06 फरवरी 2024 षट्तिला एकादशी

षट्तिला एकादशी की बात करें तो यह त्योहार भगवान श्री विष्णु जी का अत्यधिक प्रिय त्योहार होता है यह प्रत्येक माह में 2 बार आता है एक शुक्ल पक्ष दूसरा कृष्ण पक्ष में और पूरे एक वर्ष में 24 एकादशी तिथि आती है,जिस वर्ष मे अधिकमास होता है उस वर्ष एकादशी तिथि कम होकर 26 हो जाती हैं। एकादशी का व्रत माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है जिसे षट्तिला एकादशी कहा जाता है इस एकादशी के व्रत से जातक के सभी पापो का नाश हो जाता है।

एकादशी तिथि की पूजा में तिल का विशेष महत्व बताया गया है, आपको बता दें इस एकादशी वाले दिन 6 प्रकार के तिलों का उपयोग किया जाता है इनमें तिल से स्नान करना, तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन करना, तिल से तर्पण करना, तिल का भोजन करना तथा तिलों के दान करने का विशेष महत्व होता है इसलिए इसे षट्तिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन तिल का अधिक से अधिक उपयोग करने से जातक को उसके पुण्य फलों की प्राप्ति होती है तथा जातक को भगवान श्री विष्णु जी की कृपा से स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है।

षट्तिला एकादशी पूजा विधि

षट्तिला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तिल के तेल से मालिश करें, तिल का उबटन लगायें तथा नहाने के पानी में तिल डालकर स्नान करें।

सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए जल में तिल डालकर अर्घ्य दें और एकादशी व्रत का संकल्प लें, पूरे दिन तिल मिश्रित पानी का ही सेवन करें।

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शुभ मुहूर्त में मंदिर की साफ-सफाई करके चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और चाँदी या ताँबे के पात्र में विष्णु जी की मूर्ति रखकर तिल से स्नान कराएं तथा उन्हें पीतांबरी, पीले फूल, वस्त्र, हल्दी और चंदन अर्पित करें।

विष्णु जी को काला तिल समर्पित करते हुए ओम नमो भगवते वासुदेवाय इन मंत्रो की एक माला का जाप करें। तिल, गुड़ और घी से बनी मिठाई में तुलसी का पत्ता डालकर भोग अर्पित करें।

उसके बाद दीपक जलाकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें अंत में हवन और आरती करके व्रत पूर्ण करें। ब्राह्मण को तिल युक्त भोजन कराकर रात्रि में भजन कीर्तन करें और अगले दिन पूजा में चढ़ाई गई तिल की मिठाई खाकर ही व्रत खोलें।

षट्तिला एकादशी शुभ मुहूर्त

षट्तिला एकादशी 06 फरवरी 2024 को मंगलवार के दिन मनाया जायेगा।
एकादशी तिथि प्रारम्भः- 05 फरवरी 2024 शाम 05ः24 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्तः- 06 फरवरी 2024 शाम 04ः07 मिनट तक