24 फरवरी 2024 गुरु रविदास जयन्ती

गुरु रविदास जयन्ती की बात करें तो यह जयन्ती प्रत्येक वर्ष माघ माह की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु रविदास जयन्ती मनायी जाती है। आपको बता दें गुरु रविदास जयन्ती और साथ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन की मान्यता के अनुसार यह कहा जाता है कि गुरू रविदास जी ने अपने दोहे के माध्यम से ही समाप्त में ऊँच-नीच के भेद का खंडन किया था। कहा जाता है कि रविदास जी की भक्ति भाव से प्रभावित होकर कृष्ण जी की भक्त मीरा बाई ने अध्यात्म का मार्ग अपनाया था। संत रविदास जी की जयन्ती पर देश के विभिन्न हिस्सों में कई कार्यक्रम, यात्राएं और कीर्तन आयोजित किये जाते हैं।

संत रविदास जी की जीवनी

संत रविदास जी का जन्म स्थान माघ मास की पूर्णिमा तिथि को सांवत 1388 को हुआ था। इन्हें संत रविदास, गुरु रविदास, रैदास, रुहिदास तथा रोहिदास जैसे अन्य कई नामों से भी जाना जाता है। रविदास जी के पिता का नाम राहू तथा माता का नाम करमा था। इसके अलावा इनकी पत्नी का नाम लोना बताया जाता है। कहा जाता है कि संत रविदास जी एक समाज सुधारक होने के साथ ही बहुत धार्मिक स्वभाव के भी थे। रविदास जी के बारे में एक खास बात यह है कि यह भक्ति में लीन होने तथा एक बहुत ही अच्छे समाज सुधारक होने के साथ-साथ इन्होंने अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यों को भी बहुत अच्छे से निभाया था। रविदास जी ने सभी लोगों को भेदभाव से दूर रहने और प्रेम और सद्भाव फैलाने की भी शिक्षा दी थी जो कि आज भी समाज में लोगो के लिए एक मार्गदर्शन का काम करती है।

संत रविदास जी का स्वभाव

रविदास जी शुरू से ही एक सच्चे दिल के और बहुत ही धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति थे। रावदास जी को उनकी ही जाति के लोग भी आगे बढ़ने से रोकते रहते थे। उस समय सभी शूद्र और ब्राह्मण लोग रविदास जी को ब्राह्मण की तरह तिलक लगाने और जनेऊ पहनने से रोकते थे। तभी रविदास जी इस बात का खंडन करते हुए कहते थे कि सभी इंसान को इस धरती पर समान अधिकार है और कोई भी व्यक्ति स्वतंत्र रूप से जो मर्जी चाहे कर सकता है। उसी समय से गुरु रविदास जी ने वो हर काम करना शुरू कर दिया जो नीच जाति के लिए मनाही थी। रविदास जी ने उसी समय से माथे पर तिलक लगाना, धोती तथा जनेऊ इत्यादि सब पहनना शुरू कर दिया। वहाँ उपस्थित सभी ब्राह्मण उनकी की जाने वाली गतिविधियों से खिलाफ थे। तभी ब्राह्मण लोगो ने वहां के राजा से रविदास जी की शिकायत कर दी।

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रविदास जी ने सभी को बड़े प्यार से जवाब देते हुए राजा के सामने यह बात कही कि इस धरती पर जितने भी लोग है चाहे वह शूद्र हो या ब्राह्मण उनके पास भी दिल, लाल खून और बाकियों की तरह भी समान अधिकार है। रविदास जी ने उसी समय भरी सभा के सामने अपनी छाती को चीर दिया और सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग की तरह चार युगों के लिए सोना, चाँदी, कपास और कपास से जनेऊ बना दिया।

वहाँ स्थित राजा के साथ सभी लोग शर्मिंदा हो गये और रविदास जी के पैर छूकर उन्हें गुरु कहकर सम्मानित किया। राजा को अपनी कही गई बातों पर बहुत पछतावा हुआ और उन्होंने रविदास जी से उसी क्षण माफी माँगी उसके बाद रविदास जी ने उस राजा को माफ करते हुए कहा की जनेऊ पहन लेने से किसी को भगवान नहीं मिल जाते है उन्होंने यह भी कहा की यह आप सभी लोगों को वास्तविकता और सच्चाई दिखाने के लिए ही केवल इन सभी गतिविधि में शामिल किया गया है।

यह कहते ही रविदास जी ने जनेऊ उतार कर राजा के हाथ में दे दिया और उसके बाद उन्होंने कभी उस जनेऊ को नाहि धारण किया और जाहि कभी माथे पर तिलक लगाया इस तरह से रविदास जी ने लोगों के मन से ऊंच नीच के भेद भाव को त्याग दिया।

गुरु रविदास जी के कहे जाने वाले कुछ अनमोल तथ्य

गुरु रविदास जी ने अपने समय से लोगों के अन्दर भरी हुई दूसरों के प्रति गलत या ऊँच नीच की भावना को दूर करने और समाज में सभी लोगों को एक समान अधिकार देने के लिए अपने शब्दों में कुछ विशेष तथ्य बताये थे जो यहाँ बताये गये है।

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संत रविदास जी ने कहा-

ब्राह्मण मत पूजिए जो होते गुणहीन,
पूजिए चरण चंडाल के जो होवे गुण प्रवीन।।

उन्होंने अपने वचन में यह कहा कि किसी का भी पूजन केवल इसलिए नहीं करना चाहिए क्योंकि वह उच्च कुल का या ऊँचे पद पर है। बल्कि इन सभी लोगों के जगह यदि कोई ऐसा व्यक्ति है जो किसी उच्च पद पर तो नहीं परन्तु गुणवान है तो उसकी पूजा श्रद्धापूर्वक अवश्य करना चाहिए।

करम बंधन में बन्ध रहियों, फल की न तज्जियो आस
कर्म मानुष का धर्म है, सत् भारवै रविदास।।

रविदास जी कहते हैं कि हमें हमेशा अपने कर्मों में लगे रहना चाहिए और कभी भी उसके मिलने वाले फल की आशा नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि कर्म हमारा व्यक्ति धर्म है तो इसका फल पाना हमारा अधिकार।

मन ही पूजा, मन ही धूप,
मन ही सेऊं सहज स्वरूप।।

रविदास जी कहते है कि सभी लोगों के मन में भगवान हमेशा पास करते हैं। इसलिए यदि आपके मन में किसी के भी प्रति कोई बैर भाव, कोई लालच या कोई द्वेष नही हैं तो आपका मन ही भगवान का पवित्र मंदिर और उसमें जलने वाला दीपक और धूप है।

रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच,
नकर कूं नीच करि डारी है, ओहे करम की कीच।।

संत रविदास जी अपने शब्दों में कहते है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी जाति में जन्म लेने के कारण नीचा या छोटा नही होता है। बल्कि उस व्यक्ति के कर्मों के कारण ही वह निम्न वर्ग का बन जाता है इसलिए सभी व्यक्ति चाहे वह छोटा हो या बड़ा सबको अपने कर्मों पर सदैव ध्यान देना चाहिए।

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कह रविदास तेरी भगति दूरी है, भाग बड़े सो पावै ।
तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै।।

रविदास जी कहते हैं कि ईश्वर की भक्ति जातक को अपने भाग्य से प्राप्त होती है। यदि कोई व्यक्ति अपने अन्दर अभिमान को जन्म नहीं देता है तो उस व्यक्ति का जीवन हमेशा सफल होता है। ठीक वैसे ही जैसे एक छोटी सी चींटी, शक्कर के दाने को बीन सकती है लेकिन एक विशाल हाथी ऐसा कभी नहीं कर सकता है।

गुरु रविदास जयन्ती पूर्णिमा तिथि शुभ मुहूर्त

गुरु रविदास जयन्ती 24 फरवरी 2024 को शनिवार के दिन मनायाी जायेगी
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भः- 23 फरवरी 2024 दोपहर 03ः33मिनट से।
पूर्णिमा तिथि समाप्तः- 24 फरवरी 2024 शाम 05ः59 मिनट तक।