार्य करना चाहते हैं तो इस मुहूर्त में करें।

लाभ:- लाभ चौघड़िया मुहूर्त का द्वितीय मुहूर्त हैं। जिसका स्वामी बुध ग्रह को माना जाता है। इस समय कार्य-व्यवसाय से जुड़ा काम करने से विशेष सफलता प्राप्त होता है।

चरः- चर मुहूर्त का स्वामी शुक्र ग्रह है। चौघड़िया में इसका स्थान तृतीय है। चर मुहूर्त में यात्रा और पर्यटन करना उत्तम माना जाता है।

रोगः- रोग मुहूर्त का स्वामी ग्रह मंगल है तथा चौघड़िया में इसका स्थान चौथा है। इस शुभ मुहूर्त में चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक होता है।

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शुभः- शुभ मुहूर्त का स्वामी ग्रह बृहस्पति ग्रह है। यह घड़ी सभी कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस चौघड़िया में विवाह, पूजा, यज्ञ करवाने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।

कालः- इस मुहूर्त में कोई भी शुभ काम नही किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस मुहूर्त में किसी भी कार्य को नहीं  किया जा सकता है। इस मुहूर्त का स्वामी शनि है। काल का संबंध सीधे अंत से जोड़ा गया है।

अमृतः- इस मुहूर्त का स्वामी चन्द्रमा है। अमृत मुहूर्त में किसी भी काम का अच्छा परिणाम मिलता है। यह चौघड़िया का अंतिम मुहूर्त है।

भारतीय ज्योतिष में वार वेला, काल वेला और कालरात्रि का समय अशुभ माना जाता है।