10 मई से 1 जुलाई सबसे खतरनाक, मेष से मीन लग्न वाले जातकों पर क्या रहेगा प्रभाव | May 10 to July 1 is the most dangerous, what will be the effect on people having Aries to Pisces ascendant |

10 मई के बाद 1 जुलाई तक का जो पूरा समय है वह बहुत ही खतरनाक समय हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि नैसर्गिक रुप से जो शुभ ग्रह है वो पीड़ित रहेंगे। देवगुरु बृहस्पति जहाँ गुरु चाण्डाल दोष बनायेंगे वहीं पर मंगल नीच के होंगे और उस पर शुभ ग्रह शुक्र के साथ वह युति करेंगे। देवगुरु बृहस्पति यहाँ राहु और शनि के कारण पीड़ित रहेंगे साथ ही 17 जून से जो शनि की वक्र दृष्टि पड़ेगी इसके कारण और भी बहुत सी परेशानियाँ उत्पन्न होंगी। इसके पहले भी इस तरह के योग बने थे जिसके कारण बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था ठीक वैसी ही स्थिति इस वर्ष के मई से लेकर जुलाई माह में देखने को मिल रही है। 1000 वर्ष पुरानी घटनाओं को देखने के बाद इस वर्ष मेष से लेकर मीन लग्न वाले जातकों पर इसका क्या प्रभाव पड़ने वाला हैं इसकी जानकारी हमारे योग्य ज्योतिषाचार्य के. एम. सिन्हा जी के द्वारा किये गये विश्लेषणों से समझते है।

मेष से मीन लग्न वाले जातकों पर क्या होगा प्रभाव
मेष लग्न

मेष लग्न वाले जातकों की बात करें तो मेष लग्न में जो परिवर्तन हो रहा है साथ ही कुण्डली में जो गोचर बन रहा है वह आपके लग्न में गुरु चाण्डाल दोष, शनि की वक्र दृष्टि और आपके चतुर्थ भाव में मंगल देव नीच के और नैसर्गिक रुप से शुभ ग्रह यानि शुक्र को दूषित करेंगे तो ऐसी स्थिति में जातक को मानसिक तनाव बहुत तेजी से बढ़ेगा, सिर में दर्द अकस्मात बढ़ जायेगा इसके अलावा जिनको माइग्रेन की समस्या है उनकी यह समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है। चेहरे पर पिंपल और तनाव की स्थिति ज्यादा बढ़ सकती है। इसके अलावा माता के स्वास्थ्य को लेकर मंगल नीच के रहेंगे जिससे उनके स्वास्थ्य में परेशानियाँ बढ़ेंगी, नई सम्पत्ति में किसी प्रकार का निवेश करने से बचना चाहिए अन्यथा अत्यधिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। कार्य-व्यवसाय से सम्बन्धित जो आपका लग्नेश उच्च दृष्टि डालेगा तो वहाँ पर कार्य-व्यवसाय से सम्बन्धित अच्छे परिणाम मिलेंगे लेकिन गोचर के हर तरीके से खराब रहने के कारण आपको कुछ उपाय अवश्य कर लेना चाहिए।

उपायः- मेष लग्न वाले जातकों को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए या फिर ओम सोमाय नमः या ओम चंद्राय नमः का आपको जाप करना चाहिए। इसके अलावा हरे रंग की चीजों का दान करना चाहिए, गौ माता की सेवा करनी चाहिए। ऐसा करने से जो परिस्थितियाँ रहेंगी वह काफी हद तक आपके पक्ष में रहेंगी।

वृषभ लग्न

वृषभ लग्न वाले जातकों की बात करें तो आपकी कुण्डली में जो गुरु चाण्डाल योग बन रहा है आपके लग्न से द्वादश भाव में बन रहा है और जो मंगल रहेंगे वह अपने कारक भाव में ही नीच के हो जायेंगे तो ऐसी स्थिति में इसका जो परिणाम रहेगा, उससे छोटे भाई-बहनों को मानसिक तनाव तथा वाद-विवाद होेने की भी संभावना होगी। विदेश में कोई कार्य फॅसे रह सकते हैं। न्यायिक क्षेत्रों से जुड़े हुए लोगों को सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। वृषभ लग्न के जिन जातकों को श्वास नली या अस्थमा सम्बन्धी संक्रमण हैं उन्हें बहुत सी परेशानियों को झेलना पड़ सकता है। शेयर, सट्टा, लाॅटरी में एक बड़ा नुकसान होने के कारण मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। इसलिए इससे बिल्कुल दूर रहने की जरुरत है। इन खतरनाक परिस्थितियों में वृषभ लग्न के जातक को बचना चाहिए।

उपायः- वृषभ लग्न वाले जातकों को इन खतरनाक परिस्थितियों में शुक्र का बीज मंत्र ओम द्रां द्रीं दौं सः शुक्राय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें इसके अलावा कालें और नीले रंग के वस्त्रों को पहनने से बचें। ऐसा करना लाभदायक रहेगा।

मिथुन लग्न

मिथुन लग्न वाले जातकों की बात करें तो इनकी कुण्डली में जो गोचर बन रहा है कुण्डली के एकादश भाव में शनि की नीच और वक्र दृष्टि पड़ेगी साथ में जो मंगल रहेंगे आपके वाणी और परिवार के स्थान पर यह नीच राशि में रहेंगे तो निश्चित रुप से इस समय अकस्मात दुर्घटना होने की संभावना हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि नीच के मंगल की दृष्टि जो रहेगी वह आपकी आयु पर पड़ेगी। अनुसंधान में सफलता मिलने की संभावना रहेगी। इस समय बड़े भाई-बहनों का स्वास्थ्य खराब हो सकता है। शरीर के बाये हिस्से में चोट लगने की संभावना रहेगी।

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उपायः- मिथुन लग्न वाले जातकों को इन परिस्थितियों में  10 मई से लेकर 1 मई तक प्रतिदिन गणेश जी की आराधना करनी चाहिए। इसके अलावा बुध का बीज मंत्र ओम ब्रां ब्री बौं सः बुधाय नमः का जाप करना चाहिए। अगर हो सके तो बुधवार का उपवास रखना आपके लिए लाभदायक रहेगा।

कर्क लग्न

कर्क लग्न वाले जातकों की बात करें तो आपकी कुण्डली में इस समय आपका लग्न और दशम भाव प्रभावित हो रहा है। प्रथम भाव जहाँ पर मंगल नीच अभिलाषी रहेंगे और साथ में दशम भाव जहां पर पहले से ही गुरु चाण्डाल योग बना हुआ है साथ ही शनि की वक्र नीच दृष्टि भी पड़ने लगेगी ऐसे में इस समय कार्य-व्यवसाय में और ज्यादा कठिनाइयाँ बढ़ने लगेंगी। स्थान परिवर्तन होने के योग बनेंगे। किसी कार्य में अत्यधिक परिश्रम के बाद ही आपको सफल परिणाम मिलेंगे। लग्न पर मंगल की नीच दृष्टि होने के कारण क्रोध की स्थिति उत्पन्न होगी। व्यापारी जातकों को सफलता मिलेगी नये समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए सही समय है। जीवनसाथी का पूरा-पूरा सहयोग मिलेगा लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में नीच के मंगल होने के कारण सिर में चोट लगना तथा वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

उपायः- कर्क लग्न वाले जातकों को इन खतरनाक परिस्थितियों में चन्द्र का बीज मंत्र ओम श्राम श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः का जाप करना चाहिए साथ ही मन में किसी प्रकार के नकारात्मक विचारों को लाने से बचना चाहिए।

सिंह लग्न

सिंह लग्न वाले जातकों की बात करें तो इनकी कुण्डली में दो भाव पहला तो कुण्डली का नवम त्रिकोण भाव जहां पर शनि की नीच दृष्टि रहेगी और दूसरा कुण्डली का द्वादश भाव जो की यात्रा और अस्पताल का भाव होता है वहां पर मंगल ग्रह नीच के हो जायेंगे। मंगल यहा अत्यन्त योगकारक होंगे इस समय विशेष रुप से शेयर, सट्टा, लाॅटरी में नुकसान होगा। बहुत लम्बे समय तक के लिए रीढ़ की हड्डी में दर्द रहेगा साथ ही पिता के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करेंगे। इसके अलावा विदेशों से भी काफी मेहनत के बाद काम बनेगा। न्यायिक क्षेत्रों में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। विद्यार्थी वर्गों के लिए यह समय अच्छा रहेगा। कई प्रकार के रिसर्च और डेवलपमेंट से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय अच्छा रहेगा।

उपायः- सिंह लग्न वाले जातकों को इन बुरी परिस्थितियों से छुटकारा पाने के लिए सूर्य देव के बीज मंत्र ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का जाप करना चाहिए साथ ही सूर्य देव की आराधना करके उन्हें जल चढ़ाना चाहिए।

कन्या लग्न

कन्या लग्न वाले जातकों की बात करें तो इनकी कुण्डली में आयु पर ही गुरु चाण्डाल दोष बन रहा है शनि की वक्र नीच दृष्टि कुण्डली के छठवे भाव में बैठकर देखना ऐसी स्थिति में जातक को किसी प्रकार का बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए इस समय किसी भी प्रकार का निवेश करने से बचना चाहिए। कोई महत्वपूर्ण कागज पर हस्ताक्षर करने से पहले एक बार अवश्य देख समझ लेना चाहिए। इसके अलावा कन्या लग्न वाले जातकों का एकादश भाव भी प्रभावित रहेगा जिसके कारण आपके भाई-बहनों में वाद-विवाद की संभावना बढ़ सकती है। इस समय आपका दिमाग गरम रहेगा जिसके कारण क्रोध की स्थिति उत्पन्न होगी। बायें हाथ या शरीर के बायें हिस्से में चोट लगने की संभावना रहेगी।

उपायः- कन्या लग्न वाले जातकों को इन बुरी परिस्थितियों में बुध का बीज मंत्र ओम ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः का जाप करना चाहिए साथ ही गणेश भगवान की आराधना करके प्रार्थना करना चाहिए की यह कठिन समय जल्द ही बीत जाएं।

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तुला लग्न

तुला लग्न वाले जातकों की बात करें तो इनकी कुण्डली में जो गोचर बन रहा है जिसके कारण आपका सप्तम स्थान और दशम स्थान प्रभावित हो रहा है तो ऐसी स्थिति में किसी प्रकार का नया व्यापार करना आपके लिए लाभदायक नही होगा विशेष रुप से यदि किसी के साथ साझेदारी में काम कर रहे हैं तो यह आपके लिए बिल्कुल भी अच्छा नही होगा। यदि इस समय नया व्यापार आरम्भ करने की सोच रहे हैं तो अपनी कुण्डली का विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिषी से एक बार अवश्य करवा लेना चाहिए उसके बाद ही किसी प्रकार का निर्णय लेना चाहिए। जीवनसाथी को लेकर तनाव की स्थिति रहेगी। केवल विद्यार्थी जातकों को इस समय गहन अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा। आपकी कुण्डली का दशम भाव दूषित हो रहा है मंगल अपने परम नीच राशि में रहेंगे जिसके कारण कार्यस्थल पर कठिनाइयों का अनुभव आप करेंगे। आपको ऐसा कुछ प्रतीत होगा की काम का बोझ आप पर बढ़ाया जा रहा है, किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न हो रहा है जिसके कारण आपको अपना नौकरी छोड़ने या नौकरी परिवर्तन करने की भावना मन में आ सकती है परन्तु आपको बता दें इस समय नौकरी परिवर्तन करना या नौकरी छोड़ना आपके लिए सही नही रहेगा। आपको अपने काम को बहुत ईमानदारी पूर्वक करते रहना चाहिए साथ ही किसी प्राॅपर्टी में निवेश करना आपके लिए अत्यधिक लाभदायक रहेगा। माता का सहयोग मिलेगा और यदि आप राजनीतिक क्षेत्र में है तो जनता का भी सहयोग आपको पूरा मिलेगा।

उपायः- तुला लग्न के जातकों को इस कठिन परिस्थिति में शुक्र का बीज मंत्र करना चाहिए ओम द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः साथ ही नारंगी रंग की वस्तुओं का दान करना आपके लिए अत्यधिक लाभदायक रहेगा।

वृश्चिक लग्न

वृश्चिक लग्न वाले जातकों की बात करें तो 10 मई से लेकर 1 जुलाई तक सबसे ज्यादा आपका नवम भाव प्रभावित होता है जो कि पिता का भाव है, धर्म का भाव है, छोटी-मोटी यात्राओं का भाव है, भाग्य का भाव है। इसके साथ-साथ वृश्चिक लग्न के जातकों का छठवाँ भाव भी प्रभावित हो रहा है यहाँ पर देखा जाए तो आपका षष्ठम भाव प्रभावित होना आपके लिए लाभदायक रहने वाला है क्योंकि आपके रोग-ऋण-शत्रु पूरी तरह से खत्म होंगे साथ ही न्यायिक मामलों में आपको सफल परिणाम भी मिल सकते हैं। इसलिए कुण्डली का छठवाँ भाव प्रभावित होना आपके लिए अच्छा रहेगा परन्तु आपके नवम भाव में मंगल नीच के रहेंगे, पहला तो आपका लग्नेश आपके पराक्रम भाव पर उच्च की दृष्टि भी डालेंगे जिसके कारण अत्यधिक मेहनत करने के बाद आपको सफलता मिलेगी। धार्मिक क्षेत्रों में यात्रा करना आपके लिए बहुत कष्टप्रद रहेगा, अचानक से किसी प्रकार का दुर्घटना होना, गंभीर चोट लगना हो सकता है इसलिए धार्मिक यात्रा से जितना हो सके दूर रहें।

उपायः- वृश्चिक लग्न वाले जातकों को गणेश जी की आराधना करनी चाहिए जिससे आपके सारे काम बनेंगे साथ ही प्रत्येक मंगलवार को बजरंग बाण का पाठ करना आपके लिए उत्तम रहेगा।

धनु लग्न

धनु लग्न वाले जातकों की बात करें तो खतरनाक परिस्थिति में जो क्षेत्र प्रभावित हो रहा है वह आपकी आयु का आपके मस्तिष्क का है यानि कुण्डली का पंचम भाव, कुण्डली के पंचम भाव से शिक्षा भी देखा जाता है, संतान, उदर भाग तथा मस्तिष्क के ऊपरी भाग को भी देखा जाता है तो इस समय आपकी कुण्डली का पंचम भाव पूरी तरह से दूषित रहेगा जिसके कारण यह स्थिति आपके लिए सबसे खतरनाक रहेगी। इस समय आपको मानसिक पीड़ा उत्पन्न हो जायेगी। अकस्मात अवसाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है साथ ही मन में किसी प्रकार का भय बना रह सकता है। इसके अलावा मस्तिष्क पर मंगल के सवार होने के कारण निश्चित रुप से दुर्घटना के योग बन सकते हैं। आपकी आयु पर वक्र शनि की नीच दृष्टि पड़ने के कारण किसी प्रकार का अस्पताल पर खर्च बढ़ सकता है साथ ही किसी प्रकार का बड़ा नुकसान हो सकता है।

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उपायः- धनु लग्न वाले जातकों के लिए योगा और प्राणायाम करना लाभदायक रहेगा, साथ ही गुरु के बीज मंत्र ओम ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः का बीज मंत्र या फिर ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करना लाभदायक रहेगा।

मकर लग्न

मकर लग्न वाले जातकों की बात करें तो इस समय आपकी कुण्डली का सप्तम भाव और चतुर्थ भाव पीड़ित रहेगा। सप्तम भाव देखा जाए तो आपके जीवनसाथी का भाव है, नये व्यापार पर हस्ताक्षर करने का भाव है, दैनिक रोजगार का भाव होता है इसके अलावा कुण्डली का चतुर्थ भाव सुख स्थान तथा माता के स्थान का भाव होता है। इस समय यह दोनों भाव ही पीड़ित अवस्था में रहेंगे तो निश्चित रुप से माता के स्वास्थ्य में गिरावट उत्पन्न होंगी। सम्पत्ति से सम्बन्धित किसी भी प्रकार का काम इस समय न करें क्योंकि सम्पत्ति का कारक मंगल ग्रह भी दूषित हो रहे हैं। कुल मिलाकर मकर लग्न वाले जातकों के लिए यह समय कठिनाइयों से भरा हो सकता है। सीने में संक्रमण किसी कारणवश फैल सकता है साथ ही फेफड़े में भी संक्रमण बढ़ने की संभावना है। इसलिए इस समय आप अपने स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल सचेत रहें।

उपायः- मकर लग्न वाले जातकों को अपने जन्म स्थान से दूर रहना चाहिए अन्यथा शनि का बीज मंत्र ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः का जाप करना चाहिए और यदि यह उपाय भी न हो पायें तो गणेश जी की श्रद्धापूर्वक आराधना करनी चाहिए ऐसा करने से नकारात्मकता में कमी आयेगी।

कुंभ लग्न

कुंभ लग्न वाले जातकों की बात करें तो इस समय आपकी कुण्डली में दो भाव पीड़ित अवस्था में रहेंगे। कुण्डली का तृतीय भाव जहां पर शनि की नीच दृष्टि और वक्र दृष्टि पड़ेगी और दूसरा आपकी कुण्डली का षष्ठम भाव जहाँ मंगल ग्रह नीच राशि के हो जायेंगे तो ऐसी स्थिति में निश्चित रुप से अकस्मात दुर्घटना होने के योग बनेंगे इसके अलावा किसी का मुकदमा चल रहा है या फिर न्यायिक मामलों में सम्बन्ध रखे हुए हैं तो उसमें आपको सफलता नही मिलेगी जिसके कारण आप और ज्यादा चिंतित हो सकते है। इस समय आपके विदेश जाने के योग बनेंगे। जिसके कारण लम्बी दूरी की यात्रा करने के कारण आपके कई कार्यों के बनने की संभावना रहेगी। जिनको श्वास नली की परेशानी है साथ ही अस्थमा और किसी प्रकार का संक्रमण है तो उनके लिए यह समय बिल्कुल भी अच्छा नही है।

उपायः- कुंभ लग्न वाले जातकों को इस अवधि के दौरान सफेद रंग की वस्तुओं या वस्त्रों को धारण नही करना चाहिए। इसके अलावा गणेश जी की आराधना करें जिससे की यह खराब समय जल्द से जल्द खत्म हो जाए।

मीन लग्न

मीन लग्न वाले जातकों की बात करें तो इनकी कुण्डली में लग्न से द्वितीय भाव यानि परिवार और वाणी का भाव पीड़ित रहेगा इसके अलावा कुण्डली का पंचम भाव दोनो ही पीड़ित रहने वाले है तो कुण्डली के द्वितीय भाव में शनि की नीच दृष्टि पड़ने के कारण परिवार में वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न होना साथ ही परिवार के लोगों से किसी कारणवश दूर होने जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। कार्य-व्यवसाय में स्थान परिवर्तन होने के कारण भी जन्म स्थान से दूर होना पड़ सकता है। इसके अलावा कुण्डली का पंचम स्थान भी पीड़ित होने के कारण संतान से कोई बुरी खबर मिलना, संतान को किसी प्रकार का कष्ट पहुँचना जिसके कारण आपका भी मानसिक तनाव बढ़ जाने जैसी संभावना बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहें अन्यथा उदर से सम्बन्धित समस्या उत्पन्न हो सकती है।

उपायः- मीन लग्न वाले जातकों को गुरु के बीज मंत्र ओम ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः का जाप करना चाहिए साथ ही मन में नकारात्मक विचारों को आने से रोकना चाहिए।