Hanuman Jayanti, इस वर्ष दुर्लभ योग में मनाया जायेगा हनुमान जयंती का यह पर्व

देखा जाए तो चैत्र मास में ऐसे कई त्योहार मनाये जाते हैं जिनका हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है अतः इन्हीं त्योहारों में से सबसे महत्वपूर्ण पर्व हनुमान जयन्ती का होता है। यह त्योहार प्रत्येक वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन हनुमान जी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि हनुमान जी भगवान शिव जी के ग्यारहवें अवतार थे। हनुमान जी को कलयुग के देवता के रूप में भी जाना जाता है।

Hanuman Jayanti (हनुमान जयंती) by Astrologer K.M. Sinha 

हनुमान जयंती का महत्व

हनुमान जयन्ती के दिन हनुमान जी की पूजा तथा उपवास रखने का अत्यधिक महत्व होता है। इस दिन की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं साथ ही जातक की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। इस दिन हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है साथ ही जातक को अन्न और धन की भी प्राप्ति होती है, इसके अलावा हनुमान जयन्ती के दिन हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ भी करने का विशेष महत्व होता है। इनका विधिपूर्वक पाठ करने से हनुमान जी जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं, साथ ही सभी भक्तों को अपना आशीर्वाद देते हैं।

हिन्दू धर्म में हनुमान जी को चिरंजीवी माना जाता है। शनिदेव के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए भी हनुमान जी की पूजा आराधना करनी चाहिए, इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि इस पृथ्वी पर भगवान श्री राम जी की पूजा जहाँ कहीं भी होती है वहाँ हनुमान जी सदैव मौजूद रहते हैं।

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आइए जानें ज्योतिषाचार्य के.एम.सिन्हा द्वारा ?

हनुमान जयंती की पौराणिक कथा

हनुमान जयंती की पौराणिक कथा के अनुसार लंका युद्ध के दौरान, हनुमान जी ने वानर सेना के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे प्रभु श्री राम जी के नाम का संदेश लेकर लंका में माता सीता के पास गए इसके बाद हनुमान जी ने पूरी वानर सेना सहित श्री राम जी के आदेश के अनुसार लंका पर जीत हासिल की और वहाँ से प्रभु श्री राम और माता सीता को हमेशा के लिए मुक्ति दिलाई। लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद हनुमान जी राम जी की भक्ति में लग गये और इस प्रकार सभी भक्तों के लिए हनुमान जीअत्यधिक महत्वपूर्ण बन गये।

भगवान हनुमान जी का जन्म अंजनेरी पर्वत पर हुआ था। इनके पिता केसरी बृहस्पतिदेव के पुत्र थे साथ ही सुमेरु के राजा थे। हनुमान जी की माता अंजना एक अप्सरा थी जो इस पृथ्वी पर रहने के लिए अभिशप्त थी। उन्होंने शिव जी की तीव्र प्रार्थना तथा कठोर तपस्या की उनकी यह तपस्या पूरे 12 वर्ष तक चली, उसके बाद हनुमान जी को जन्म देने के बाद उनका अभिशाप समाप्त हो गया। हनुमान जी को शिव जी का अवतार या प्रतिबिंब माना जाता है साथ ही उन्हें वायुपुत्र भी कहा जाता है।

हनुमान जी का जन्म 58 हजार 112 वर्ष पहले त्रेतायुग के अन्तिम चरण में चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन मंगलवार को चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6ः03 मिनट पर भारत में झारखण्ड राज्य के गुमला जिले के आंजन नाम के एक छोटे से पहाड़ी गाँव के एक गुफा में हुआ था।

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चित्रा नक्षत्र और वज्र योग में मनेगा हनुमान जयंती का यह पर्व

देखा जाये तो हनुमान जी का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि के दौरान चित्रा नक्षत्र तथा मेष लग्न के योग में हुआ था ऐसे में इस वर्ष 2024 में हनुमान जयंती का यह जन्मोत्सव 23 अप्रैल 2024 को मनाया जा रहा है। कुण्डली में वज्र योग का निर्माण भी 23 अप्रैल 2024 से 24 अप्रैल 2024 तक प्रातः 04ः57 मिनट तक हो रहा है, इसके अलावा चित्रा नक्षत्र भी 23 अप्रैल प्रातः से लेकर रात्रि 10ः32 मिनट तक है।

यहाँ चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव हैं और हनुमान जी का सबसे प्रिय दिन भी मंगलवार को माना जाता है। इसके अलावा वज्र योग जातक के साहस, बल तथा पराक्रम का परिचायक माना जाता है, ऐसे में चित्रा नक्षत्र तथा वज्र योग के निर्माण में हनुमान जी का जन्मोत्सव यानि हनुमान जयंती मनाना विशेष फलदायी होगा। इस तरह के बने हुए योग में हनुमान जी की पूजा आराधना करने से भक्तों को कई गुना फल की प्राप्ति होती है।

हनुमान जयंती पूजा विधि

☸ हनुमान जयंती की पूजा शुरू करने से पहले एक बात का विशेष ध्यान रखें कि जब भी आप पूजा की शुरुआत करें सदैव हनुमान जी के साथ-साथ प्रभु श्री राम और माता सीता की भी पूजा करें ऐसा करने से हनुमान जी अत्यधिक प्रसन्न होते हैं और प्रसन्न होकर आपकी पूजा स्वीकार करते हैं।

☸ प्रातः काल जल्दी उठकर शुभ मुहूर्त में स्नानादि करके पवित्र हो जाएं।

☸ उसके बाद हनुमान जी की पूजा करने के लिए पूजा स्थान को अच्छे से साफ-सुथरा करके एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

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☸ उसके बाद लाल या पीले सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर हनुमान जी को तिलक लगायें उसके बाद उन्हें गेंदे के फूल की माला पहनाएं।

☸ तत्पश्चात माता सीता, प्रभु श्री राम और हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाकर भगवान के नाम का स्मरण करें।

☸ हनुमान जयंती के दिन भोग में बूंदी के लड्डू अवश्य चढ़ायें।

☸ उसके बाद हनुमान जी के सुन्दरकाण्ड का पाठ करें साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।

☸ पाठ समाप्त हो जाने के बाद हनुमान जी, श्री राम और माता सीता की आरती करें।

☸ उसके बाद पूरी भक्ति और श्रद्धा से हनुमान जी को नमन करके पूजा के दौरान हुए भूल-चूक के लिए क्षमा माँगे।

हनुमान जयंती शुभ मुहूर्त

23 अप्रैल 2024 मंगलवार के दिन हनुमान जयंती मनायी जायेगी।
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भः- 23 अप्रैल 2024 प्रातः 03ः25 मिनट से।
पूर्णिमा तिथि समाप्तः- 24 अप्रैल 2024 प्रातः 05ः18 मिनट पर ।