हनुमान जयंती 2023 | Hanuman Jayanti Benefit |

हनुमान जयंती का त्यौहार भगवान हनुमान जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष हनुमान जयंती चैत्र मास के पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, हनुमान जयंती के दिन भक्त  हनुमान मन्दिर जाते है, व्रत रखते है आदि। सभी मन्दिरों में हनुमान जयंती के दिन हनुमान-चालीसा और रामचरितमानस का पाठ भी किया जाता है। तमिलनाडु व केरल में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष माह के अमावस्या को तथा उड़ीसा में वैशाख माह के प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है, कर्नाटक और आन्ध्र-प्रदेश में चैत्र पूर्णिमा से लेकर वैशाख माह के 10 वें दिन तक यह त्यौहार मनाया जाता है।

हनुमान जयंती का इतिहास

भगवान हनुमान जी की कहानी रामायण काल की लगभग हजारों साल पीछे की है, उन्होंने कैसे जन्म लिया, इसके पीछे अलग-अलग कहानियां प्रचलित है, उनमें से कुछ का वर्णन हम यहाँ कर रहे है-

राजा दशरथ का पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ

राजा दशरथ जो अयोध्या के राजा थे, उनकी तीन रानियां थी परन्तु फिर भी वह निः संतान थें, ऋषि मुनि के सलाहनुसार वों (राजा दशरथ) पुत्र कामेष्टी यज्ञ कर रहे थें ताकि उन्हें उत्तराधिकारी की प्राप्ति हो सके। यज्ञ समाप्ति के बाद, यज्ञ की आग से एक पायसम निकला जिसकों राजा दशरथ को संतान प्राप्ति के लिए भस्म करना था परन्तु शिकारी के एक पक्षी उस पवित्र पायसम को छीनकर उड़ गया, वायु और पवन के स्वामी ने इसे अप्सरा अंजना को दे दिया तत्पश्चात् अंजना के गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ, जिन्हें पवनपुत्र या वायु के पुत्र के रुप में जाना जाता है।

अन्य कथा

इन्द्र देव के दरबार में पुंजिकस्थल नाम की एक अप्सरा थी, जब एक बार अंगिरा नाम के एक महान ऋषि इन्द्र देव के दर्शन के लिए पधारे तब ऋषि को प्रसन्न करने के लिए इन्द्र देव ने पुंजिकस्थल को ऋषि अंगिरा के लिए नृत्य करने को कहा। अप्सरा पुंजिक स्थल ने अपनी पुरी कोशिश की लेकिन ऋषि को उसके नृत्य में कोई दिलचस्पी नही हुआ और उन्होंने पुजिकस्थल को श्राप दिया कि वह पृथ्वी पर वानर के रुप में जन्म लेंगी, अप्सरा के क्षमा याचना  मांगने पर ऋषि ने उनसे कहा कि वह भगवान के एक महान भक्त को जन्म देगी जिनका ख्याति चारों तरफ रहेगा, उनके वजह से संसार में उनके माता-पिता को भी स्मरण रखा जायेगा, इस कथन के पश्चात अप्सरा पुंजिकस्थल का जन्म कुंजर (बंदरो के राजा) की बेटी के रुप में हुआ और उनकी शादी सुमेरु पर्वत के कपिराज केसरी के साथ हुआ, केसरी ने भगवान शिव से गहरी प्रार्थना की और उनसे अपने पुत्र का एक हिस्सा बनने का आग्रह किया, जिसका अभी जन्म नही हुआ था,

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भगवान शंकर ने केसरी की बात सुनी और हनुमान जी के रुप में जन्म लिया। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने राम अवतरित भगवान विष्णु की सेवा के लिए हनुमान के रुप में जन्म लिया था क्योंकि पृथ्वी पर जन्म लिए बिना भगवान ऐसा नही कर सकते थें।

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हनुमान जी के बारे में किस्से और तथ्य

हनुमान जी के बारे में बहुत सी कहानियाँ प्रचलित है जिसके बारे में भक्त लोग पूरी जागरुकता के साथ पढ़ते है, रामायण एक ग्रंथ है जिसमें हनुमान जी को राम के भक्त के रुप में दर्शाया गया है, सीता हरण के बाद जब राम और रावण का युद्ध चल रहा था तब हनुमान जी ने वानरसेना के साथ भगवान राम का पूरा समर्थन किया था। कई कहानियों में भगवान हनुमान को अलग-अलग रुप धारण करने, पर्वतों को उठानें, बादलों को पकड़ने, चट्टानों को तोड़ने तथा गरुड़ पक्षी से तेज दौड़ने की क्षमता को बताया गया है।
पुराणों, महाभारत और कुछ जैन ग्रंथो में भी भगवान हनुमान के बारे में उल्लेख मिलता है।

महावीर हनुमान जी की कथा

एक कथा के अनुसार हनुमान जी ने पहाड़ो की यात्रा की सूर्य को फल समझकर खाने के लिए आकाश में चले गए। पाप ग्रह, ग्रहण के लिए सूर्य की तरफ बढ़ रहा था तब उन्होने हनुमान को देखा और उनको रोकने की कोशिश की परन्तु असफल रहे। राहु सहायता के लिए भगवान इन्द्र के पास पहुंच गए, इन्द्रदेव ने अपना वज्र हनुमान जी के उपर फेंक दिया जिसके लगने के कारण हनुमान जी सुन्न हो गए, वायुदेव को अपने पुत्र को जमीन पर बेहोश होने का पता चला तो वह बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने पृथ्वी पर जीवन कठिन बना दिया तब देवताओं को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होने हनुमान जी को वापस जीवित कर दिया और उनको बहुत सारे वरदान भी दिये।

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हनुमान जयंती कैसे मनाई जाती है

हिन्दू धर्म में भगवान हनुमान का पूजा बड़े सम्मान से किया जाता है, हनुमान जयंती के दिन मंदिरो को सजाया जाता है और भव्य समारोह का आयोजन भी किया जाता है, इस समारोह पर भगवान हनुमान के माथे पर तिलक लगाया जाता है, इस दिन लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते है, मंत्रो का जाप करके, महावीर की आरती करते है और प्रसाद स्वरुप लड्डु वितरित करते है।

हनुमान जयंती पर्व का महत्व

भगवान महावीर (हनुमान) भगवान भोलेनाथ के 11 वें रुद्र अवतार हैं, उनको शक्ति, ज्ञान, वीरता, बुद्धिमत्ता और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जी ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले, नकारात्मक शक्तियों को दूर करने का साहस रखते है। भगवान हनुमान ने अपनी ताकत या वीरता का प्रदर्शन कभी-भी बिना किसी उद्देश्य के नही किया, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के प्रभु श्री राम और माता सीता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया, ऐसे भगवान हनुमान जी की पूजा हमें, पूरी श्रद्धा और लगन से करना चाहिए जिसमें हमे पुण्यों की प्राप्ति हों।

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हनुमान जयंती पूजा सामग्री

भगवान हनुमान की प्रतिमा।
रोली/सिंदुर।
सुपारी
लड्डु।
चावल।
लाल कपड़ा/रक्षासुत्र।
पान, फूल, सुपारी।
पानी।
पंचामृत (दूध, दही, शहद, चीनी और घी का मिश्रण)

हनुमान जयंती पूजा विधि

☸प्रातः काल स्नान आदि करने के बाद पूजा-स्थल पर बैठें और भगवान हनुमान का ध्यान करें।
☸भगवान हनुमान जी के मूर्ति पर सिंदूर लगाएं और उनके माथे पर सिंदुर का लेप भी लगाएं।
☸हनुमान जी को फूल चढ़ाएं और उनको पान, फल और सुपारी भी अर्पित करें।
☸तत्पश्चात महावीर के समक्ष अगरबत्ती जलाएं और मिट्टी का दीपक भी प्रज्वलित करें।
☸हनुमान जी को पंचामृत चढ़ाएं और उनके ऊपर थोड़े गंगाजल का छिड़काव भी करें।
☸उसके बाद हनुमान चालीसा या सुन्दरकाण्ड का पाठ भी करें।
☸अन्त में हनुमान जी की आरती करें और उनको लड्डु का भोग भी लगाएं।

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हनुमान जयंती शुभ तिथि एवं मुहूर्त

हुमान जयंती 2023 तिथिः- 06 अप्रैल 2023 गुरुवार को मनाया जायेगा।
पूर्णिमा तिथि आरम्भः- 05 अप्रैल 2023 को प्रातः 09ः19 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्तः- 06 अप्रैल 2023 को प्रातः 10ः04 बजे तक