Magh Gupt Navratri, माघ गुप्त नवरात्रि 2024

हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार बात करें नवरात्रि कि तो एक वर्ष में चार नवरात्रियाँ मनाई जाती है जो कि माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन से पड़ता है। इस नवरात्रियों में से वसंत या शारदीय नवरात्रि को प्रत्यक्ष और बाकी शेष नवरात्रियों को गुप्त नवरात्रि की श्रेणी में रखा जाता है। अन्य महीनो में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि को इसलिए गुप्त नवरात्रि कहा जाता है क्योंकि इनमें गुप्त अर्थात छिपी हुई विद्याओं की साधना होती है। वर्ष में पड़ने वाली प्रत्यक्ष नवरात्रियों में सभी भक्तों के द्वारा सात्विक साधना, नृत्य और उत्सव मनाया जाता है। वहीं जब गुप्त नवरात्रि की बात आती है तो इस नवरात्रि में तांत्रिक साधना और कठिन व्रत का अत्यधिक महत्व होता है।

माघ गुप्त नवरात्रि नौ दिनों की एक अवधि है जो माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना करने के लिए समर्पित होता है। यह नवरात्रि का त्योहार माघ माह के शुक्ल पक्ष की तिथि से अगले नौ दिनों तक मनाया जाता है। माघ गुप्त नवरात्रि बहुत कम लोगों के द्वारा ही मनाई जाती हैं माघ गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से भारत के उत्तरी राज्यो, हिमांचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड तथा उत्तर प्रदेश में मनायी जाती है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान इन नौ देवियों की पूजा अर्चना की जाती है जो निम्न है काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला इन दसों महाविद्याओं का पूजन करना अत्यधिक लाभदायक माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि का इतिहास

इस नवरात्रि को हिन्दूओं के लिए आस्था का परीक्षा माना जाता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस नवरात्रि के दौरान देवी की पूजा-अर्चना करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है। प्राचीन लोगों की मान्यता के अनुसार इस नवरात्रि को नौ रात्रों का रहस्य भी कहते हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान मंदिर में अखंड ज्योति जलाई जाती है जो कि दिन और रात दोनो समय ही जुलती है। इस गुप्त नवरात्रि मे माँ के 18 रूपों की प्रार्थना प्राचीन समय से ही करने की परंपरा होती है। माँ दुर्गा की इस नवरात्रि का त्योहार ऋतु परिवर्तन होने के समय ही आता है। वर्ष मे आने वाली नवरात्रि में तीन-तीन माह का अंतर होता है। दो सामान्य नवरात्रों में हम माता रानी के 9 रूपों की पूजा करते हैं परन्तु गुप्त नवरात्रि के दौरान माता रानी के 10 महाविद्याओं की पूजा अर्चना की जाती है। इसके पीछे भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी प्राचीन कथा भी प्रचलित है।

गुप्त नवरात्रि पूजा विधि

☸ गुप्त नवरात्रि के प्रारम्भ में पूजा के प्रथम दिन हिन्दू धर्म के सभी लोग सूर्योदय के समय उठकर जल्दी स्नान करके पूजा स्थान को साफ-सुथरा करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं।

☸ उसके बाद गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों के लिए कलश स्थापना की जाती है।

☸ उसके बाद माँ दुर्गा की एक मूर्ति को लाल कपड़े में रखकर सिंदूर, चावल, रंगीन पुष्प, धूप और अगरबत्ती से पूजा-अर्चना की जाती है।

☸ माँ दुर्गा के सभी भक्त देवी को चुनरी चढ़ाते हैं और बिन्दी और वस्त्र चढ़ाकर मंत्रो का जाप करते हैं।

☸ माँ दुर्गा की पूजा करते समय दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करना चाहिए तथा माँ दुर्गा की सुबह और शाम आरती अवश्य करनी चाहिए।

☸ इसके अलावा माँ दुर्गा की पूजा करते समय सुबह और शाम के समय लौंग और बताशा का भोग लगा सकते हैं। एक बात का विशेष ध्यान रखें माँ दुर्गा की पूजा के दौरान आक, मदार, दूब और तुलसी का प्रयोग बिल्कुल भी नही करना चाहिए तथा पूरे 9 दिन तक अपना खान-पान सात्विक ही रखें।

☸ 9 दिनों तक चलने वाले इस गुप्त नवरात्रि के दौरान सभी भक्त बहुत ही कठिन उपवास रखते हैं। आपको बता दें इस व्रत का पालन करने वाले भक्त माँ दुर्गा की पूजा समाप्त हो जाने तथा एक ब्रह्मण को भोजन कराने के बाद ही एक समय में भोजन या फलाहार कर सकते हैं।

☸ माघ गुप्त नवरात्रि में पूजा के दौरान 108 बार का दुर्गा मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए ऐसा करने से माँ का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहता है।

माघ नवरात्रि शुभ मुहूर्त

माघ नवरात्रि 10 फरवरी 2024 को शनिवार के दिन से प्रारम्भ होगा।।
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भः- 10 फरवरी 2024 सुबह 04ः28 मिनट से,
प्रतिपदा तिथि समाप्तः- 11 फरवरी 2024 प्रातः 12ः47 मिनट तक।
घटस्थापना मुहूर्तः- 10 फरवरी 2024 सुबह 08ः45 मिनट से,
सुबह 10ः10 मिनट तक।