15 जून 2022ः सूर्य का राशि परिवर्तन, प्रत्येक लग्न पर प्रभाव

मेष लग्नः- मेष लग्न की कुण्डली मे सूर्य पंचम का मालिक होता है और यह लग्न से तृतीय भाव मे गोचर करने जा रहा है। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह अच्छा परिणाम लेकर आएगा। निसंतान जोडो को इस समय बच्चे से सम्बन्धित शुभ समाचार मिल सकते है। विद्यार्थियो को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। धन सम्बन्धी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सूर्य देव आपका आलस बढा सकते है किंतु आपको मेहनत से पीछे नही हटना चाहिए। अकस्मात यात्रांए आपको करनी पड़ सकती है। रिश्तेदार और भाई-बहन आपके हित के लिए कार्य करेंगे। अविवाहित जातको के विवाह मे और विलम्ब हो सकता है।
उपायः- आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करे। सूर्यदेव को जल दें।
वृषभ लग्नः- वृषभ लग्न की कुण्डली मे सूर्य चतुर्थ भाव का मालिक होता है और यह लग्न से द्वितीय भाव मे गोचर करने जा रहा है। सूर्य वाणी पर जाकर बैठेगा जिसकी वजह से आपकी वाणी उग्र होगी और आपको विवादो से बचना चाहिए। आपकी बातो में अहंकार साफ दिखेगा इसलिए विनम्र तरीके से बात करने का प्रयास करे। मंगल और सूर्य की युति के कारण धन हानि के योग बन रहे है। सुख प्राप्ति के लिए धन कमान का प्रयास करेंगे किन्तु आपको विवेक से काम लेना चाहिए। वाद विवाद से आता हुआ धन भी चला जाएगा। भूमि, वाहन और मकान का काम इस समय ना करें।
उपायः- सूर्य को जल दें।
मिथुन लग्नः- मिथुन लग्न की कुण्डली मे सूर्य तृतीय भाव का मालिक होता है और यह लग्न मे गोचर करने जा रहा है। छोटे भाई-बहनो की समस्याओं को आप अपने सर ले लेंगे जिसके चलते आप विवादो मे भी फँस सकते है। वार्तालाप करते समय आपको सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि इस समय आप सीधा और स्पष्ट तरीके से बोलेंगे। साझेदारी मे इस समय काम करने से बचे। शरीर मे अहंकार का प्रवेश हो सकता है किन्तु आप अपने आप को शांत रखने का प्रयास करे।
उपायः- बुध का बीज मंत्र करें। आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करें।
कर्क लग्नः- कर्क लग्न की कुण्डली मे सूर्य द्वितीय भाव का मालिक होता है और यह लग्न से द्वादश भाव मे गोचर करने जा रहा है। विदेशो या आनलाइन कार्य से आपको लाभ मिलेगा किन्तु धन की हानि भी हो सकती है। शेयर, सट्टा और लाॅटरी से दूरी बनाकर रखें। सूर्य देव यहाँ रोग, कर्ज और दुश्मनी को खत्म करेंगे लेकिन परिवार से दूरी भी हो सकती है। आप यात्राओं मे व्यस्त रहेंगे जिससे आपको लाभ होगा।
उपायः- शिव जी की पूजा करें।
सिंह लग्नः- सिंह लग्न की कुण्डली मे सूर्य लग्नेश होता है और यह आपके लग्न से एकादश भाव मे गोचर करने जा रहे है। लग्नेश का आय के घर मे उपस्थित होना उत्तम है किंतु यहाँ से उनकी सातवीं दृष्टि पंचम भाव मे पड़ेगी जो कि शिक्षा और संतान का है तो सूर्य यहाॅ बच्चो से कुछ विवाद उत्पन्न करा सकते है। प्रेम प्रसंग मे भी कुछ खटास आ सकती है किन्तु आय से सम्बन्धित शुभ फल ही देंगे। आपको किसी से भी शालीनता से बात करनी चाहिए। नौकरी से सम्बन्धित स्थान परिवर्तन हो सकता है।
उपायः- आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करे।
कन्या लग्नः- कन्या लग्न की कुण्डली मे सूर्य द्वादश भाव के मालिक होते है और यह आपके लग्न से दशम भाव मे गोचर करने जा रहे है। सूर्य देव दशम भाव मे दिशाबली हो जाते है और यह कन्या लग्न वाले जातको के सर्वश्रेष्ठ रहने वाला है। ऐसे जातक जो विदेशो से काम करते है या विदेश मे रहकर काम करते है उनके लिए यह गोचर शुभ फल देने वाला है। माता के स्वास्थ्य मे कुछ गिरावट आ सकती है और जिसकी वजह से आप भी मानसिक परेशानियों से घिरे रहेंगे।
उपायः- प्रतिदिन सूर्यदेव को जल दें। आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करें।
तुला लग्नः- तुला लग्न की कुण्डली मे सूर्य एकादश भाव के मालिक होते है और यह आपके नवम भाव मे गोचर करने जा रहे है। आय का मालिक सामान्यतः अगर भाग्य स्थान पर जाए तो शुभ फल देता है किन्तु इस समय आप आलस्य महसूस करेंगे। आपको यह सलाह दी जाती है कि आप मित्र और रिश्तेदारों से सावधान रहें। आँख बंद करके किसी पर भी भरोसा करने से बचें। किसी गंभीर समस्या मे बडे भाई-बहनो का परामर्श जरुर लें। शेयर, सट्टा और लाॅटरी से इस माह लाभ हो सकता है।
उपायः- सूर्य के प्रातः दर्शन अवश्य करें।
वृश्चिक लग्नः- वृश्चिक लग्न की कुण्डली मे सूर्य दशम भाव के मालिक होते है और यह आपके लग्न से अष्टम भाव मे गोचर करने जा रहे है। कार्य और व्यवसाय मे कुछ ना कुछ रुकावटें और परेशानी लगी रहेंगी। परिवार मे वाद-विवाद हो सकता है या आप उनसे दूर भी जा सकते है। इस समय आपकी वाणी पर सीधा असर पडेगा और आप एकदम सीधा बोंलेगे जिससे रिश्तो मे मनमुटाव भी हो सकता है। अगर किसी जातक को किडनी व लीवर से सम्बन्धित परेशानी है वो बढ़ सकती है।
उपायः- सूर्य को नियमित रुप से जल दें। हनुमान जी की आराधना करें।
धनु लग्नः- धनु लग्न की कुण्डली मे सूर्य देव नवम भाव के मालिक होते है और यह आपके लग्न से सप्तम स्थान मे गोचर कर रहे है। जीवनसाथी से वाद-विवाद और मनमुटाव उत्पन्न हो सकता है। साझेदारी मे काम करने के लिए यह समय ठीक नही है। इस समय आप अत्यधिक क्रोधित और अहंकारी हो जाएंगे। जीवनसाथी के भाग्य से आपको लाभ होगा। विवादो को शांत तरीके से सुलझाने का प्रयास करे।
उपायः- आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करे। विष्णु जी की आराधना करें।
मकर लग्नः- मकर लग्न की कुण्डली मे सूर्य अष्टम का मालिक होता है और यह आपके लग्न से छठे भाव मे गोचर करने जा रहा है। सूर्य देव यहाँ मारक ग्रह है किन्तु यह अच्छा परिणाम देंगे और रोग और शत्रुओ को खत्म करेंगे। अकस्मात यात्रा के योग बनते हुए नजर आ रहे है। संचार के माध्यम से कुछ लाभ भी हो सकता है।
उपायः- शनि का बीज मंत्र करें।
कुंभ लग्नः- कुंभ लग्न मे सूर्य सप्तम का मालिक होता है और यह आपके लग्न से पंचम मे गोचर करने जा रहा है। जीवनसाथी के साथ वाद-विवाद की स्थिति बन रही है और साथ ही संतान के स्वास्थ्य मे कुछ हानि भी हो सकती है। गर्भवती स्त्रियों के गर्भ हानि के भी पूर्णतः योग बन रहे है। गुस्से से बात करने के चलते आपको मानसिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है इसलिए अपने दिमाग को शांत रखने की कोशिश करें
उपायः- शनि का बीज मंत्र करें। लाल रंग के वस्तुओं का दान करें।
मीन लग्नः- मीन लग्न मे सूर्य छठे भाव के मालिक होते है और यह आपके लग्न से चतुर्थ भाव मे गोचर कर रहे है। जमीन से जुड़ा कोई भी काम आप इस समय नही कर सकते अन्यथा आपका नुकसान ही होगा। गुप्त शत्रु बढ सकते है और माता के स्वास्थ्य में गिरावट नजर आ रही है। नौकरी और कार्य के लिहाज से गोचर शुभ है, गुस्से से दूर रहें।
उपायः- गुरु के बीज मंत्र का जाप करें।

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