Jhulelal Jayanti, झूलेलाल जयंती 09 अप्रैल 2024

झूलेलाल जयंती की बात करें तो यह सिंधी समुदाय के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है जिन्हें इष्टदेव के नाम से भी जाना जाता है। झूलेलाल जयंती को सिंधी समुदायों के द्वारा अत्यधिक शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन से सिंधी लोगों का एक नया वर्ष माना जाता है और इस कैलेण्डर के अनुसार हर एक नया महीना नये चाँद के साथ शुरू होता है इसलिए सिंधी समुदायों के द्वारा इसे चेटी चंड भी कहा जाता है।

झूलेलाल जयंती की विशेषता

कहा जाता है कि इस सृष्टि पर जब भी कोई न कोई अत्याचार बढ़ा है तब-तब भगवान में उन अत्याचारों का अंत करने के लिए इस सृष्टि पर अलग-अलग अवतारों में जन्म लिया है। हमारी सृष्टि को हर तरह के दुखों और कष्टों से बचाने के लिए कई भगवान और साधू संतों ने जन्म लिया है और इस पूरी सृष्टि को सही और गलत का फर्क समझाया है। इन्हीं कई अवतारों में से एक अवतार भगवान झूलेलाल जी का भी है। यह भगवान वरूण के एक अवतार हैं जिन्हें सिंधियों का इष्ट देवता कहा जाता है।

भगवान झूलेलाल का जन्म 10 वीं शताब्दी के आस-पास हुआ था इन्हें जल के देवता का अवतार माना जाता था। सिंध में ही भगवान झूलेलाल का जन्म हुआ था।

भगवान झूलेलाल जी का जन्म

भगवान झूलेलाल जयंती के जन्म की बात करें तो आकाशवाणी के दो दिन बाद चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में नासरपुर में रहने वाले देवकी और ताराचन्द के यहाँ एक बेटे ने जन्म लिया जिनका नाम उदयचंद रखा गया। उदयचंद बड़ा होकर कम आयु में ही हिन्दू सिंधी समाज का रक्षक बना जिसने मिरक शाह जैसे शैतान का अंत कर लिया। उन्होंने अपने नाम को चरितार्थ करते हुए सभी हिन्दूओं के जीवन से अंधकार मिटाकर उनके जीवन में उजियाला फैला दिया।

सर्वप्रथम उदयचंद जी को भगवान का रूप नही समझा गया परन्तु वे अपने जन्म के समय से ही अत्यधिक चमत्कार करने लगे, उनके माता-पिता ने उदयचन्द के जन्म के बाद उनके मुख के अन्दर पूरी सिन्धु नदी को देखा जिसमें पालो नाम की एक मछली भी तैर रही थी यह देखकर वह हैरान रह गये तब से उदयचन्द जी को भी भगवान झूलेलाल माना जाने लगा। बहुत से सिंधी समुदाय के लोग उन पर विश्वास करके उन्हें भगवान का रूप मानते थें तथा कुछ लोग उन्हें अमरलाल भी कहते थे।

बाल्यावस्था में भगवान झूलेलाल जी को झूला बहुत पसंद था हर समय वह झूले पर ही विश्राम किया करते थे जिसके कारण उनका नाम झूलेलाल पड़ गया। उनकी माता उन्हें प्यार से झुल्लन बुलाती थी। उदयचंद जी की माता का देहान्त बचपन में ही हो गया था जब वह बहुत छोटी उम्र के थें।

झूलेलाल जयंती का इतिहास

झूलेलाल जयंती के इतिहास के बारे में बात करें तो सिंध में सबसे पहले एक हिन्दू राजा का शासन हुआ करता था। राजा को मोहम्मद बिन कासिम ने हरा दिया था। उसके बाद सिंध की गद्दी पर मुस्लिम राजा का राज हुआ उसके बाद चारों ओर इस्लाम का राज बढ़ता गया। उन लोगों का यह मानना था कि यदि दुनिया में इस्लाम बढ़ेगा तो जन्नम यहीं बन जायेगी। उसके बाद सभी इस्लामों ने हिन्दूओं पर जुल्म करना शुरू कर दिया। उन लोगों के द्वारा हिन्दूओं से यह कहा गया कि तुम्हें इस्लाम अपनाना होगा नही तो उन्हें मार दिया जायेगा।

यह सुनते ही सिंध के सभी हिन्दू भारतीय बहुत घबरा गये। उसी समय सभी हिन्दूओं को सिन्धु नदी के पास इकट्ठा होने के लिए बुलावा भेजा गया। वहाँ इकट्ठा होकर सभी हिन्दूओं ने जल देवता की उपासना और प्रार्थना की हमारी इस विपदाओं में मदद करें लगातार 40 दिनों तक उन हिन्दूओं के द्वारा तप करने के कारण भगवान वरूण प्रसन्न हो गये और उन्होंने प्रसन्न होकर आकाशवाणी के द्वारा यह बताया कि नासरपुर में देवकी और ताराचन्द के यहाँ पर जन्म लेने वाला बालक ही आप सभी हिन्दू वासियों का रक्षक बनेगा।

चेटीचंड उत्सव क्या है

चेटीचंड भी सिंधियों के द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। प्रतिवर्ष यह त्योहार शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन मनाया जाता है। ज्यादातर यह पर्व गुड़ी पड़वा के अगले दिन ही पड़ता है पाकिस्तानी सिन्धी भी इस पर्व को अत्यधिक उत्साह से मनाते हैं। इस दिन की विशेष बात यह है कि चांद कई दिनों के बाद एकदम पूरा नजर आता है। इस दिन जलदेव की आराधना भी की जाती है। चेटीचंड का यह त्योहार भी हिन्दू समाज के द्वारा भगवान झूलेलाल की याद में ही मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान कई तरह के सांस्कृतिक आयोजन किये जाते हैं, जुलूस निकाल जाते हैं साथ ही प्रसाद के रूप में इस दिन काला उबला चना और मीठा भात भी वितरित किया जाता है।

झूलेलाल (चेटीचंड) शुभ मुहूर्त

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भः- 08 अप्रैल 2024 को रात्रि 11ः50 मिनट से,
प्रतिपदा तिथि समाप्तः- 09 अप्रैल 2024 को रात्रि 08ः30 मिनट तक।