24 फरवरी 2024 ललिता जयन्ती

दस महाविद्याओं में से एक माँ ललिता देवी का यह पर्व प्रत्येक वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार माँ ललिता देवी को दस महाविद्याओं में से तीसरी महाविद्या के रूप मे माना जाता है। इसके अलावा माँ ललिता देवी को राजराजेश्वरी, तथा माँ त्रिपुर सुंदरी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माँ ललिता की पूजा पूरे विधि-विधान से करने से माँ ललिता प्रसन्न होती हैं तथा व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि तथा आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। इस दिन माँ ललिता की पूजा करने से जातक जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है साथ ही सभी भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माँ ललिता ने भांडा नामक राक्षस को मारने के लिए ही इस पृथ्वी पर अवतार लिया था। राक्षस भांडा कामदेव के शरीर के राख से उत्पन्न होता है। इस जयंती के दिन सभी भक्त षोडशोपचार विधि से मां ललिता देवी के साथ-साथ स्कंदमाता और भगवान शिव शंकर की पूजा-अर्चना करते थे।

ललिता जयन्ती पूजा विधि

☸ ललिता जयन्ती का व्रत करने के लिए इस दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सफेद वस्त्र धारण करना चाहिए।

☸ उसके बाद गंगाजल छिड़ककर उत्तर की ओर पीठ करके बैठ जाना चाहिए और एक साफ तख्ते पर स्वच्छ सफेद वस्त्र बिछाना चाहिए।

☸ उसके बाद उस तख्ते पर माँ ललिता की मूर्ति या उनकी तस्वीर लगानी चाहिए और यदि तस्वीर न हो तो श्री यंत्र स्थापित करके उसकी भी पूजा कर सकते हैं।

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☸ माँ ललिता की विधिपूर्वक पूजा कर लेने के बाद माँ को फल और अक्षत चढ़ाएं और दूध से बने प्रसाद का भोग लगायें ।

☸ उसके बाद ओम ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरा सुंदरीयै नमः मंत्र का उच्चारण करें।

☸ माँ ललिता देवी की कथा सुनें और फिर धूप दीप से आरती कर लेने के बाद सफेद खीर का भोग लगायें।

☸ उसके बाद किसी बड़ी अनजाने में हुई गलती के लिए माँ से क्षमा माँगें और प्रसाद ग्रहण करें।

☸ 9 वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को प्रसाद देना अत्यधिक लाभदायक होता है और यदि इन कन्याओं को प्रसाद देना संभव न हो तो आप यह प्रसाद गाय को भी खिला सकते हैं।

ललिता जयंती शुभ मुहूर्त

ललिता जयंती 24 फरवरी 2024 को शनिवार के दिन मनायी जायेगी।