संकष्ठी चतुर्थीः- 13 सितम्बर

संकष्ठी चतुर्थी हिन्दू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्यों को करने से पहले भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। गणेश भगवान को सभी देवताओं में सर्वप्रिय माना जाता है तथा उन्हें बुद्धि विवेक और बल का देवता भी माना जाता है। संकष्ठी चतुर्थी का व्रत अत्यधिक प्रचलित व्रत है। संकष्ठी चतुर्थी का अर्थ होता है संकट हरने वाला। इस दिन व्यक्ति अपने सभी प्रकार के दुःखो से मुक्ति पाने के लिए व्रत रखता है और गणेश जी की पूजा अर्चना करता है। इस दिन भक्त सूर्योदय के समय से लेकर चन्द्रमा के उदय होने तक उपवास रखते है तथा विधि-विधान से पूजा अर्चना करते है। संकष्ठी चतुर्थी का व्रत सभी संकटों को हरने वाला होता है। इसलिए इसे संकटा चौथ भी कहते है।

संकष्ठी चतुर्थी पूजा की विधि

☸ इस दिन सर्वप्रथम गणेश जी का अभिषेक करें तथा उसके बाद मोदक या लड्डूओं का भोग लगायें। साथ ही दुर्वा भी अर्पित करे।
☸ इसके बाद गणेश चालीसा और संकट चौथ के व्रत का पाठ करें।
☸ इस दिन संतान की सुरक्षा एवं परिवार की खुशी के लिए गणेश जी से प्रार्थना करें।
☸ पूजा के अंत मे गणेश जी की आरती करें एवं दिनभर फलाहार करते हुए भगवत भजन करें।
☸ इसके बाद रात्रि के समय चन्द्रमा को जल चढ़ाए एवं पूजा अर्चना करें एवं इसके बाद पारण करें।

संकष्ठी चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त

संकष्ठी चतुर्थी तिथि प्रारम्भः- 13 सितम्बर 2022 को दोपहर 01ः27 से
संकष्ठी चतुर्थी तिथि समापनः- 14 सितम्बर 2022 को प्रातः 10ः49 तक

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