रत्न धारण का ज्योतिषीय आधार कर्क लग्न के लिए

माणिकः कर्क लग्न मे सूर्य धन का मालिक होता है साथ ही लग्नेश का मित्र भी है। अतः कर्क लग्न के जातकों को धन हानि की परेशानी या आंखो की समस्याओं के दौरान ही माणिक धारण करना चाहिए। कुण्डली के द्वितीय भाव मारक भाव की संज्ञा दी जाती है। इसलिए यह मारक भी होता है। अतः माणिक को मोती के साथ पहनना शुभ हेागा।

मोतीः कर्क लग्न के जातकों की कुण्डली मे चन्द्रमा लग्नेश होता है। अतः इनको मोती धारण करना शुभ रहता है। फलस्वरुप आय मे वृद्धि होगी तथा स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। धन सम्बन्धित परेशानियों से आपकी रक्षा करेगा। मोती को शुद्धता विनम्रता एवं पवित्रता की संज्ञा दी जाती है।
मूंगाः इस लग्न के जातकों की कुण्डली में मंगल पंचम और दशम भाव का स्वामी होता है। मूंगा को धारण करने से संतान सुख, भाग्य उन्नति, मान प्रतिष्ठा मे बढ़ोत्तरी, बुद्धि बल की प्राप्ति होती है। यदि मोती के साथ मूंगा पहना जाए तो आपको शुभ फलो की प्राप्ति होगी।

पन्नाः कर्क लग्न मे बुध तीसरे एवं बारहवे भाव का मालिक हेाता है और दोनो भाव अच्छे नही माने जाते है इसलिए कर्क लग्न के जातकों को पन्ना नही धारण करना चाहिए।

पुखराजः कर्क लग्न मे बृहस्पति छठवें एवं नौवे भाव का स्वामी हेाता है और साथ ही नवम त्रिकोण का मालिक भी है। अतः पुखराज धारण करने से आपको लाभ प्राप्त होगा। आपके ज्ञान वृद्धि, भाग्य मे उन्नति, पिता का सुख धन का सुख प्राप्त होगा। समाज मे आपका मान पद प्रतिष्ठा बढ़ेगा। यदि पीले पुखराज के साथ मोती अथवा मूंगा धारण करे तो यह अधिक शुभ होगा।

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हीराः- कर्क लग्न में शुक्र चतुर्थ एवं एकादश भाव का स्वामी होता है । परन्तु शुक्र इस लग्न के लिए अशुभ माना जाता है। शुक्र एवं चन्द्रमा में परस्पर शत्रुता का संबंध होता है। लेकिन शुक्र की महादशा में हीरा धारण कर सकते है। और शुक्र की महादशा के बाद अन्य किसी महादशा में हीरा धारण न करें।

नीलमः- कर्क लग्न में शनि सप्तम एवं अष्टम भाव का मालिक होता है सप्तम भाव मारक भाव तथा अष्टम भाव दुख भाव होता है जिसके कारण शनि यहाँ अशुभ फल देगा। अतः इस लग्न के जातकों को कभी भी नीलम नही धारण करना चाहिए।

नोटः- यह रत्नों को पहनने का एक सामान्य परिचय दिया गया है इसलिए कोई भी रत्न कुण्डली के विश्लेषण के पश्चात ही पहने ।

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