सावन के पहले सोमवार से जुड़ी विशेष जानकारी

हिन्दू धर्म में सावन के महीने को एक बहुत ही पवित्र महीना माना गया है। भगवान शिव जी की पूजा आराधना और कृपा दृष्टि पाने के लिए सावन का यह महीना बहुत ही ज्यादा फलदायी होता है। वैसे तो सावन में हर दिन शिव जी की पूजा करना खास होता है परन्तु सावन का सोमवार शिव जी को प्रसन्न करने के लिए बहुत ही ज्यादा खास होता है। तो आइए हम यह जानते हैं कि इस वर्ष सावन का प्रथम सोमवार कब पड़ा है।

कब है सावन का पहला सोमवार

इस वर्ष सावन 4 जुलाई से प्रारम्भ हो रहा है और पूरे 2 महीने के बाद 31 अगस्त को खत्म हो रहा है। इस वर्ष मलमास होने के कारण सावन 59 दिनों का पड़ रहा है यानि सभी भक्तों को भगवान शिव जी का व्रत करने और उनकी कृपा दृष्टि पाने के लिए पूरे 8 सोमवार प्राप्त होंगे जो कि एक बहुत ही ज्यादा शुभ योग माना गया है। आपको बता दें सावन का पहला सोमवार इस वर्ष 10 जुलाई को पड़ने वाला है और बाकी के अन्य सोमवार की तिथियाँ यहाँ बताई जा रही हैं। प्रथम सोमवार (10 जुलाई), द्वितीय सोमवार (17 जुलाई), तृतीय सोमवार (24 जुलाई), चतुर्थ सोमवार (31 जुलाई), पंचम सोमवार (7 अगस्त), षष्ठम् सोमवार (14 अगस्त), सप्तम सोमवार (21 अगस्त) और अष्टम सोमवार (28 अगस्त) हैं।

सावन के प्रथम सोमवार पर बन रहे हैं शुभ योग

जैसा की आपको पता है सावन के पहले सोमवार का व्रत इस बार 10 जुलाई को किया जायेगा, ऐसे में इस सोमवार वाले दिन ही रवि नामक एक सुन्दर और शुभ योग बन रहा है साथ ही प्रथम सोमवार के दिन पंचक काल भी समाप्त हो रहा है। इसके अलावा गुरु और चन्द्रमा के एक ही राशि में उपस्थित होने के कारण इस सावन गजकेसरी नामक शुभ योग भी बनता हुआ दिखाई दे रहा है जिससे कि सावन का महत्व और ज्यादा दुगुना बढ़ गया है।

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सावन माह में मिलेगी शिव और विष्णु जी की कृपा

इस बार सावन के मलमास या पुरुषोत्तम मास होने के कारण यह एक महीने का नही पूरे 2 महीने का होने वाला है इसके साथ ही पुरुषोत्तम मास के स्वामी श्री हरि और शिव जी हैं और यह महीना दोनों की ही कृपा दृष्टि पाने के लिए बहुत शुभ संयोग है। जो की शिव जी के सभी भक्तों के लिए बेहद ही खास है। इस बार शिव जी के सभी भक्त दो माह का सावन होने के कारण बहुत ज्यादा प्रसन्न हैं। इसके अलावा इस बार माँ मंगला गौरी के व्रत की संख्या नौ हो गई है साथ ही एकादशी व्रत की संख्या भी इस बार 4 हो गई है।

सावन के सोमवार का महत्व

☸ मान्यता के अनुसार सावन के सोमवार का व्रत रखने का अत्यधिक महत्व माना जाता है। यह व्रत कुवारी स्त्रियाँ एक अच्छा वर पाने और विवाहित स्त्रियां अपने जीवन में खुशहाली और सुख-समृद्धि लाने के लिए करती हैं। आपको बता दें इस समय भगवान शिव जी की किये जाने वाली सच्चे मन से पूजा-अर्चना से भगवान शिव जी जल्द ही प्रसन्न होते हैं साथ ही हमारी कुण्डली में स्थित ग्रह नक्षत्रों के स्वामी होने के कारण भगवान शिव हमारी कुण्डली में होने वाले सभी दोष हमेशा के लिए दूर कर देते हैं।

☸ इस दिन की मान्यता के अनुसार भगवान शिव जी सावन के महीने में ही स्वर्ग लोक से धरती पर अपने ससुराल गये थे, वहाँ पर पहुँचते ही भगवान शिव जी का स्वागत पूरे जोरो शोरों तथा पवित्र जल से जलाभिषेक और अघ्र्य देकर किया गया था। इसलिए सावन के महीने में शिव जी के भक्त भी व्रत रहकर शिव जी की कृपा दृष्टि प्राप्त करते हैं।

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☸ यदि आपकी कुण्डली में विवाह के योग नही बन पा रहे या विवाह होने में बहुत सारी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं तो सोमवार का व्रत अवश्य रखना चाहिए। इसके अलावा यदि धन से सम्बन्धित कोई समस्या उत्पन्न हो रही है या धन की कमी महसूस हो रही है तो सावन के सोमवार के दिन शमी के पेड़ का जड़ शिवलिंग पर अर्पित करें और उसे अपनी तिजोरी में लाकर रख दें। ऐसा करने से आर्थिक कष्ट हमेशा के लिए दूर हो जायेंगे।

सावन के पहले सोमवार पर पूजा शुभ मुहूर्त व विधि

☸ सावन के सोमवार का व्रत शिव जी के सभी भक्तों के द्वारा ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दिन के तीसरे प्रहर यानि सायंकाल तक रखा जाता है। इस दिन व्रत करने वाले शिव जी के सभी भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान ध्यान से निवृत होकर और अपने हाथ में अक्षत लेकर संकल्प करना चाहिए। इसके बाद मंदिर जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, जल, बेलपत्र, सुपारी, फूल, फल, भाँग, धतूरा आदि पूजा की चीजें भगवान शिव जी को अर्पित कर भोग अवश्य लगायें उसके बाद शिव जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। मान्यता के अनुसार सोमवार के व्रत के पूजा के दौरान सावन की कथा सुनना बहुत ही ज्यादा अनिवार्य माना जाता है। पूरे मन से कथा सुनने के बाद शिव जी के मंत्रों का जाप करें और मंत्र जाप करते हुए शिव जी की आरती करें। इस तरह से विधि-विधान से की गई पूजा सावन के प्रत्येक सोमवार को करना शुभ फलदायी माना जाता है। आपकी पूरी पूजा विधिपूर्वक सम्पन्न हो जाने के बाद आप फलाहार भोजन कर सकते हैं।

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☸ सावन के पहले सोमवार पर शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम के 5 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक ही रहेगा। शाम के समय शिव जी की पूजा के दौरान शिव जी का रुद्राभिषेक करने से शिव जी अत्यधिक प्रसन्न होते हैं साथ ही शिव जी अपने सभी भक्तों के कष्ट जल्द ही दूर कर देते हैं।