15 जनवरी 2024 उत्तरायण

उत्तरायण की बात करें तो यह एक हिन्दी शब्द होता है जिसका अर्थ है उत्तर की ओर वास्तव में उत्तरायण को उत्तर दिशा में सूर्यदेव के जाने का समय कहते हैं। जो ग्रीष्म ऋतु से शीतकाल के ऋतु जोड़ता है। इस दौरान सूर्यदेव दक्षिणी गोलार्द्ध से उत्तरी गोलार्द्ध की ओर जाते है। अतः उत्तरायण के इस दिन को सूर्य पूजा और मकर संक्रांति के रुप में मनाया जाता है और सूर्य देव से आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

उत्तरायण या मकर संक्रांति दोनो ही पर्व शास्त्रों के अनुसार मकर राशि में प्रवेश होने की खुशी में ही मनाया जाता है। देखा जाये तो यह पर्व पूरे भारत वर्ष में अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
सूर्य देव के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने के दौरान ही उत्तरायण शुरू हो जाता है। ज्योतिष काल में उत्तरायण को बहुत ही ज्यादा शुभ काल माना जाता है।

क्या होता है उत्तरायण

हमारे ब्रह्माण्ड में स्थित पृथ्वी पर सूर्य की दो स्थितियाँ होती है उत्तरायण और दक्षिणायन, अतः जब कभी भी सूर्य उत्तर दिशा की ओर मकर राशि से मिथुन राशि की ओर भ्रमण करता है तो इस स्थिति को ही उत्तरायण कहते हैं। आपको बता दें उत्तरायण होने के दौरान दिन बड़ा हो जाता है और रातें छोटी हो जाती हैं।

इसके अलावा जब सूर्य दक्षिण दिशा की ओर कर्क राशि से धनु राशि तक भ्रमण करता है तो ऐसी स्थिति दक्षिणायन कही जाती है। दक्षिणायन होने के दौरान दिन छोटा होता है और रातें बड़ी हो जाती है। अतः उत्तरायण और दक्षिणायन की दोनो ही अवधि पूरे 6-6 माह की होती है।

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उत्तरायण का महत्व

शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण के महत्वों की बात करें तो उत्तरायण को प्रकाश का समय माना गया है। इसके अलावा इसे देवताओं का काल भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार इस समय सभी देवताओं की शक्तियाँ काफी ज्यादा बढ़ जाती है। प्रभु श्री कृष्ण ने गीता में प्रभु श्री कृष्ण के महत्व को बताते हुए कहा कि जो जातक उत्तरायण के दौरान दिन के उजाले में और अपने प्राण त्यागते हैं तो वह बार-बार जन्म और मरण के चक्र से हटे शुक्ल पक्ष के लिए मुक्त हो जाते हैं साथ ही उन्हें मोक्ष की भी प्राप्ति होती है।