400 वर्षों तक बर्फ में दबा रहा केदारनाथ | Kedarnath |

कब होगा केदारनाथ लुप्त

कई पौराणिक मान्यताओं एवं भविष्यवाणियों के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में व्याप्त तीर्थ लुप्त हो जायेंगे क्योंकि माना जाता है जिस दिन नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जायेंगे उस दिन बद्रीनाथ का मार्ग पूर्ण रुप से बन्द हो जायेगा। जिसके कारण भक्त यहाँ दर्शन के लिए नही आ पायेंगे। जब बद्रीनाथ और केदारेश्वरम धाम लुप्त हो जायेंगे तो कई वर्षों के पश्चात भविष्य बद्री नामक नये तीर्थस्थल का उद्गम होगा।

400 वर्षों तक मंदिर में दबा रहा रहस्य

वर्तमान समय में स्थित केदारेश्वर मंदिर सर्वप्रथम पांडवों ने बनवाया था परन्तु बढ़ते समय के साथ यह मंदिर विलुप्त हो गया। उसके बाद 8 वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने एक नये मंदिर की स्थापना करायी जो 400 वर्षों तक बर्फ में ढका रहा उस समय मंदिर का निर्माण 508 ईसा पूर्व जन्में और 476 ईसा पूर्व देहत्याग गए आदि शंकराचार्य ने करवाया था। इस मंदिर के पीेछे उनकी समाधि है।

चार सौ वर्षों तक यह मंदिर बर्फ में दबा रहा परन्तु जब बर्फ से बाहर निकला तो पूरी तरह सुरक्षित था। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह माना जाता है कि केदारनाथ मंदिर जहां स्थित है वहा चारों ओर ग्लेशियर है तथा ग्लेशियरों के लगातार पिघलते और चट्टानो के खिसकते रहने के कारण यहाँ पर जल प्रलय एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं के आने की संभावना अधिक रहती है।

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कैसे हुई केदार नाथ में शिवलिंग की उत्पत्ति

एक पौराणिक कथा के अनुसार हिमालाय के केदार चोटी पर भगवान विष्णु के अवतार महा तपस्वी नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थें उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिया और उनके प्रार्थना के अनुसार ज्योतिर्लिंग के रुप में सदा वहां पास रहने का वरदान दिया। यह स्थान पर्वत राज हिमालय के केदार धाम नाम चोटी पर स्थित है तथा केदार घाटी में दो पहाड़ी है जिसमें एक का नाम नर तथा दूसरें का नाम नारायण पर्वत है। दूसरी ओर बद्रीनाथ धाम है जहां भगवान विष्णु विश्राम करत है। कहा जाता है कि सतयुग में बद्रीनाथ धाम की स्थापना स्वयं नारायण ने की थी।

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