14 मार्च 2024 मीन संक्रान्ति

मीन संक्रांति के बारे में बात की जाए तो सूर्यदेव जब कभी भी कुंभ सारी से निकलकर गुरु की राशि मीन में प्रवेश करते हैं तो प्रवेश करने की ही इस अवस्था को सूर्य की मीन संक्रांति कहा जाता है। आपको बता दें मीन संक्रांति को हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। हिन्दू धर्म के कैलेण्डर के अनुसार मीन संक्रांति का दिन ही वर्ष का अंतिम दिन माना जाता है।

ज्योतिषशास्त्र में मीन संक्रांति का खास महत्व होता है। सूर्यदेव का जब-जब धनु एवं मीन राशि में परिभ्रमण होता है तब या धनु और मीन संक्रांति होती है तो वह मलमास कहलाती है। मान्यता के अनुसार इस दौरान सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। मीन संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन लोग जरुरतमंदों को खाने पीने की वस्तुएं और जरूरत की वस्तुओं का दान करते हैं। इस दिन गंगा, यमुना आदि पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य करने के साथ-साथ सूर्यदेव की आराधना करने की भी मान्यता होती है।

मीन संक्रांति पूजा विधि

☸ मीन संक्रांति के दिन मान्यता के अनुसार मीन संक्रांति के पवित्र अवसर पर पवित्र नदियों में गंगा, यमुना, में स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। संभव हो तो इस दिन मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करें।

☸ पूजा के दौरान धूप, दीप, फल, फूल, मिष्ठान इत्यादि चढ़ाकर भगवान सूर्यदेव की पूजा अर्चना करनी चाहिए।

☸ सूर्यदेव की पूजा अर्चना हो जाने के बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र इत्यादि का दान करना चाहिए।

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☸ इसके अलावा सूर्यदेव की पूजा के दौरान वैदिक मंत्रों का जाप करना चाहिए। इसके अलावा मीन संक्रांति के दिन सूर्यदेव के आदित्य ह्रदय स्रोत का पाठ अवश्य करना चाहिए।

मीन संक्रांति शुभ मुहूर्त

मीन संक्रांति पुण्य कालः- 14 मार्च 2024 दोपहर 12ः46 मिनट से शाम 06ः29 मिनट तक।
अवधि 5 घण्टा 43 मिनट।
मीन संक्रांति महा पुण्य कालः- दोपहर 12ः46 मिनट से दोपहर 02ः46 मिनट तक।
अवधि 2 घण्टे 00 मिनट।